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रांची हिंसा: राज्य सरकार ने आरोपियों के पोस्टर जारी करने पर एसएसपी से जवाब तलब किया

रांची में पुलिस ने मंगलवार को 10 जून की हिंसा में वांछित लोगों के पोस्टर जारी किए थे. बाद में तकनीकी त्रुटि का हवाला देते हुए इन्हें सुधार कर दोबारा जारी करने की बात कही गई. सत्तारूढ़ झामुमो और कांग्रेस के कुछ नेताओं द्वारा इसके विरोध के बीच गृह सचिव ने रांची एसएसपी से इस पर स्पष्टीकरण मांगा है.

झारखंड की राजधानी रांची में 10 जून को हुई हिंसा के बाद धारा 144 लागू किया गया है. सड़कों पर तैनात सुरक्षाकर्मी. (फोटो: पीटीआई)

रांची: झारखंड की राजधानी रांची में बीते शुक्रवार को हुए हिंसक प्रदर्शन के कथित आरोपियों की तस्वीरों वाला पोस्टर जारी किए जाने के एक दिन बाद राज्य के गृह सचिव राजीव अरुण एक्का ने बुधवार शाम वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) से इस कथित ‘गैरकानूनी’ गतिविधि पर स्पष्टीकरण मांगा है.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, रांची के एसएसपी सुरेंद्र झा को लिखे पत्र में, प्रमुख सचिव एक्का, जो राज्य के गृह सचिव भी हैं, ने कहा, ‘हिंसक विरोध में शामिल लोगों के पोस्टर 14 जून को रांची पुलिस द्वारा लगाए गए थे, जिसमें कई लोगों के नाम और अन्य जानकारी थी. यह अवैध है और 9 मार्च, 2020 की जनहित याचिका 532/2020 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ है.’

उन्होंने एसएसपी को दो दिन में स्पष्टीकरण देने को कहा है.

उल्लेखनीय है कि पुलिस ने मंगलवार को 10 जून की हिंसा में वांछित लोगों के पोस्टर जारी किए थे. हालांकि राज्य की राजधानी में विभिन्न स्थानों पर पोस्टर लगाने के बाद पुलिस ने ‘तकनीकी त्रुटि’ के कारण इन्हें वापस ले लिया था. पुलिस ने कहा था कि वह त्रुटि को ठीक कर पोस्टर जारी करेगी.

पोस्टर जारी करने का पुलिस का कदम राज्यपाल रमेश बैस द्वारा राजभवन में डीजीपी नीरज सिन्हा और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को बुलाने के एक दिन बाद आया था और उनसे सभी प्रदर्शनकारियों के नाम और पते सार्वजनिक करने और प्रमुख स्थानों पर होर्डिंग्स पर उनकी तस्वीरें प्रदर्शित करने के लिए कहा था.

झारखंड पुलिस के प्रवक्ता एवी होमकर ने बताया था कि राज्यपाल रमेश बैस के निर्देश के अनुसार रांची पुलिस ने चिह्नित उपद्रवियों की तस्वीर जारी की थी, लेकिन कुछ त्रुटियों की वजह से उन्हें वापस ले लिया गया था.

पोस्टर लगाने के कदम का राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं- कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा ने विरोध किया था और इसे केंद्र द्वारा निर्धारित ‘अतिरेक’ करार दिया था.

राज्य के जनसंपर्क विभाग द्वारा सोमवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, राज्यपाल ने अधिकारियों से कहा था, ‘सभी प्रदर्शनकारियों और जो पकड़े गए हैं, उनका विवरण प्राप्त करें, उनके नाम/पते सार्वजनिक करें, उनकी तस्वीरों को प्रदर्शित करके उनके होर्डिंग बनाएं. ताकि जनता भी उन्हें पहचान सके और पुलिस की मदद कर सके.’

विज्ञप्ति के मुताबिक, बैस ने पूछा, ‘जो लोग इन घटनाओं के बारे में या सोशल मीडिया पर अफवाहें फैला रहे हैं, क्या आपने उनकी पहचान की और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई की? ऐसे सभी लोगों की पहचान करने और उन्हें दंडित करने की आवश्यकता है.’

मालूम हो कि निलंबित भाजपा की प्रवक्ता नूपुर शर्मा एवं निष्कासित मीडिया प्रभारी नवीन जिंदल की पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ की गई कथित टिप्पणी के विरोध में 10 जून को हुए हिंसक प्रदर्शन में  दो लोगों की मौत  हुई थी जबकि दो दर्जन लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे.

विरोध प्रदर्शन के दौरान रांची में हुई हिंसा में 15 वर्षीय मुदस्सिर आलम के अलावा 20 वर्षीय मोहम्मद साहिल की मौत गोली लगने से हो गई थी. मुदस्सिर 10वीं कक्षा के परीक्षा परिणामों का इंतजार कर रहे थे, साहिल ने 12वीं तक पढ़ाई की थी और एक मोबाइल की दुकान में काम करते थे.

नूपुर ने टीवी पर एक बहस के दौरान वह टिप्पणी की थी. चर्चा ज्ञानवापी मस्जिद विवाद पर हो रही थी. बाद में यह भारत के खिलाफ एक कूटनीतिक मुद्दा बन गया, जिसके चलते भाजपा ने शर्मा को पार्टी से निलंबित कर दिया.

निलंबित भाजपा नेताओं नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल द्वारा पैगंबर के खिलाफ टिप्पणी को लेकर उनकी गिरफ्तारी की मांग पर बीते 10 जून को देश भर के कई शहरों और कस्बों में विरोध प्रदर्शन हुए थे.

रांची के छह थाना क्षेत्रों में निषेधाज्ञा जारी, अब तक 29 गिरफ्तार

झारखंड की राजधानी रांची में गत शुक्रवार (10 जून) को जुमे की नमाज के बाद हुई हिंसा के सिलसिले में अब तक 29 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. साथ ही आगे सांप्रदायिक तनाव पैदा न हो इसके लिए शरारती तत्वों की पहचान की जा रही है. पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी.

वहीं, रांची में अब भी मेन रोड और आसपास के छह थाना क्षेत्रों में निषेधाज्ञा लागू है.

राज्य पुलिस के प्रवक्ता पुलिस महानिरीक्षक अभियान एवी होमकर ने बताया कि पिछले शुक्रवार को मेन रोड इलाके में हुई हिंसा के सिलसिले में 29 गिरफ्तारियां हुई थीं, जिसके बाद गत 24 घंटे में कोई नई गिरफ्तारी नहीं की गई है.

एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि आगामी जुमे पर किसी उपद्रव से बचने और शांति बनाये रखने के लिए फिलहाल कोई बड़ी कार्रवाई से बचा जा रहा है.

उन्होंने कहा कि प्रशासन का पहला उद्देश्य शहर में शांति व्यवस्था पुनः बहाल करना है.

इस बीच, मेन रोड स्थित संकट मोचन हनुमान मंदिर की स्थिति की समीक्षा करने और वहां दर्शन करने पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास स्वयं पहुंचे.

उन्होंने मंदिर पर पथराव करने वालों और उसे नुकसान पहुंचाने वालों पर सरकार द्वारा समुचित कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया.

दास ने सरकार से मांग की कि वह उपद्रवियों के खिलाफ शीघ्रातिशीघ्र सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे अन्यथा भाजपा आंदोलन करेगी.

होमकर ने बताया कि मामले में अब तक कुल 25 प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं जिनमें दो दर्जन नामजद समेत सैकड़ों लोगों को आरोपी बनाया गया है.

रांची के उपायुक्त छविरंजन ने बताया कि दोपहर एक बजे से शाम पांच बजे तक हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को अपने आवश्यक कार्यों के लिए घरों से बाहर निकलने की इजाजत दी गई.

इस बीच, राजेन्द्र आयुर्विज्ञान संस्थान के प्रवक्ता डॉ. डीके सिन्हा ने बताया कि संस्थान में भर्ती 13 घायलों में से सात को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है.

दूसरी ओर रांची और आसपास के इलाकों में अर्धसैनिक बलों एवं पुलिस की भारी तैनाती यथावत जारी रखी गई है.

होमकर ने बताया कि संवदेनशील इलाकों में शांति व्यवस्था बनाये रखने के लिए लगभग साढ़े तीन हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है.

इस बीच, झारखंड सरकार द्वारा शनिवार को हिंसा की घटना की जांच के लिए गठित दो सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति ने बुधवार को कई प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किये और हिंसा वाले क्षेत्रों का स्वयं दौरा किया.

समिति को एक सप्ताह में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है. समिति में राज्य के आपदा प्रबंधन सचिव अमिताभ कौशल एवं अपर पुलिस महानिदेशक अभियान संजय लाटकर शामिल हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)