भारत

नागपुर: अंडा सेल के पास से सीसीटीवी हटवाने के लिए भूख हड़ताल कर रहे साईबाबा अस्पताल में भर्ती

माओवादी संबंध मामले में उम्रक़ैद की सज़ा काट रहे दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर जीएन साईबाबा ने 21 मई से भूख हड़ताल शुरू की थी. उनकी मांग थी कि उनकी जेल कोठरी के सामने लगा सीसीटीवी कैमरा हटाया जाए. इसे लेकर उनके परिजनों ने निजता के हनन का हवाला देते हुए महाराष्ट्र के गृहमंत्री को पत्र भी लिखा है.

GN Saibaba PTI

जीएन साईबाबा. (फाइल फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: नागपुर केंद्रीय जेल मे बंद और 90 फीसदी शारीरिक अक्षमता से जूझ रहे दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर जीएन साईबाबा को अस्पताल में भर्ती किया गया है.

वे अपनी जेल की कोठरी में लगे सीसीटीवी कैमरा हटवाने के लिए, जो कि कथित तौर पर सारा दिन उनकी गतिविधियों को रिकॉर्ड करते थे, चार दिन से भूख हड़ताल पर थे.

उन्हें 25 मई को जेल के अस्पताल में भर्ती कराया गया था. पहले से ही बेहद बीमार साईबाबा को भूख हड़ताल के चलते गंभीर समस्याएं पैदा हो गई हैं.

हालांकि, जेल अधिकारियों ने उनकी मांगों पर आंशिक प्रतिक्रिया दी है.

‘डॉ. जीएन साईबाबा की रिहाई और सुरक्षा के लिए समिति’ ने एक बयान जारी कर उनकी तत्काल रिहाई की मांग की है. समिति का कहना है कि साईबाबा ने 21 मई को भूख हड़ताल शुरू की थी.

भूड़ हड़ताल इस मांग के लिए थी कि उनके ‘अंडा सेल’ के सामने लगा सीसीटीवी कैमरा हटाया जाए. साईबाबा के परिवार का कहना है कि ह्वीलचेयर पर निर्भर साईबाबा के लिए कोठरी के अंडाकार और सीमित होने के चलते कोठरी के अंदर हिलना-डुलना भी मुश्किल होता है.

समिति का कहना है कि 24 घंटे कैमरे से निगरानी करना निजता, जीवन, स्वतंत्रता और शारीरिक अखंडता के उनके मौलिक अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन है.

समिति ने कहा है, ‘लगाए गए सीसीटीवी कैमरा 24×7 सब-कुछ रिकॉर्ड करते हैं, जिनमें टॉयलेट जाने से लेकर नहाने और सभी प्रकार की शारीरिक गतिविधियां शामिल हैं. यह बुनियादी मानवाधिकारों के खिलाफ है. एक दोषी व्यक्ति के अधिकारों को भी बरकरार रखा जाना चाहिए.’

कुछ दिनों पहले उनकी पत्नी और भाई ने इसी मांग को लेकर महाराष्ट्र के गृहमंत्री को एक पत्र सौंपा था.

भूख हड़ताल के साथ साईबाबा पैरोल की भी मांग कर रहे थे, जो उन्हें कई आवेदनों के बावजूद नहीं दी गई थी. साथ ही, उचित चिकित्सा उपचार, अंडा सेल के बाहर आवास और हैदराबाद में चेरलापल्ली केंद्रीय जेल में स्थानांतरण करने जैसी कुछ अन्य मांगों से संबंधित उनके कई आवेदन भी अनसुने कर दिए गए.

डेढ़ साल पहले लॉकडाउन के दौरान भी साईबाबा इसी तरह भूख हड़ताल पर चले गए थे, उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों और वकीलों द्वारा भेजी गई दवाओँ और किताबों व पत्रों को तत्काल सौंपने की मांग की थी. पिछली भूख हड़ताल की इनमें से कुछ मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया.

साईबाबा के वकील आकाश सोर्डे ने कहा है कि भूख हड़ताल के पहले चार दिनों में जेल अधिकारी सीसीटीवी कैमरे की दिशा बदलने के लिए राजी हो गए थे.

जेल अधिकारियों ने आगे कहा,

  • अतिरिक्त महानिदेशक कारागार (एडीजी) के दायरे में आने वाली मांगें हल करने के लिए साईबाबा को एक पत्र लिखना होगा, जिसे जेल अधिकारी (एडीजी) को आगे भेजेंगे;
  • साईबाबा को महाराष्ट्र के गृहमंत्री को एक और पत्र लिखना होगा- जिसे आगे बढ़ाने के लिए जेल अधिकारी सहमत हो गए हैं- ताकि मंत्री के दायरे में आने वाले मुद्दों को हल किया जा सके;
  • अधिकारी अब उन्हें पानी की बोतल देने के लिए तैयार हैं जो उन्होंने पहले देने से इनकार कर दिया था; और
  • अन्य सभी मांगें ‘समय के साथ एक-एक करके स्वीकार की जाएंगी.’

बता दें कि अक्टूबर 2020 में साईबाबा ने जेल में भूख हड़ताल की थी, जब कथित तौर पर जेल प्रबंधन ने उन्हें महीने भर तक किताबें, कपड़े और दवाएं देने से इनकार कर दिया था.

साईबाबा 90 फीसदी से अधिक शारीरिक तौर पर अक्षम हैं और ह्वीलचेयर पर रहते हैं. उन्हें 2017 में माओवादियों से संपर्क रखने और माओवादी गतिविधियों में संलिप्तता के आरोप में महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले की एक सत्र अदालत ने उम्र कैद की सजा सुनाई थी.

उन पर देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के आरोप थे. अदालत ने साईबाबा और अन्य को कठोर गैरक़ानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत सजा सुनाई थी. सजा के खिलाफ उनकी अपील बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ में लंबित है.