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ज्ञानवापी मस्जिद: कड़ी सुरक्षा के बीच पहले दिन का सर्वे संपन्न, रविवार को भी जारी रहेगा

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में काशी विश्व​नाथ मंदिर के पास स्थित ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का सर्वे-वीडियोग्राफी कार्य शनिवार सुबह कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच एक बार फिर शुरू हो गया. अधिकारियों के मुताबिक, मस्जिद परिसर के 500 मीटर के दायरे में लोगों की आवाजाही रोक दी गई है. अदालत ने संपूर्ण परिसर की वीडियोग्राफी कर 17 मई तक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है.

वाराणसी जिले में ज्ञानवापी मस्जिद के बाहर वीडियो-ग्राफिक सर्वेक्षण करने के लिए पुलिस कर्मी मोबाइल फोन का उपयोग करते हुए. (फोटो: पीटीआई)

वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर में काशी विश्व​नाथ मंदिर के पास में ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का सर्वे-वीडियोग्राफी कार्य शनिवार सुबह कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच एक बार फिर शुरू हो गया और यह रविवार को भी जारी रहेगा. अधिकारियों ने यह जानकारी दी.

वाराणसी के पुलिस आयुक्त ए. सतीश गणेश ने बताया, ‘सर्वे कार्य शांतिपूर्ण तरीके से चला. किसी भी पक्ष ने कोई अवरोध उत्पन्न नहीं किया. सब कुछ सामान्य है. हम (पुलिस आयुक्त और जिला मजिस्ट्रेट) सर्वे कार्य की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं.‘

गणेश ने कहा, ‘आज का सर्वेक्षण पूरा हो गया है. कल (रविवार) यह एक बार फिर शुरू किया जाएगा.’

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, शनिवार को आयोग के सर्वेक्षण के समापन के बाद मामले में हिंदू महिलाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील सुधीर त्रिपाठी ने कहा, ‘सर्वेक्षण कल (रविवार) भी जारी रहेगा. इसमें से करीब 50 फीसदी काम हो चुका है. प्रशासन और विरोधी पक्ष के सहयोग से आयोग की कार्रवाई चार घंटे तक चलती रही. किसी के द्वारा कोई बाधा उत्पन्न नहीं किया गया. सर्वे की रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाएगी.’

इससे पहले शनिवार सुबह वाराणसी के जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने बताया था, ‘अधिकृत व्यक्ति, जिनमें सभी पक्ष, उनके वकील, एडवोकेट कमिश्नर और वीडियोग्राफर शामिल हैं, मौके पर पहुंच गए हैं. ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में सर्वेक्षण शुरू हो गया है.’

शनिवार को 1,500 से अधिक पुलिसकर्मियों और पीएसी जवानों को ज्ञानवापी मस्जिद परिसर की सुरक्षा में तैनात किया गया था.

अधिकारियों के मुताबिक, ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के 500 मीटर के दायरे में लोगों की आवाजाही रोक दी गई है. उन्होंने बताया कि पुलिस ने गोदौलिया और मैदागिन इलाके से वाहनों की आवाजाही भी प्रतिबंधित कर दी थी.

ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में प्रवेश करने से पहले हिंदू पक्ष के अधिवक्ता मदन मोहन यादव ने कहा कि एडवोकेट कमिश्नर अजय कुमार मिश्रा ने सर्वे टीम के सभी सदस्यों को सुबह 7:30 बजे विश्वनाथ मंदिर परिसर के गेट नंबर-4 पर हाजिर होने का निर्देश दिया था.

अधिकारियों के अनुसार, परिसर की वीडियोग्राफी के लिए विशेष लाइट और कैमरे की व्यवस्था की गई है. उन्होंने बताया कि सर्वे टीम में मुकदमे के वादी, प्रतिवादी, उससे जुड़े अधिवक्ता, एडवोकेट कमिश्नर और एडिशनल एडवोकेट कमिश्नर शामिल हैं.

ज्ञानवापी मस्जिद प्रतिष्ठित काशी विश्वनाथ धाम के करीब स्थित है और स्थानीय अदालत महिलाओं के एक समूह द्वारा इसकी बाहरी दीवारों पर मूर्तियों के सामने दैनिक प्रार्थना की अनुमति मांगने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रही है.

जिलाधिकारी शर्मा ने इससे पहले कहा था कि शुक्रवार को सभी संबंधित पक्षों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी, जिसमें उनसे अदालत द्वारा गठित आयोग के काम में अवरोध उत्पन्न न करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग देने की अपील की गई थी.

दीवानी अदालत के न्यायाधीश (सीनियर डिवीजन) रवि कुमार दिवाकर ने बृहस्पतिवार को मुस्लिम पक्ष की आपत्ति खारिज करते हुए ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर भी सर्वे कराने और इस कार्य के लिए नियुक्त एडवोकेट कमिश्नर अजय कुमार मिश्रा को नहीं हटाने का निर्णय लिया था.

सुप्रीम कोर्ट का सर्वे पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर आदेश पारित करने से इनकार

इस बीच बीते शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वेक्षण के लिए वाराणसी की अदालत के हालिया आदेश पर रोक लगाने की मांग वाली एक अपील पर कोई आदेश पारित करने से इनकार कर दिया.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मस्जिद की प्रबंधन समिति अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने मामले को लेकर शीर्ष अदालत पहुंचे थे. अहमदी ने तर्क दिया था कि वाराणसी की अदालत का फैसला उपासना स्थल अधिनियम, 1991 के विपरीत है.

उपासना स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 कहता है कि पूजा स्थल का धार्मिक स्वरूप जारी रहेगा, जैसा कि 15 अगस्त, 1947 को अस्तित्व में था.

हालांकि, भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) एनवी रमना की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि अदालत को मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने से पहले मामले की फाइलों की जांच करनी होगी.

जवाब में अहमदी ने सर्वेक्षण को आगे बढ़ने से रोकने के लिए यथास्थिति के आदेश की मांग की. हालांकि सीजेआई रमना ने कहा कि अदालत इसकी अनुमति नहीं दे सकती, क्योंकि उसे मामले के तथ्यों से अवगत नहीं कराया गया है.

इस बीच जिलाधिकारी ने बताया कि शुक्रवार को सभी संबंधित पक्षों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई एवं उन सभी से अपील की गई कि वे अदालत द्वारा गठित आयोग के काम में पूरा सहयोग करें और कानून व्यवस्था बनाए रखें. इस बैठक में मुस्लिम पक्ष के वकील भी मौजूद थे.

ज्ञानवापी मस्जिद का रखरखाव करने वाली संस्था ‘अंजुमन इंतजामिया मसाजिद’ के संयुक्त सचिव सैयद मोहम्मद यासीन ने शुक्रवार को कहा था, ‘हमने सिविल जज रवि कुमार दिवाकर की अदालत द्वारा बृहस्पतिवार को पारित आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. न्यायालय ने कहा है कि वह इस पर कोई आदेश देने से पहले सभी फाइलें देखेगा. अगर वह इस मामले पर कोई आदेश नहीं देता है तो हम हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटा सकते हैं.’

यासीन ने कहा था, ‘तब तक हम जिला अदालत द्वारा दिए गए आदेश के पालन में सहयोग करेंगे.’

वहीं, मुस्लिम पक्ष के वकील अभय नाथ यादव ने कहा था कि जिला अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने के बारे में अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. सभी से राय-मशविरे के बाद ही इस पर कोई निर्णय लिया जाएगा.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, बीते आठ अप्रैल को वाराणसी की अदालत ने विवादित स्थल पर मां शृंगार गौरी स्थल के सर्वेक्षण के लिए एडवोकेट कमिश्नर अजय कुमार मिश्रा को नियुक्त किया था और उन्हें इस कार्य की वीडियोग्राफी कर रिपोर्ट जमा करने को कहा था.

बीते 21 अप्रैल को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली मस्जिद समिति की याचिका खारिज कर दी थी. इसके बाद 26 अप्रैल को वाराणसी की अदालत ने वापस विवादित स्थल की ​वीडियोग्राफी कराने का आदेश दिया था.

बीते छह मई को सर्वेक्षण शुरू जरूर हुआ, लेकिन मस्जिद कमेटी ने जब पक्षपाक्ष करने का आरोप लगाते हुए अदालत में अपील की तो इसे रोक दिया गया.

अदालत ने अधिकारियों को 10 मई से पहले इस स्थान का एक वीडियो सर्वेक्षण और रिकॉर्ड करने का निर्देश दिया था, जबकि मस्जिद प्रबंधन समिति ‘अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी’ ने यहां पर वीडियोग्राफी के आदेश पर आपत्ति जताई थी.

मुस्लिम पक्ष के वकील अभय नाथ यादव ने वीडियोग्राफी सर्वे के लिए नियुक्त एडवोकेट कमिश्नर की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए उन्हें बदलवाने के लिए अदालत में प्रार्थना-पत्र दिया था.

उन्होंने सर्वे के दायरे में ली जाने वाली इमारतों को कुरेद-कुरेद कर दिखाए जाने का आरोप लगाते हुए कहा था कि अदालत ने खोदने या कुरेदने का कोई आदेश नहीं दिया था और वह छह मई को शुरू हुए सर्वे की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं.

इसके बाद बीते 12 मई को वाराणसी की अदालत ने ज्ञानवापी-शृंगार गौरी परिसर का सर्वे-वीडियोग्राफी कार्य कराने के लिए नियुक्त एडवोकेट कमिश्नर अजय कुमार मिश्रा को पक्षपात के आरोप में हटाने की मांग संबंधी याचिका खारिज कर दी थी.

अदालत ने स्पष्ट किया था कि ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर भी वीडियोग्राफी कराई जाएगी.

दीवानी अदालत के न्यायाधीश (सीनियर डिवीजन) दिवाकर ने एडवोकेट कमिश्नर मिश्रा को हटाने संबंधी याचिका को नामंजूर करते हुए विशाल सिंह को विशेष एडवोकेट कमिश्नर और अजय प्रताप सिंह को सहायक एडवोकेट कमिश्नर के तौर पर नियुक्त किया था.

उन्होंने संपूर्ण परिसर की वीडियोग्राफी करके 17 मई तक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश भी दिए थे.

गौरतलब है कि विश्व वैदिक सनातन संघ के पदाधिकारी जितेंद्र सिंह विसेन के नेतृत्व में राखी सिंह तथा अन्य ने अगस्त 2021 में अदालत में एक वाद दायर कर ज्ञानवापी मस्जिद की पश्चिमी दीवार के पास स्थित शृंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन और अन्य देवी-देवताओं की सुरक्षा की मांग की थी.

इसके साथ ही ज्ञानवापी मस्जिद परिसर स्थित सभी मंदिरों और देवी-देवताओं के विग्रहों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए अदालत से सर्वे कराने का अनुरोध किया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)