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यूपी: बदायूं एसएसपी ऑफिस के सामने ख़ुद को आग लगाने वाले किसान की मौत, पांच पुलिसकर्मी निलंबित

उत्तर प्रदेश में बदायूं के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र का मामला. आरोप है कि बीते 23 अप्रैल को कुछ लोगों द्वारा गेहूं की फसल को आग लगाने के बाद पुलिस द्वारा उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई न किए जाने से परेशान होकर 52 वर्षीय किसान ने एएसपी कार्यालय के गेट के पास बीते बुधवार को ख़ुद पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा ली थी. बरेली में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.

(प्रतीकात्मक फोटोः रॉयटर्स)

बदायूं: उत्तर प्रदेश में आत्महत्या का प्रयास करने वाले किसान किशनपाल (52 वर्ष) की बरेली के एक निजी मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान बृहस्पतिवार की सुबह मौत हो गई. किशनपाल मूल रूप से बदायूं के थाना सिविल लाइन क्षेत्र के गांव रसूलपुर बिलहरी के निवासी थे.

कुछ लोगों द्वारा फसल में आग लगाने के बाद पुलिस द्वारा कोई कार्यवाही न करने से परेशान होकर किशनपाल ने बुधवार दोपहर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) कार्यालय के द्वार पर पेट्रोल छिड़ककर खुद को जला लिया था.

गंभीर रूप से झुलसी हालत में किशनपाल को बरेली के श्रीराम मूर्ति स्मारक मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था. एसएसपी डॉ. ओपी सिंह ने बताया कि इलाज के दौरान किशनपाल की बृहस्पतिवार सुबह मृत्यु हो गई.

उन्होंने बताया किशनपाल की फसल जलाने वाले आठ नामजद आरोपियों में से सात को पुलिस ने बुधवार रात में ही गिरफ्तार कर लिया, जबकि एक व्यक्ति अभी फरार है, जिसकी तलाश जारी है.

उन्होंने बताया कि मृतक किशनपाल और आरोपी पक्ष एक ही परिवार के हैं. सिंह ने कहा कि पुलिस ने किशनपाल के साथ कोई पक्षपात नहीं किया.

उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों का मुकदमा दर्ज किया गया था और किशनपाल के विरोधी पक्ष के विरुद्ध कार्यवाही भी की गई थी.

एसएसपी ने बताया कि बरेली रेंज के पुलिस महानिरीक्षक रमित शर्मा ने इस मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया है. जिसका नेतृत्व बरेली के पुलिस अधीक्षक नगर करेंगे, जो एक आईपीएस अधिकारी हैं. उनका सहयोग बदायूं के पुलिस अधीक्षक नगर प्रवीण सिंह चौहान करेंगे .

उल्लेखनीय है कि किसान के एसएसपी कार्यालय में आत्मदाह के प्रयास के मामले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ओपी सिंह ने कार्यवाही करते हुए इंस्पेक्टर सिविल लाइन राजकुमार तिवारी, मंडी समिति चौकी इंचार्ज राहुल पुंडीर, तत्कालीन चौकी इंचार्ज अशोक कुमार और बीट के दो सिपाहियों को निलंबित कर दिए हैं, साथ ही उपरोक्त सभी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने के आदेश दिए हैं.

इस मामले पर बीते बुधवार को पीड़ित किसान के पुत्र अमरजीत सिंह ने बताया कि उनके पिता किशनपाल खेती किसानी करते हैं और दो सप्ताह पहले गांव के कुछ लोगों ने उनकी फसल में आग लगा दी थी, जिसकी शिकायत लेकर वह थाना सिविल लाइंस की मंडी समिति पुलिस चौकी पर पहुंचे और तहरीर दी.

बेटे का आरोप है कि पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की, उल्टा उसके पिता को डांट कर भगा दिया.

उन्होंने बताया कि पिता ने मंडी समिति चौकी प्रभारी पर भी आरोप लगाया था कि दारोगा की आरोपियों से सांठगांठ हो गई थी, इसलिए पुलिस आरोपियों पर कार्रवाई नहीं कर रही है.

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, अमरजीत ने कहा, ‘23 अप्रैल को हमारे गांव के आठ लोगों ने हमारी गेहूं की फसल को आग लगा दी थी. अगले दिन उन्होंने हमारे घर में घुसकर मेरी मां और बहनों को पीटा. पुलिस ने कार्रवाई करने के बजाय हमें समझौता करने के लिए मजबूर किया. दबाव बनाने के लिए हमारे खिलाफ एक झूठा मामला भी दर्ज किया गया था.’

उन्होंने आगे कहा, ‘मेरे पिता ने सारी उम्मीद खो दी और अवसाद में चले गए. बुधवार को जब उन्हें पता चला कि स्थानीय चौकी प्रभारी हमारे मामले की क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर रहे हैं, तो उन्होंने मेरी मां और बहन के साथ एसएसपी के कार्यालय में जाकर आत्मदाह कर लिया.’

इस मामले में किशनपाल की ओर से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना-पत्र दिया गया था किंतु पुलिस ने उस पर भी कोई कार्यवाही नहीं की.

बुधवार को किसान किशनपाल अपनी पत्नी व दो पुत्रों के साथ वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और गेट पर खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा ली.

पुलिस अधीक्षक नगर और क्षेत्राधिकारी नगर व अन्य पुलिसकर्मियों ने तत्काल उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया. जहां उनकी हालत चिंताजनक देखते हुए बरेली रेफर कर दिया गया था

बदायूं के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ओपी सिंह ने बताया कि थाना सिविल लाइन क्षेत्र के गांव रसूलपुर का रहने वाले किशनपाल ने 25 अप्रैल को एक प्रार्थना-पत्र दिया था कि कुछ लोगों ने उनके खेत आग लगा दी है, जिसकी जांच थाना क्षेत्र की मंडी समिति पुलिस चौकी प्रभारी द्वारा की जा रही थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)