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शेख़पोरा ट्रांज़िट कैंप में कश्मीरी पंडितों का प्रदर्शन जारी, घाटी से कहीं और हटाने की मांग

जम्मू कश्मीर के बड़गाम ज़िले के चादूरा में कश्मीरी पंडित तहसील कर्मचारी राहुल भट की आतंकवादियों द्वारा हत्या किए जाने के विरोध में बीते 12 मई से समुदाय के कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन जारी है. 13 मई को प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उन पर लाठीजार्च कर दिया था, जिसके जांच के आदेश दिए गए हैं. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री के लिए कश्मीर पर बनी फिल्म पर बोलना, कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर बोलने से ज़्यादा अहम है.

कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को सुरक्षा प्रदान करने में प्रशासन की कथित विफलता और राहुल भट की हत्या के खिलाफ जम्मू कश्मीर में कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. (फोटो: पीटीआई)

शेखपोरा/श्रीनगर/जम्मू: जम्मू कश्मीर में कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाकर हो रहीं हत्याओं के खिलाफ कश्मीरी पंडित कर्मचारियों का एक समूह बडगाम जिले में शेखपोरा ट्रांसिट शिविर में प्रदर्शन कर रहा है. समुदाय के लोगों ने उन्हें कश्मीर के बाहर सुरक्षित स्थानों पर बसाने की मांग की.

बड़गाम जिले के चादूरा में कश्मीरी पंडित तहसील कर्मचारी राहुल भट की आतंकवादियों ने बीते 12 मई को उनके कार्यालय में घुसकर हत्या कर दी थी.

कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा के लिए सुरक्षाबलों के जवानों का एक दल शिविर के बाहर पहरा दे रहा था. हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि सुरक्षाबलों के जवानों ने उन्हें विरोध मार्च निकालने से रोका.

शेखपोरा ट्रांसिट शिविर में राहुल भट और अन्य कश्मीरी पंडितों का घर है, जिन्हें 2008 में प्रधानमंत्री के रोजगार पैकेज के तहत वहां बसाया गया था. राहुल भट की हत्या के बाद यह शिविर विरोध प्रदर्शन का केंद्र बन गया है.

महिलाओं समेत 100 से अधिक कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के समूह ने बीते शनिवार को भीषण गर्मी के बीच अस्थायी टैंटों में बैठकर विरोध प्रदर्शन किया.

विमल नामक एक कश्मीरी पंडित कर्मचारी ने कहा, ‘यह केंद्र और केंद्र शासित प्रदेश दोनों ही सरकारों की विफलता है. यह अल्पसंख्यक समुदाय के नौवें सदस्य की हत्या है. हम बड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं, लेकिन इसका कोई समाधान नहीं किया जा रहा है.’

उन्होंने कहा कि प्रवासी कर्मचारियों को स्वतंत्र रूप से काम करने के लिए एक सुरक्षित वातावरण बनाया जाना चाहिए.

विमल ने कहा, ‘हमारे काम करने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए. हम इस तरह काम नहीं कर सकते हैं और इसलिए हम सामूहिक रूप से इस्तीफे देने की योजना बना रहे हैं.’

कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि राहुल भट की हत्या के बाद उन्हें शिविर में बंद कर दिया गया है. उनकी मांग है कि ऐसे प्रतिबंधों को हटाया जाए.

प्रधानमंत्री रोजगार पैकेज के कर्मचारियों के मंच ने संभागीय आयुक्त पीके पोले को लिखे पत्र में कहा, ‘हम, वेसु ट्रांजिट शिविर के कर्मचारियों ने कल (रविवार) सुबह अपने भाइयों और बहनों के साथ एकजुटता से शेखपोरा और वीरवान कॉलोनी तक मार्च करने का फैसला किया है.’’

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, फोरम ने कहा, ‘हमारे एक ईमानदार भाई (राहुल भट) की हत्या कर दी गई, वह भी दिनदहाड़े उनके कार्यालय में जहां एक मजिस्ट्रेट बैठता है.’

कर्मचारियों ने कहा कि एकजुटता और समर्थन पाने के बजाय, प्रदर्शनकारी कर्मचारियों को राहुल भट हत्या के खिलाफ नाराजगी व्यक्त करने के लिए आंसू गैस के गोले, लाठीचार्ज, नजरबंदी और गिरफ्तारी का सामना करना पड़ रहा है.

इस बीच बीते शनिवार को बारामूला में समुदाय के सदस्यों और पुलिस के बीच झड़प हो गई थी.

अधिकारियों ने कहा कि समुदाय के सदस्य प्रवासी कर्मचारियों के लिए बने ट्रांसिट कैंप वीरवान कॉलोनी के बाहर मार्च करना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें अनुमति नहीं दी, जिसके परिणामस्वरूप झड़पें हुईं.

हालांकि, उन्होंने कहा कि झड़पों में किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है. यहां प्रेस एन्क्लेव में विरोध प्रदर्शन में कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने जम्मू कश्मीर प्रशासन के खिलाफ और राहुल भट की हत्या के विरोध में नारे लगाए.

प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों में से एक ने संवाददाताओं से कहा, ‘हम अपने भाइयों की निशाना बनाकर की जा रहीं हत्याओं का विरोध कर रहे हैं. हत्याएं बंद होनी चाहिए और सरकार को एक सुरक्षित वातावरण प्रदान करना चाहिए, जहां हम शांति से काम कर सकें.’

उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के लिए ट्रांजिट कैंप को ‘लॉकअप, डिटेंशन सेंटर’ में बदल दिया गया है और मांग की कि उनके ताले खोले जाएं ताकि लोग अपना जीवन सरल तरीके से जी सकें.

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कर्मचारी ‘चिंतित, तनावग्रस्त, असुरक्षित और निराश महसूस कर रहे है. एक प्रेस बयान में उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को लिखित रूप में स्वीकार करना चाहिए कि पुनर्वास नीति ‘पूरी तरह से विफल’ है.

बयान के अनुसार, ‘जम्मू कश्मीर केंद्रशासित प्रशासन, पिछली निर्वाचित सरकारें अल्पसंख्यक कर्मचारी वर्ग को सुरक्षा और सुरक्षित वातावरण प्रदान करने में विफल रही हैं. हम भारत के प्रधानमंत्री और केंद्रशासित प्रदेश के उपराज्यपाल से अनुरोध करते हैं कि यह जमीनी हकीकत को स्वीकार करने का सही समय है.’

उन्होंने खुद को ‘कश्मीर डिवीजन के बाहर सबसे सुरक्षित, खतरनाक, आतंक मुक्त स्थानों पर स्थानांतरित करने’ की भी मांग की.

राहुल भट गत सात महीने में दूसरे कश्मीरी पंडित हैं, जिनकी हत्या आतंकवादियों द्वारा की गई है. इससे पहले प्रमुख दवा कारोबारी माखन लाल बिंद्रु की छह अक्टूबर 2021 को आतंकवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी.

अगस्त 2019 से लेकर मार्च 2022 के बीच जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों सहित कुल 14 अल्पसंख्यक हिंदुओं की हत्या आतंकवादियों द्वारा की गई है.

आतंकवादियों द्वारा जिन लोगों को निशाना बनाया गया है, उनमें कश्मीर के विभिन्न हिस्सों के प्रमुख कारोबारी, सरपंच और ब्लॉक विकास परिषद के सदस्य शामिल हैं.

गौरतलब है कि अगस्त 2019 में अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने के बाद से कश्मीर में गैर-मुस्लिमों और बाहर से आए लोगों पर हमले बढ़े हैं.

उपराज्यपाल ने कश्मीरी पंडितों के खिलाफ बल प्रयोग की जांच के आदेश दिए

इस बीच रविवार को जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान किए गए कथित बल प्रयोग की जांच के आदेश दिए हैं.

जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा. (फोटो: पीटीआई)

बीते 12 मई को मध्य कश्मीर के बडगाम जिले के चादूरा में भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में स्थित तहसील कार्यालय में घुसकर लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकवादियों ने कश्मीरी पंडित कर्मचारी 35 वर्षीय राहुल भट की गोली मारकर हत्या कर दी थी.

राहुल भट तहसील कार्यालय में प्रवासी कश्मीरी पंडितों के रोजगार के लिए दिए गए विशेष पैकेज के तहत राजस्व विभाग के कर्मचारी के रूप में तैनात थे.

इसी बीच 13 मई को पुलवामा जिले में आतंकवादियों ने गुडूरा इलाके में कॉन्स्टेबल रियाज अहमद ठाकोर की उनके घर में घुसकर गोली मारकर हत्या कर दी.

इसके बाद बीते 13 मई को कश्मीरी पंडित कर्मचारी जब अपने सहयोगी (राहुल भट) की हत्या के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे, तब उन्हें नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों ने बल प्रयोग किया था.

कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को सुरक्षा प्रदान करने में प्रशासन की कथित विफलता और हत्या के खिलाफ जम्मू कश्मीर में कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने शुक्रवार को बडगाम के शेखपोरा में प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े थे.

सरकार ने राहुल भट्ट की हत्या की जांच के आदेश दिए हैं और इसके लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है.

उपराज्यपाल सिन्हा ने रविवार को कहा, ‘राहुल भट्ट की हत्या के जरिए लोगों में भय और आतंक का माहौल बनाने की कोशिश की गई. वह बहुत अच्छे कर्मचारी थे. हमने इस मामले की जांच के लिए एक एसआईटी का गठन किया है. एसआईटी सभी पहलुओं से इस मामले की जांच करेगी.’

उन्होंने कहा कि एसआईटी प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग की भी जांच करेगी.

सिन्हा ने कहा, ‘कश्मीरी पंडितों पर बल प्रयोग के इस्तेमाल की भी जांच की जाएगी. एक सप्ताह के भीतर इनकी तैनाती सुरक्षित स्थानों पर कर दी जाएगी. उनकी कुछ और शिकायतें हैं, उन पर भी गौर किया जाएगा. हम उनके दर्द और समस्याओं को समझते हैं.’

उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडित कर्मचारी जहां भी रहेंगे, प्रशासन की ओर से उनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे.

उपराज्यपाल ने कहा कि उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिया है कि कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के खिलाफ बल प्रयोग की कोई जरूरत नहीं है.

उन्होंने कश्मीरी पंडित कर्मचारियों से कुछ समय के लिए धैर्य रखने की अपील करते हुए उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी सभी समस्याओं का समाधान किया जाएगा.

सिन्हा ने कहा कि कुछ लोग कश्मीर में शांति भंग करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन इस मुद्दे को बहुत गंभीरता से ले रहा है.

उन्होंने कहा, ‘मैं सभी राजनेताओं और राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम लोगों से भी अपील करता हूं कि यह एकजुट रहने का समय है ताकि शांतिपूर्ण माहौल बना रहे. कुछ लोग जम्मू कश्मीर का माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि उनकी कोशिश कामयाब नहीं होगी. राहुल भट की हत्या में शामिल दो आतंकवादियों को मार गिराया गया है. पुलिस अन्य आतंकवादियों की तलाश कर रही है.’

उपराज्यपाल ने कहा, ‘मैं सभी राजनीतिक दलों से अपील करता हूं कि इन हत्याओं की घटनाओं में शामिल तत्वों के सामाजिक बहिष्कार की अपील जारी करें.’

पीएम के लिए फिल्म पर बोलना कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर बोलने से ज़्यादा अहम: राहुल 

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कश्मीरी पंडित राहुल भट्ट की आतंकवादियों द्वारा हत्या किए जाने की पृष्ठभूमि में शनिवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए एक फिल्म पर बोलना, कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर बोलने से ज़्यादा अहम है.

उन्होंने राहुल भट्ट की पत्नी का एक वीडियो साझा करते हुए ट्वीट किया, ‘प्रधानमंत्री के लिए एक फिल्म (द कश्मीर फाइल्स) पर बोलना, कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर बोलने से ज़्यादा अहम है. भाजपा की नीतियों की वजह से आज कश्मीर में आतंक चरम पर है.’

गांधी ने कहा, ‘प्रधानमंत्री जी, सुरक्षा की ज़िम्मेदारी लीजिए और शांति लाने की कोशिश कीजिए.’

कश्मीर में हत्याओं के मुद्दे पर राजनीतिक दलों ने भाजपा के खिलाफ किया प्रदर्शन

जम्मू कश्मीर की राजनीतिक पार्टियों ने घाटी में आतंकवादियों द्वारा की जा रही हत्याओं के मुद्दे पर शनिवार को भाजपा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया.

अधिकारियों ने बताया कि पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और कांग्रेस के सदस्य क्रमश: शहीदी चौक और गांधी नगर इलाके स्थित अपने-अपने पार्टी मुख्यालयों से बाहर सड़कों पर विरोध प्रदर्शन के लिए उतरे. वहीं, आम आदमी पार्टी (आप) के कार्यकर्ताओं ने प्रेस क्लब के नजदीक प्रदर्शन किया.

उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारी बाद में शांतिपूर्ण तरीके से चले गए.

पीडीपी के उपाध्यक्ष चौधरी अब्दुल हमीद ने संवाददाताओं से कहा, ‘हम यह प्रदर्शन भट और पुलिसकर्मी की आतंकवादियों द्वारा की गई हत्या की निंदा करने के लिए कर रहे हैं. अब और पहले हमेशा कश्मीर में निर्दोष लोग मारे जा रहे हैं क्योंकि सरकार लोगों को सुरक्षित माहौल देने में पूरी तरह से असफल रही है.’

उन्होंने हत्याओं की उच्चस्तरीय जांच कराने और मृतकों के परिजनों को पर्याप्त मुआजवा देने की मांग की.

जम्मू कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (जेकेपीसीसी) के कार्यवाहक अध्यक्ष रमण भल्ला के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर आतंकवाद का समर्थन जारी रखने के लिए पाकिस्तान की निंदा की.

पार्टी सदस्यों ने साथ ही भाजपा नीत केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह घाटी में बेगुनाह लोगों की खासतौर पर कश्मीरी पंडितों और गैर स्थानीय लोगों की लक्षित हत्याओं को रोकने में कथित तौर पर असफल रही है.

वरिष्ठ आप नेता और पूर्व मंत्री हर्ष देव सिंह ने कहा कि भाजपा की ‘नामसमझ और गलत नीतियों’ का नतीजा है कि लागातार खूनखराबा और मार-काट हो रहा है.

उन्होंने कहा, ‘लोकप्रिय सरकार के दौरान जम्मू-कश्मीर में उग्रवाद लगभग खत्म हो गया था. लेकिन मौजूदा शासकों द्वारा अंधाधुंध किए गए प्रयोग का नतीजा है कि सुरक्षा की स्थिति में लगातार गिरावट आई. राज्य में 1990 के शुरुआत जैसी स्थिति पैदा हो रही है.’

कश्मीरी पंडितों पर हमला सीधे ‘कश्मीर की आत्मा’ पर हमला है: फारूक अब्दुल्ला

नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने शनिवार को कहा कि कश्मीरी पंडितों पर होने वाला हर हमला ‘कश्मीर की आत्मा’ पर सीधा हमला है. उन्होंने कहा कि हत्या की घटनाओं में बढ़ोतरी घाटी में सामान्य स्थिति होने संबंधी सरकार के दावों के विपरीत है.

पार्टी के एक प्रवक्ता के अनुसार, श्रीनगर से सांसद अब्दुल्ला ने पार्टी के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष अमित कौल के नेतृत्व में कश्मीरी पंडितों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत के दौरान उक्त बातें कहीं.

अब्दुल्ला ने कहा, ‘हमारे पंडित भाइयों पर हर हमला कश्मीर की आत्मा पर सीधा हमला है. मैं ऐसा समय देखना चाहता हूं, जब कश्मीरी मुसलमान और कश्मीरी पंडित दोनों साथ-साथ रहें. हालांकि, मौजूदा सरकार केवल दिखावे तक ही सीमित है. उनकी सुरक्षित और स्थायी वापसी के लिए एक सक्षम वातावरण बनाने के वास्ते जमीनी स्तर पर कोई प्रयास नहीं किए जा रहे.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)