भारत

बिजली संकट गहराया, आपूर्ति में कमी 10.77 गीगावॉट पर पहुंची

देश में जारी बिजली संकट के बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कोयले की कमी की बात कही तो केंद्र ने पर्याप्त आपूर्ति का आश्वासन दिया. कोल इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन ने कहा है कि बिजली संयंत्रों के पास कोयले का पर्याप्त भंडार सुनिश्चित करना कोल इंडिया की प्राथमिकता है. उत्तर प्रदेश के बदायूं ज़िले में कटौती से परेशान लोगों द्वारा बिजली कर्मचारियों की पिटाई करने का मामला सामने आया है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: कोयले की कमी की वजह से देश में बिजली संकट गहराने के बीच व्यस्त समय में बिजली कमी भी बढ़ी है. इस सप्ताह सोमवार को बिजली की कमी, जहां 5.24 गीगावॉट थी, वही बृहस्पतिवार को यह बढ़कर 10.77 गीगावॉट हो गई.

राष्ट्रीय ग्रिड परिचालक, पावर सिस्टम ऑपरेशन कॉरपोरेशन (पीओएसओसीओ) के ताजा आंकड़ों से पता चला है कि रविवार (24 अप्रैल) को व्यस्त समय में बिजली की कमी सिर्फ 2.64 गीगावॉट थी, जो सोमवार को 5.24 गीगावॉट, मंगलवार को 8.22 गीगावॉट, बुधवार को 10.29 गीगावॉट और बृहस्पतिवार को 10.77 गीगावॉट हो गई.

आंकड़ों से यह भी पता चला है कि 29 अप्रैल, 2022 को अधिकतम पूरी की गई बिजली की मांग 207.11 गीगावॉट के सर्वकालिक उच्च स्तर को छू गई. इसके चलते शुक्रवार को बिजली की कमी घटकर 8.12 गीगावॉट रह गई.

दिलचस्प तथ्य यह है कि देशभर में तेज गर्मी के बीच इस सप्ताह में बिजली की आपूर्ति तीन बार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची.

व्यस्त समय में अधिकतम पूरी गई बिजली की मांग मंगलवार को रिकॉर्ड 201.65 गीगावॉट पर पहुंच गई. यह सात जुलाई, 2021 को 200.53 गीगावॉट थी.

बृहस्पतिवार को बिजली की अधिकतम मांग 204.65 गीगावॉट के रिकॉर्ड स्तर पर थी और शुक्रवार को यह 207.11 गीगावॉट के सर्वकालिक उच्च को छू गई. बुधवार को यह 200.65 गीगावॉट थी.

इस सप्ताह की शुरुआत में सोमवार (25 अप्रैल) को अधिकतम पूरी गई बिजली मांग 199.34 गीगावॉट थी.

विशेषज्ञों का कहना है कि इन आंकड़ों से स्पष्ट पता चलता है कि बिजली की मांग में तेजी आई है और कुछ ही दिनों में इसकी वजह से देश में बिजली संकट गहरा गया है.

उनका कहना है कि केंद्र और राज्य सरकारों के नेतृत्व में सभी हितधारकों को ताप बिजलीघरों में कम कोयले के भंडार, परियोजनाओं पर रैक को तेजी से खाली करने और इनकी उपलब्धता बढ़ाने पर ध्यान देना होगा.

विशेषज्ञों ने कहा कि अभी गर्मी की शुरुआत में जब यह हाल है, तो मई और जून की स्थिति का अंदाजा ही लगाया जा सकता है.

बिजली मंत्रालय ने कहा था कि मई-जून 2022 में बिजली की मांग लगभग 215-220 गीगावॉट तक पहुंच सकती है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) द्वारा निगरानी की गई 164 गीगावॉट से अधिक की कुल क्षमता वाले 147 नॉन-पिटहेड थर्मल प्लांटों में कोयले का स्टॉक 28 अप्रैल, 2022 को मानक स्तर का 24 प्रतिशत था.

इन संयंत्रों में गुरुवार को कोयले का स्टॉक 57,236 हजार टन के मानक के मुकाबले 13,755 हजार टन था.

नॉन-पिटहेड संयंत्र कोयला खदानों से सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित होते हैं और यहां शुष्क ईंधन स्टॉक को बनाए रखना आवश्यक है.

विशेषज्ञों का मत था कि भारत में कोयला आधारित बिजली अभी भी प्रमुख है और यह निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण भी है.

मालूम हो कि इन दिनों जम्मू कश्मीर से लेकर आंध्र प्रदेश तक उपभोक्ताओं को दो घंटे से आठ घंटे तक की बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है. बिजली कटौती से कारखाने सबसे ज्यादा प्रभावित हैं.

देश में मार्च में रिकॉर्ड गर्मी के बाद अप्रैल में भी अत्यधिक गर्मी जारी है. ऐसे में बिजली की मांग अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है.

इस संकट के केंद्र में कोयले की कमी है. देश में कोयले से 70 प्रतिशत बिजली का उत्पादन होता है. सरकार दावा कर रही है कि मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त कोयला उपलब्ध है, लेकिन बिजली संयंत्रों में कोयले का भंडार नौ वर्षों में सबसे कम हैं.

केजरीवाल ने कोयले की कमी की बात कही; केंद्र ने पर्याप्त आपूर्ति का आश्वासन दिया

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को फिर से कोयले की कमी का मुद्दा उठाया, हालांकि केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने कहा कि दिल्ली की बिजली आपूर्ति कंपनियों को आवश्यकता के अनुसार बिजली मिलती रहेगी.

दिल्ली सरकार ने विभिन्न बिजली घरों में कोयले की कमी का संदर्भ देते हुए बिजली आपूर्ति बाधित होने की चेतावनी दी है.

एक कार्यक्रम से इतर केजरीवाल ने पत्रकारों से कहा, ‘दिल्ली में बिजली आपूर्ति का प्रबंधन हम (दिल्ली सरकार) कर रहे हैं. कोयले की कमी के कारण यह समस्या पूरे देश के सामने है.’

बीते 28 अप्रैल को कोयले की कमी को लेकर गहराते संकट के बीच दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में मेट्रो ट्रेन और अस्पतालों सहित महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को निर्बाध बिजली आपूर्ति में संभावित बाधा आने को लेकर चेतावनी भी दी थी.

ऊर्जा मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री ने दिल्ली को बिजली आपूर्ति करने वाले बिजली संयंत्रों सहित अन्य ताप बिजली घरों में कोयले की उपलब्धता की समीक्षा की.

बयान के अनुसार, ‘मंत्री ने दिल्ली की बिजली वितरण कंपनियों को निर्देश दिया है कि उन्हें मांग के अनुरूप बिजली मिलेगी.’

टाटा पावर दिल्ली वितरण निगम (टीपीडीडीएल) ने एक बयान में कहा कि वह उन बिजलीघरों में कोयले की उपलब्धता पर नजर रख रहा है, जिनके साथ उसका लंबे समय तक का करार है.

बयान के अनुसार, ‘बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने और अतिरिक्त मांगों के मद्देनजर टीपीडीडीएल ने हाल में मई के पहले सप्ताह से 31 जुलाई तक 150 मेगावाट अतिरिक्त बिजली के लिए करार किया है.’

‘बिजली संयंत्रों के पास कोयले का पर्याप्त भंडार सुनिश्चित करना कोल इंडिया की प्राथमिकता’

सार्वजनिक क्षेत्र की कोयला खनन कंपनी कोल इंडिया ने कहा कि ताप ऊर्जा संयंत्रों को पर्याप्त ईंधन की आपूर्ति करना उसकी ‘प्राथमिकता’ है. कंपनी ने अपने कर्मचारियों से चालू वित्त वर्ष में 70 करोड़ टन के कोयला उत्पादन और उठाव के लक्ष्य को पार करने के लिए अपने प्रयासों को तेज करने को कहा है.

कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक प्रमोद अग्रवाल ने कर्मचारियों को भेजे पत्र में कहा कि कंपनी की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि बिजली की कमी के बीच बिजली उत्पादन करने वाली इकाइयों के पास घरेलू ईंधन का पर्याप्त भंडार हो.

अग्रवाल ने कर्मचारियों से कहा कि वे इसे ‘पावन’ लक्ष्य मानें. उन्होंने कहा, ‘कोल इंडिया की प्राथमिकता है कि देश के बिजली संयंत्रों में घरेलू कोयले का पर्याप्त भंडार हो और देश को उचित दामों पर बिजली मिले. हमारा लक्ष्य ऊर्जा को कम से कम कीमत पर सुनिश्चित करने का होना चाहिए.’

उन्होंने कहा, ‘बीते वित्त वर्ष के प्रदर्शन से प्रेरणा लें और 70 करोड़ टन उत्पादन तथा उठान के लक्ष्य को पार करें.’

कंपनी की ओर से 2021-22 में ऊर्जा क्षेत्र को आपूर्ति 54.04 करोड़ टन के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई थी. तब कंपनी का कोयला उठाव भी 66.2 करोड़ टन के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया, जो 2020-21 के मुकाबले 15.3 फीसदी अधिक था.

राज्य सरकारों की बिजली कंपनियों पर कोल इंडिया का 6,477.5 करोड़ रुपये का बकाया

महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, झारखंड, तमिलनाडु, राजस्थान और मध्य प्रदेश की बिजली उत्पादन करने वाली सरकारी कंपनियों पर कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) का 6,477.5 करोड़ रुपये का बकाया है.

देश अभी कोयले की कमी के कारण बिजली संकट का सामना कर रहा है.

सूत्रों ने बताया कि महाराष्ट्र स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी पर कोल इंडिया का सबसे अधिक 2,608.07 करोड़ रुपये का बकाया है, जबकि पश्चिम बंगाल पावर डेवलेपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (डब्ल्यूपीडीसीएल) पर 1,066.40 करोड़ रुपये बाकी है.

सूत्रों के मुताबिक, महाराष्ट्र, राजस्थान और पश्चिम बंगाल की बिजली उत्पादन कंपनियों पर बकाया बहुत ज्यादा है लेकिन सीआईएल ने इन्हें आपूर्ति कभी नहीं रोकी और उन्हें पर्याप्त मात्रा में आपूर्ति की है.

कटौती से परेशान लोगों ने बिजली कर्मचारियों की पिटाई की

इस बीच उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के सहसवान इलाके में बिजली की बेतहाशा कटौती से नाराज स्थानीय लोगों ने रविवार को विद्युत लाइन में आई खराबी ठीक करने गए दो बिजली कर्मचारियों की लाठी-डंडों से पिटाई कर दी. पुलिस सूत्रों ने यह जानकारी दी.

उन्होंने बताया कि सहसवान नगर क्षेत्र के रहने वाले फुरकान हुसैन और नफीस अहमद बिजली विभाग में संविदा कर्मचारी हैं. दोनों ने पुलिस को दी गई तहरीर में आरोप लगाया है कि रविवार सुबह वे हरना तकिया गांव में हाई टेंशन लाइन में आई खराबी की जांच कर रहे थे, तभी चंद्रपाल सिंह, जोगिंदर सिंह, रामचंद्र व मुजीब हुसैन नामक व्यक्ति लाठी-डंडे लेकर आए और बिजली कटौती को लेकर उनके साथ मारपीट की.

सूत्रों के मुताबिक, पीड़ितों की तहरीर पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने और मारपीट करने के आरोप में मुकदमा दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास शुरू कर दिए हैं.

गौरतलब है कि बदायूं जिले में बेतहाशा बिजली कटौती हो रही है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. पिछले बृहस्पतिवार को बिसौली विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के विधायक आशुतोष मौर्य ने विद्युत उप केंद्र प्रभारी से मारपीट की थी. इस मामले में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)