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बंगाल: हाईकोर्ट ने हंसखली बलात्कार मामले को सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया

एक टीएमसी नेता के 21 वर्षीय बेटे पर नदिया ज़िले के हंसखली में कक्षा 9 की छात्रा के साथ कथित सामूहिक बलात्कार और हत्या का आरोप है. हाईकोर्ट ने मामले की जांच तत्काल सीबीआई को सौंपते हुए कहा कि वह इस सच से आंखें नहीं मूंद सकते कि आरोपी सत्तारूढ़ पार्टी के एक प्रभावशाली नेता का बेटा है और केस डायरी से संकेत मिला है कि पीड़ित परिवार को धमकाया गया है.

कलकत्ता हाईकोर्ट. (फोटो साभार: Twitter/@LexisNexisIndia)

कोलकाता: कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल के हंसखली में एक नाबालिग लड़की के कथित बलात्कार और उसके परिणामस्वरूप हुई मौत के मामले की जांच को मंगलवार को राज्य पुलिस से केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने का आदेश दिया ताकि ‘निष्पक्ष जांच’ हो सके.

मुख्य न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने आदेश सुनाते हुए कहा कि कोई पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट नहीं है और कोई मृत्यु प्रमाणपत्र नहीं है, यह तथ्य पूरी घटना को दबाने और साक्ष्यों को नष्ट करने की कोशिश का संदेह पैदा करता है.

पीठ, जिसमें जस्टिस आर. भारद्वाज भी शामिल हैं, ने आदेश दिया, ‘मामले की परिस्थितियों को देखते हुए और कानूनी स्थिति पर विचार करने के बाद हमारी राय है कि मामले में निष्पक्ष जांच के लिए और पीड़िता के परिजनों तथा क्षेत्र एवं राज्य के निवासियों में विश्वास कायम करने के लिए स्थानीय पुलिस के बजाय सीबीआई को जांच करनी चाहिए.’

पीठ ने कहा, ‘हम राज्य की जांच एजेंसी को तत्काल प्रभाव से जांच सीबीआई को सौंपने का निर्देश देते हैं. हमने पाया कि जांच में कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर गंभीर खामिया हैं.’

अदालत ने राज्य की जांच एजेंसी को आरोपियों की हिरासत के साथ जांच से जुड़े सभी दस्तावेजों को सीबीआई को तत्काल सौंपने का निर्देश दिया.

उसने सीबीआई को भी निर्देश दिया कि दो मई को सुनवाई की अगली तारीख पर अदालत के समक्ष जांच की प्रगति के बारे में रिपोर्ट जमा करे.

पीठ ने संबंधित अधिकारियों को भी पीड़िता के परिजनों और मामले के गवाहों को पूरी सुरक्षा प्रदान किए जाने का भी निर्देश दिया.

उसने कहा कि वह इस सच से आंखें नहीं मूंद सकती कि आरोपी सत्तारूढ़ पार्टी के एक प्रभावशाली नेता का बेटा है और केस डायरी में उपलब्ध सामग्री से संकेत मिलता है कि पीड़िता के परिवार के सदस्यों को धमकाया गया है.

याचिकाकर्ता के वकीलों फिरोज एदुलजी और अनिंद्य सुदंर दास ने नाबालिग से कथित बलात्कार और उसकी मृत्यु के मामले में सीबीआई जांच का अनुरोध किया है क्योंकि आरोपी सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के हंसखली के एक प्रभावशाली पंचायत नेता का बेटा है.

आरोप है कि चार अप्रैल को लड़की आरोपी के जन्मदिन की पार्टी में उसके हंसखली स्थित आवास पर गई थी और उसके साथ बलात्कार करने से पहले उसे नशीले पदार्थ का सेवन कराया गया था. बलात्कार के एक दिन बाद कथित तौर पर रक्तस्राव की वजह से उसकी मृत्यु हो गई.

याचिका के अनुसार, 10 अप्रैल को हंसखली थाने में उसके परिवार के सदस्यों द्वारा प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी, जो कथित तौर पर आरोपी और उसके परिजनों के दबाव और धमकी के कारण इस बारे में चुप थे.

लड़की का कथित तौर पर बिना पोस्टमॉर्टम या मृत्यु प्रमाणपत्र के गांव के श्मशान घाट में अंतिम संस्कार कर दिया गया.

दास ने दावा किया कि पुलिस को घटना के लगभग एक हफ्ते बाद पता चला. उन्होंने कहा कि यह दर्शाता है कि पुलिस बल ठीक से काम करने में विफल रहा है.

इससे पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की इस मामले पर संवेदनहीन टिप्पणी को लेकर विवाद हो गया था. बनर्जी ने घटना पर सवाल उठाते हुए कहा था कि क्या 14 वर्षीय कथित हत्या और सामूहिक बलात्कार पीड़िता का वास्तव में बलात्कार हुआ था या क्या वह गर्भवती थी या उसका ‘प्रेम संबंध’ था.

माकपा और कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने बनर्जी के बयान को ‘चौंकाने वाला’ बताया और आरोप लगाया कि वह आरोपी को बचाने की कोशिश कर रही हैं, क्योंकि वह उनकी पार्टी के एक नेता का बेटा है.

यह पहली बार नहीं है जब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी ने महिलाओं के खिलाफ यौन अपराधों पर असंवेदनशील टिप्पणी की है. 2015 में कोलकाता के अपस्केल पार्क स्ट्रीट में एक वाहन में हुई सामूहिक बलात्कार की घटना को बनर्जी ने ‘मनगढ़ंत मामला’ बताया था.

उन्होंने यह तक बताने की कोशिश की थी कि पीड़िता और आरोपी के बीच एक समझ थी, जो गलत हो गई. तब भी उनकी इस टिप्पणी की काफी आलोचना हुई थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)