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महाराष्ट्रः जांच में ख़ुलासा- संजय राउत और एकनाथ खड़से के फोन 60 दिनों तक टैप किए गए

यह टैपिंग कथित तौर पर नवंबर 2019 में महाविकास अघाड़ी की सरकार बनने से पहले उस समय हुई, जब भाजपा राज्य में सत्ता में थी. मामले की जांच एमवीए सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति के निष्कर्षों के परिणामस्वरूप हुई है. बताया गया है कि फोन टैपिंग का अनुरोध राज्य के इंटेलिजेंस विभाग द्वारा किया गया था.

शिवसेना सांसद संजय राउत और एनसीपी नेता एकनाथ खड़से (फोटोः पीटीआई)

नई दिल्लीः शिवसेना सांसद संजय राउत और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) नेता एकनाथ खड़से के फोन कथित तौर पर टैप किए गए और 67 और 60 दिनों तक अवैध रूप से उनकी सर्विलांस की गई. एनसीपी से पहले खड़से भाजपा में थे.

फ्री प्रेस जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, इन नेताओं के फोन कथित तौर पर उस समय टैप किए गए, जब महाराष्ट्र खुफिया विभाग (एसआईडी) की अध्यक्षता आईपीएस अधिकारी रश्मि शुक्ला कर रही थीं.

यह टैपिंग कथित तौर पर नवंबर 2019 में महाविकास अघाड़ी (एमवीए) की सरकार बनने से पहले उस समय हुई, जब भाजपा राज्य में सत्ता में थी.

गृह विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि राउत का फोन दो अवसरों पर टैप किया गया. एक बार सात दिनों के लिए और फिर दोबारा 60 दिनों के लिए. खड़से और राउत दोनों के नाम फोन टैपिंग के लिए एसआईडी की अनुरोध सूची में शामिल थे.

अधिकारी ने कहा, ‘सबसे महत्वपूर्ण यह है कि यह अनुरोध एसआईडी ने किया था. इसके अलावा कांग्रेस नेताओं नाना पटोले, निर्दलीय विधायक बच्चू कडू और पूर्व विधायक आशीष देशमुख के फोन भी अवैध रूप से टैप किए गए थे.’

मामले में मौजूदा जांच के तहत राउत और खड़से ने नौ और सात अप्रैल को अपने बयान पुलिस को सौंपे.

यह जांच फोन टैपिंग मामले में एमवीए सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति के निष्कर्षों के परिणामस्वरूप हुई. समिति का नेतृत्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) संजय पांडे की अध्यक्षता में किया गया, जो अब महाराष्ट्र के पुलिस आयुक्त हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, समिति को शुरुआत में पता चला कि शुक्ला ने कथित तौर पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले के फोन की टैपिंग में कथित तौर पर भूमिका निभाई थी और इस मामले में 25 फरवरी को पुणे में उनके खिलाफ मामला भी दर्ज किया गया था.

समिति ने राउत और खड़से के फोन टैप करने के लिए शुक्ला को जिम्मेदार पाया और समिति के सदस्यों में से एक ने आईपीसी की विभिन्न धाराओं और टेलीग्राफ एक्ट के तहत उनके खिलाफ मामला दर्ज कराया.

वह वर्तमान में हैदराबाद में केंद्रीय रिजर्व पुलिसबल (सीआरपीएफ) की अतिरिक्त महानिदेशक के तौर पर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं. उनके खिलाफ मार्च में मामला दर्ज कराया गया.

एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस को संदेह है कि और भी नेताओं के फोन टैप किए गए लेकिन उनके रिकॉर्ड को नष्ट कर दिया गया.

हालांकि, अधिकारी ने उन महीनों का खुलासा नहीं किया, जिनमें फोन टैप किए गए. उन्होंने दावा किया कि शुक्ला ने 2019 के आखिरी तीन महीनों में पंद्रह दिनों के लिए राउत, खड़से और पटोले के फोन टैप किए.

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव अक्टूबर 2019 में हुए थे.

मार्च में पटोले ने महाराष्ट्र की सिविल अदालत में शुक्ला के खिलाफ 500 करोड़ रुपये की मानहानि का मुकदमा दायर किया था.

अदालत ने शुक्ला को नोटिस जारी कर उनसे और मामले में नामजद अन्य लोगों से 12 अप्रैल से पहले अपने जवाब दाखिल करने को कहा था.