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नियुक्ति के 10 महीने में ही यूपी डीजीपी मुकुल गोयल को काम की उपेक्षा के आरोप में हटाया गया

सरकारी बयान में गया है कि पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) मुकुल गोयल को शासकीय कार्यों की अवहेलना करने, विभागीय कार्यों में रुचि न लेने एवं अकर्मण्यता के चलते डीजीपी के पद से हटा दिया गया है. उत्तर प्रदेश सरकार ने भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के वरिष्ठ अधिकारी देवेंद्र सिंह चौहान को उनकी जगह राज्य का कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त कर दिया है.

मुकुल गोयल. (फोटो: पीटीआई)

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) मुकुल गोयल को बुधवार को सरकारी काम में लापरवाही के आरोप में पद से हटा दिया गया.

अपर मुख्य सचिव नवनीत सहगल ने बताया कि नए पुलिस महानिदेशक चुने जाने तक अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) प्रशांत कुमार को पुलिस महानिदेशक का कार्यभार संभालने को कहा गया था.

हालांकि बृहपतिवार शाम उत्तर प्रदेश सरकार ने भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के वरिष्ठ अधिकारी देवेंद्र सिंह चौहान को राज्य का कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नियुक्त कर दिया.

गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव अवनीश कुमार अवस्थी ने बृहस्पतिवार को जारी एक आदेश में बताया कि वर्ष 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी चौहान को पुलिस महानिदेशक के पद पर स्थायी नियुक्ति होने तक प्रदेश के डीजीपी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है.

इसमें कहा गया है कि इस दौरान वह पुलिस महानिदेशक (अभिसूचना) का दायित्व भी संभालते रहेंगे.

एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, गोयल को पुलिस महानिदेशक (डीजी) नागरिक सुरक्षा के पद पर भेजा गया है. फरवरी 2024 में वे रिटायर होंगे.

बयान में गया है, ‘पुलिस महानिदेशक मुकुल गोयल को शासकीय कार्यों की अवहेलना करने, विभागीय कार्यों में रुचि न लेने एवं अकर्मण्यता के चलते डीजीपी के पद से हटा दिया गया है.’

वर्ष 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी गोयल को पिछले साल जून में प्रदेश का पुलिस महानिदेशक डीजीपी नियुक्त किया गया था. उत्तर प्रदेश का डीजीपी बनने से पहले वह सीमा सुरक्षा बल में अपर पुलिस महानिदेशक के पद पर तैनात थे.

मुजफ्फरनगर में जन्मे गोयल भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान से इलेक्ट्रिकल इंजीनियर की डिग्री हासिल कर चुके हैं.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, मुकुल गोयल उन आईपीएस अधिकारियों में शामिल थे, जिन्हें 2007 में तत्कालीन मायावती सरकार ने पुलिस भर्ती में कथित अनियमितताओं के लिए निलंबित कर दिया था. बाद में उन्हें बहाल कर दिया गया और मामला बंद कर दिया गया.

वह एडीजी (कानून व्यवस्था) थे, जब अखिलेश यादव सरकार के शासन के दौरान 2013 में मुजफ्फरनगर दंगे हुए थे.

गोयल को हाल ही में कानून व्यवस्था के संबंध में महत्वपूर्ण सरकारी फैसलों पर प्रेस वार्ता में नहीं देखा गया था. दरअसल, प्रशांत कुमार ने हाल ही में अपर मुख्य सचिव अवनीश कुमार अवस्थी के साथ प्रेस को संबोधित किया था.

पिछले साल सितंबर में गोयल ने लखनऊ के हजरतगंज थाने का निरीक्षण किया था और परिसर में रिकॉर्ड के खराब रखरखाव और स्वच्छता की कमी पर नाराजगी व्यक्त की थी. उनके निर्देश के बावजूद थाना प्रभारी को हटाया नहीं गया.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)