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विख्यात संतूर वादक पंडित शिवकुमार शर्मा का निधन

पद्मश्री और पद्मविभूषण से सम्मानित संतूर वादक पंडित शिव कुमार शर्मा का जन्म 1938 में जम्मू में हुआ था. माना जाता है कि वह पहले संगीतकार थे, जिन्होंने संतूर पर भारतीय शास्त्रीय संगीत के सुर बिखेरे. संतूर जम्मू कश्मीर का एक लोक वाद्य यंत्र है. बांसुरी वादक पं. हरि प्रसाद चौरसिया के साथ उनकी जोड़ी को ‘शिव-हरि’ का नाम दिया गया था. इस जोड़ी ने ‘सिलसिला’, ‘लम्हे’ और ‘चांदनी’ जैसी कई फिल्मों में संगीत दिया है.

पंडित शिवकुमार शर्मा. (फोटो साभार: फेसबुक)

मुंबई: संतूर को विश्वभर में पहचान दिलाने वाले संगीतकार पंडित शिव कुमार शर्मा का मुंबई में मंगलवार को सुबह दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. शर्मा 84 वर्ष के थे. वह भारत के जाने-माने शास्त्रीय संगीतकारों में से एक थे, जिन्होंने फिल्मों में भी संगीत दिया था.

उनके सचिव दिनेश ने बताया कि मुंबई के पाली हिल स्थित आवास पर सुबह आठ से साढ़े आठ बजे के बीच शर्मा का निधन हो गया. अगले सप्ताह उन्हें भोपाल में एक कार्यक्रम प्रस्तुत करना था. वह गुर्दे की समस्याओं से भी पीड़ित थे.

शर्मा के एक पारिवारिक सूत्र ने बताया, ‘उन्हें सुबह दिल का दौरा पड़ा. वह ठीक थे और अगले सप्ताह भोपाल में उनका कार्यक्रम होना था. उनका नियमित डायलिसिस होता था फिर भी वह नियमित कामकाज करते रहते थे.’

उनके परिवार में पत्नी मनोरमा और बेटे राहुल तथा रोहित हैं.

शिवकुमार शर्मा को 1986 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 1991 में पद्मश्री तथा 2001 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था.

शर्मा का जन्म 1938 में जम्मू में हुआ था. माना जाता है कि वह पहले संगीतकार थे, जिन्होंने संतूर पर भारतीय शास्त्रीय संगीत के सुर बिखेरे. संतूर जम्मू कश्मीर का एक लोक वाद्य यंत्र है.

जम्मू कश्मीर के लगभग अनजाने वाद्य यंत्र संतूर को शिवकुमार शर्मा ने एक शास्त्रीय दर्जा दिया और उन्हें इसे अन्य पारंपरिक और प्रसिद्ध वाद्ययंत्रों जैसे सितार और सरोद के समकक्ष लाकर खड़ा करने का श्रेय दिया जाता है.

बांसुरी वादक पंडित हरि प्रसाद चौरसिया के साथ शर्मा की जोड़ी को ‘शिव-हरि’ का नाम दिया गया था. इस जोड़ी ने ‘सिलसिला’, ‘लम्हे’ और ‘चांदनी’ जैसी कई फिल्मों में संगीत दिया, जिसे लोगों ने बेहद पसंद किया.

शिवकुमार के बेटे राहुल शर्मा भी एक संतूर वादक हैं.

शर्मा के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए प्रख्यात सरोद वादक अमजद अली खान ने ट्वीट किया, ‘पंडित शिव कुमार शर्मा जी के निधन से एक युग का अंत हो गया. वह संतूर वादन के पुरोधा थे और उनका योगदान अतुलनीय है. मेरे लिए यह व्यक्तिगत क्षति है और मैं हमेशा उन्हें बहुत याद करूंगा. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे. उनका संगीत हमेशा जीवित रहेगा. ओम शांति.’

शर्मा के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत अन्य लोगों ने श्रद्धांजलि दी.

मोदी ने कहा, ‘पंडित शिवकुमार शर्मा जी के निधन से हमारे सांस्कृतिक जगत की क्षति हुई है. उन्होंने वैश्विक स्तर पर संतूर को लोकप्रिय बनाया. उनका संगीत आने वाली पीढ़ियों को प्रोत्साहित करता रहेगा. उनके साथ हुई बातचीत मुझे याद है. उनके परिजनों और प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदनाएं. ओम शांति.’

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्वीट किया, ‘प्रख्यात संतूर वादक और अंतरराष्ट्रीय स्तर के भारतीय संगीतकार पंडित शिवकुमार शर्मा के निधन का समाचार पाकर दुख हुआ. उनके जाने से सांस्कृतिक जगत की हानि हुई है. मेरी गहरी संवेदनाएं.’

गजल गायक पंकज उधास, संगीतकार सलीम मर्चेंट और अभिनेत्री शबाना आजमी ने भी शर्मा के निधन पर शोक व्यक्त किया.

उधास ने कहा, ‘हमने आज एक रत्न खो दिया, पद्म विभूषण श्री शिव कुमार शर्मा जी संतूर कलाप्रवीण व्यक्ति… भारतीय शास्त्रीय संगीत के लिए एक बड़ी क्षति. उनकी आत्मा को शांति मिले.’

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने शर्मा के राजकीय अंतिम संस्कार की घोषणा की है.

महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने शोक संदेश में कहा, ‘पं. शिव कुमार शर्मा के निधन की खबर चौंकाने वाली है. उन्होंने संतूर और भारतीय शास्त्रीय संगीत को वैश्विक मंच पर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. पं शर्मा एक महान कलाकार, गुरु, शोधकर्ता, विचारक और सबसे बढ़कर एक दयालु इंसान थे.’

उन्होंने आगे कहा, ‘पंडित शिव कुमार शर्मा ने कई शिष्यों का मार्गदर्शन किया और अपने विविध योगदानों से संगीत की दुनिया को समृद्ध किया. मैं पंडित शिव कुमार शर्मा को सम्मानजनक श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और पं राहुल शर्मा और शोक संतप्त परिवार के अन्य सदस्यों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं.’

उनका अंतिम संस्कार बुधवार दोपहर करीब 3 बजे पूरे राजकीय सम्मान के साथ पवन हंस शवदाहगृ​ह में होगा. उनके बेटे राहुल के जुहू स्थित घर पर सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक लोगों को उनके अंतिम दर्शन करने की अनुमति दी गई है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)