भारत

अलीगढ़ धर्म सभा में कथित तौर पर नफ़रत भरे भाषण दिए गए, नरसिंहानंद और कालीचरण हुए थे शामिल

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ शहर में बीते एक मई को ‘सनातन हिंदू सेवा संस्थान’ द्वारा एक धर्म सभा का आयोजन किया गया था. आरोप है कि सभा में एक ​बार फिर अल्पसंख्यक समुदाय के ख़िलाफ़ नफ़रत भरे भाषण दिए गए हैं. नरसिंहानंद और कालीचरण पहले से ही नफ़रत भरे भाषणों के लिए आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं.

यति नरसिंहानंद. (फोटो साभार: ट्विटर)

अलीगढ़: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ शहर में हुए एक सम्मेलन के आयोजक को एक विशेष समुदाय के खिलाफ कथित भड़काऊ भाषण देने के आरोप में जिला प्रशासन द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. इस सम्मेलन में हिंदू धार्मिक संगठनों और उपदेशकों ने हिस्सा लिया था.

अलीगढ़ के गांधी पार्क थाना क्षेत्र के अचल ताल स्थित रामलीला मैदान में बीते एक मई ‘सनातन हिंदू सेवा संस्थान’ द्वारा सनातन धर्म सभा का आयोजन किया गया था.

इस सभा में कट्टरपंथी हिंदुत्वादी धर्मगुरु यति नरसिंहानंद और कालीचरण महाराज भी शामिल थे, दोनों पहले से ही नफरत भरे भाषणों के लिए आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं.

अपर नगर मजिस्ट्रेट कुंवर बहादुर सिंह ने कथित तौर पर तय सीमा से अधिक आवाज में लाउडस्पीकर बजाने और कार्यक्रम में हथियारों का प्रदर्शन कर आयोजन की अनुमति की शर्तों का उल्लंघन करने पर नोटिस भेजकर संगठन को उचित जवाब देने के लिए 24 घंटे का समय दिया है और चेतावनी दी है कि ऐसा नहीं करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

नोटिस में कहा गया है कि रविवार (एक मई) को आयोजित सम्मेलन में एक विशेष समुदाय के खिलाफ भड़काऊ भाषण दिए गए हैं.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, प्रशासन द्वारा आयोजकों को भेजे गए नोटिस में कहा है, ‘भोजन वितरण और पुजारियों के लिए एक समारोह की अनुमति ली गई थी. यह हमारे संज्ञान में लाया गया है कि हथियार ले जाने पर प्रतिबंध के बावजूद इस कार्यक्रम में तलवारें लहराई गई थीं. ऐसी भी खबरें हैं कि भावनाओं को भड़काने के लिए एक धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय के बारे में टिप्पणी की गई थी.’

अलीगढ़ पुलिस के अनुसार, घटना के संबंध में कोई शिकायत नहीं मिली है. एक अधिकारी ने कहा कि प्रशासन द्वारा जारी नोटिस के अनुसार कार्रवाई की जाएगी.

हिंदू धर्म प्रचारक कालीचरण महाराज ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा था कि ‘मुसलमानों की बढ़ती आबादी’ के कारण देश एक बड़े खतरे का सामना कर रहा है और जिहादी तत्वों द्वारा उत्पन्न समस्या को रोकने का एकमात्र तरीका हिंदू राष्ट्र की स्थापना है.

उन्होंने कहा कि हिंदू महिलाओं को ऐसे तत्वों से आसन्न खतरे का सामना करना पड़ रहा है और हिंदू समुदाय के सदस्यों को इस तरह के खतरे का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, कथित तौर पर अलीगढ़ में हुई इस धर्म सभा से जुड़े एक वीडियो में कालीचरण को भीड़ को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि देश में ‘हिंदू अल्पसंख्यक हो गए हैं’ तथा वर्तमान में ‘स्थितियां खतरनाक’ हैं और समुदाय को सभी परिस्थितियों के लिए तैयार रहना चाहिए.

उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा कि हिंदू समुदाय को अपने प्रियजनों को अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों से बचाने के बारे में सोचना चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि हाल की फिल्म ‘कश्मीर फाइल्स’ ने हिंदुओं के खिलाफ अत्याचारों का एक प्रतिशत भी नहीं दिखाया जो वास्तव में कश्मीर में हुआ था.

मालूम हो कि कालीचरण ने छत्तीसगढ़ के रायपुर में धर्म संसद के दौरान गांधी के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था. गांधी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में महाराष्ट्र की ठाणे पुलिस ने कालीचरण को 19 जनवरी को छत्तीसगढ़ से गिरफ्तार किया था और 1 अप्रैल को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जमानत दे दी थी.

अधिवेशन को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय संत परिषद के राष्ट्रीय संयोजक यति नरसिंहानंद ने कहा कि भारत में हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक ही तरीका है. हिंदुओं को अधिक बच्चे पैदा करने चाहिए अन्यथा वर्ष 2029 तक वे मुसलमानों द्वारा उत्पन्न संकट में फंस जाएंगे.

उन्होंने जनसंख्या की व्याख्या करते हुए संभावना जताई कि 2029 तक भारत में एक मुस्लिम प्रधानमंत्री होगा और राज्यों में मुस्लिम मुख्यमंत्री होंगे.

मालूम हो कि बीते 18 अप्रैल को हिमाचल प्रदेश में कट्टरपंथी हिंदुत्ववादी धर्मगुरु यति नरसिंहानंद के एक संगठन ने भारत को इस्लामिक देश बनने से बचाने के लिए हिंदुओं से अधिक बच्चों को जन्म देने का आह्वान किया था.

इससे पहले हरिद्वार में बीते साल आयोजित धर्म संसद में मुस्लिमों के नरसंहार का आह्वान करने के मामले में जमानत पर बाहर आए महंत यति नरसिंहानंद ने अप्रैल महीने में भी मथुरा में हिंदुओं से देश को आगामी दशकों में ‘हिंदू-विहीन’ बनने से रोकने के लिए अधिक बच्चों को जन्म देने का अनुरोध किया था.

इसके अलावा उत्तर दिल्ली के बुराड़ी में बीते तीन अप्रैल को आयोजित ‘हिंदू महापंचायत’ कार्यक्रम में नरसिंहानंद ने एक बार फिर मुस्लिमों के खिलाफ हिंसा का आह्वान करते पाए गए थे. इस संबंध में उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया है.

धर्म संसद मामले में गिरफ्तारी के बाद जमानत पर रिहा हुए नरसिंहानंद ने जमानत शर्तों का उल्लंघन करते हुए मुस्लिमों पर निशाना साधते हुए नफरती भाषण दिए थे.

इस मामले में अदालत की जमानत शर्तों का उल्लंघन करने के लिए नरसिंहानंद और अन्य वक्ताओं के खिलाफ मुखर्जी नगर पुलिस थाने में नफरती भाषण देने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है.

कट्टर हिंदुत्ववादी नेता यति नरसिंहानंद हरिद्वार धर्म संसद के आयोजकों में से एक थे. नरसिंहानंद उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित डासना मंदिर के पुजारी हैं, जो अपने बयानों को लेकर पहले भी विवादों में रहे हैं.

बीते साल दिसंबर में हरिद्वार शहर में आयोजित ‘धर्म संसद’ में मुसलमान एवं अल्पसंख्यकों के खिलाफ खुलकर नफरत भरे भाषण देने के साथ उनके नरसंहार का आह्वान भी किया गया था.

धर्म संसद में यति नरसिंहानंद ने मुस्लिम समाज के खिलाफ भड़काऊ बयानबाजी करते हुए कहा था कि वह ‘हिंदू प्रभाकरण’ बनने वाले व्यक्ति को एक करोड़ रुपये देंगे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)