भारत

अग्निपथ आवेदकों को शपथ-पत्र देना होगा कि उन्होंने आगज़नी-प्रदर्शन में भाग नहीं लिया: सेना

थलसेना, नौसेना और वायुसेना में संविदा आधारित भर्ती योजना ‘अग्निपथ’ के ख़िलाफ़ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स में अतिरिक्त सचिव लेफ्टिनेंट जनरल अनिल पुरी ने एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि सरकार योजना लागू करने के अपने रुख़ पर कायम है. भारतीय सेना की नींव अनुशासन है. जो युवा आगज़नी और तोड़फोड़ में लिप्त हैं, वे सशस्त्र बलों की तीनों सेवाओं में नहीं शामिल हो पाएंगे.

लेफ्टिनेंट जनरल अनिल पुरी ने बीते रविवार को दिल्ली में रक्षा मंत्रालय के साउथ ब्लॉक में केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना के संबंध में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली/लखनऊ/मुंबई: अग्निपथ सैन्य भर्ती योजना के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों को विफल करने के प्रयास के तहत सेना के नेतृत्व ने घोषणा की है कि नई भर्ती योजना के लिए आवेदकों को इस प्रतिज्ञा के साथ एक शपथ-पत्र देना होगा कि उन्होंने किसी भी आगजनी या आंदोलन में भाग नहीं लिया है.

सरकार जहां सशस्त्र बलों में अल्पकालिक भर्ती के लिए विवादों में घिरी ‘अग्निपथ’ योजना को लागू करने के अपने रुख पर कायम है, वहीं तीनों सेनाओं ने नई नीति के तहत भर्ती के लिए रविवार को विस्तृत कार्यक्रम प्रस्तुत किया.

सरकार ने हिंसा और आगजनी में शामिल लोगों को भर्ती में शामिल नहीं किए जाने की चेतावनी दी.

रविवार को एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स में अतिरिक्त सचिव लेफ्टिनेंट जनरल अनिल पुरी ने योजना के खिलाफ हो रहे विध्वंसक प्रदर्शनों में शामिल लोगों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि जो युवा आगजनी एवं हिंसा में लिप्त हैं, वे सशस्त्र बलों की तीनों सेवाओं में नहीं शामिल हो पाएंगे, क्योंकि किसी को भी सशस्त्र बलों में शामिल करने से पहले पुलिस सत्यापन प्रक्रिया चलाई जाएगी.

उन्होंने कहा, ‘भारतीय सशस्त्र बलों की नींव अनुशासन है. यहां आगजनी के लिए कोई जगह नहीं है. अगर आप अपना गुस्सा दिखाते हैं और इस बारे में बातचीत को तैयार हैं तो कोई बात नहीं, लेकिन आगजनी और तोड़फोड़ के लिए यहां कोई जगह नहीं है.’

उन्होंने कहा कि अग्निपथ योजना के माध्यम से तीनों सेनाओं में शामिल होने के इच्छुक प्रत्येक युवक को एक संकल्प-पत्र देना होगा कि वे किसी विरोध, आगजनी या तोड़फोड़ का हिस्सा नहीं थे.

लेफ्टिनेंट जनरल पुरी ने कहा, ‘हर व्यक्ति जो अग्निपथ योजना के माध्यम से सशस्त्र बलों में शामिल होना चाहता है, उसे एक संकल्प-पत्र प्रस्तुत करनी होगी कि वे न तो किसी विरोध का हिस्सा थे और न ही किसी हिंसा में शामिल थे. पुलिस सत्यापन के बिना कोई भी सेना में शामिल नहीं हो सकता. हमने इसके लिए प्रावधान तैयार कर लिए हैं.’

उन्होंने यह भी दावा किया कि विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व 27 साल से अधिक उम्र के लोग कर रहे हैं. इन प्रदर्शनकारियों को योजना के प्रावधानों की जानकारी नहीं है.

उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों को ‘दुश्मन ताकतों’ के साथ-साथ कुछ कोचिंग संस्थानों ने भी उकसाया है. लेफ्टिनेंट जनरल पुरी ने कहा कि सशस्त्र बलों में प्रवेश की तैयारी के लिए इन कोचिंग सेंटरों में पढ़ने वाले लगभग 70 प्रतिशत उम्मीदवार गांवों से हैं.

उन्होंने दावा किया, ‘वे कर्ज लेकर पढ़ाई कर रहे थे. इन कोचिंग संस्थानों द्वारा उन्हें आश्वासन दिया गया था और उन्हें सड़कों पर भेजने में उनका महत्वपूर्ण योगदान है.’

अग्निपथ योजना की घोषणा के बाद पिछले चार दिन से बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा और तेलंगाना समेत अनेक राज्यों में उग्र प्रदर्शन के बाद रविवार को तुलनात्मक शांति देखी गई, जबकि कई जगहों पर शांतिपूर्ण आंदोलन हुए.

सोमवार को योजना के विरोध में भारत बंद का आयोजन​ किया गया है.

इस दौरान बीते 17 जून को तेलंगाना के सिकंदराबाद स्टेशन पर प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए आरपीएफ द्वारा की गई फायरिंग में एक 24 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई थी. हिंसा के दौरान किसी की मौत का यह पहला मामला है. मृत युवक की पहचान वारंगल जिले के दबीरपेट गांव के रहने वाले 24 वर्षीय राकेश के रूप में हुई है.

हालांकि, हिंसा का खामियाजा भुगतने वाले भारतीय रेलवे ने विरोध के चलते रविवार को 483 ट्रेन रद्द कर दी. अधिकारियों ने कहा कि योजना के बारे में कथित रूप से फर्जी खबरें फैलाने वाले 35 वॉट्सऐप ग्रुप पर सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया.

लेफ्टिनेंट जनरल अनिल पुरी ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘सशस्त्र बलों में अनुशासनहीनता के लिए कोई जगह नहीं है. आगजनी एवं हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है. अग्निपथ के तहत जो भी सशस्त्र बलों का हिस्सा बनना चाहता है तो उसे इस बात का प्रमाण-पत्र देना होगा कि वह किसी आगजनी का हिस्सा नहीं था.’

जब लेफ्टिनेंट जनरल पुरी से पूछा गया कि क्या सरकार प्रदर्शन के चलते इस योजना की समीक्षा या उसे वापस ले रही है तो उन्होंने कहा, ‘नहीं, इसे वापस क्यों लिया जाना चाहिए?’

उन्होंने कहा कि सरकार अग्निपथ योजना को लागू करने के लिए आगे बढ़ रही है. उन्होंने आंदोलनकारियों से अपना विरोध समाप्त करने की अपील की. उन्होंने कहा कि इस योजना को वापस लेने का कोई सवाल ही नहीं है.

रक्षा मंत्रालय में सशस्त्र बलों की तीनों सेवाओं की इस ब्रीफिंग से कुछ घंटे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लगातार दूसरे दिन रविवार को सेना, नौसेना और वायुसेना के प्रमुखों के साथ बैठक की थी.

लेफ्टिनेंट जनरल पुरी ने कहा कि सशस्त्र बलों के उम्र संबंधी प्रोफाइल को घटाने का यह बड़ा सुधार कई सालों के विचार-विमर्श तथा विभिन्न देशों में भर्ती प्रक्रियाओं एवं सैनिकों के कार्यकाल का अध्ययन करने के बाद किया गया है.

उन्होंने कहा कि यहां तक कि 1999 के करगिल युद्ध पर गठित उच्चस्तरीय समीक्षा समिति ने भी इस पर सुझाव दिया था.

इस योजना के तहत ‘अग्निवीरों’ की भर्ती की नौसेना की योजना का विवरण देते हुए वाइस एडमिरल (कार्मिक) दिनेश त्रिपाठी ने कहा कि नौसेना मुख्यालय 25 जून तक भर्ती के लिए व्यापक दिशानिर्देश जारी करेगा.

उन्होंने कहा कि पहला बैच 21 नवंबर तक ओडिशा में आईएनएस चिलिका पर प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल हो जाएगा. उन्होंने कहा कि नौसेना इस योजना के तहत पुरुषों एवं महिलाओं दोनों की भर्ती कर रही है.

‘अग्निपथ’ योजना के तहत लोगों की भर्ती की वायुसेना की योजना के बारे में एयर मार्शल एसके झा ने कहा कि पंजीकरण प्रक्रिया 24 जून को शुरू होगी और भर्ती के पहले चरण के लिए 24 जुलाई को ऑनलाइन परीक्षा शुरू होगी.

एयर मार्शल झा ने कहा, ‘हम रंगरूटों के पहले बैच का 30 दिसंबर तक प्रशिक्षण शुरू करने की योजना बना रहे हैं.’

सेना की भर्ती योजना के बारे में लेफ्टिनेंट जनरल बंसी पोनप्पा ने कहा कि सेना सोमवार को मसौदा अधिसूचना जारी करेगी और बाद की अधिसूचनाएं एक जुलाई से सेना की विभिन्न भर्ती इकाइयां जारी करेंगी.

उन्होंने कहा कि अग्निपथ योजना के तहत भर्ती रैलियां अगस्त, सितंबर और अक्टूबर में पूरे देश में होंगी.

लेफ्टिनेंट जनरल पोनप्पा ने कहा कि 25,000 कर्मचारियों का पहला बैच दिसंबर के पहले एवं दूसरे सप्ताह में प्रशिक्षण कार्यक्रम से जुड़ेगा तथा दूसरा बैच 23 फरवरी के आसपास अपने प्रशिक्षण में शामिल होगा.

उन्होंने कहा कि करीब 40,000 कर्मचारियों के चयन के लिए देशभर में कुल 83 भर्ती रैलियां आयोजित की जाएंगी.

चार साल के कार्यकाल के बाद 75 फीसद ‘अग्निवीरों’ के सशस्त्र बलों से बाहर आने के प्रावधान का जिक्र करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल पुरी ने कहा कि तीनों अंगों से हर साल 17,600 सैनिक समय-पूर्व सेवानिवृति ले लेते हैं. उन्होंने कहा, ‘ऐसा नहीं है कि अग्निपथ योजना के तहत ही लोग (सेना से) बाहर आएंगे.’

सेना सालाना 50,000 से 60,000 सैनिकों की भर्ती करती है.

अग्निपथ योजना : सेना ने दिशा-निर्देश जारी किए

भारतीय सेना ने ‘अग्निपथ सेनाभर्ती योजना’ के तहत सेना में शामिल होने के इच्छुक आवेदकों के लिए रविवार को दिशा-निर्देश और अन्य संबंधित जानकारी जारी की.

सेना ने कहा कि ‘अग्निवीर’ भारतीय सेना में अलग श्रेणी होगी जो मौजूदा रैंक से अलग होगी और उन्हें किसी भी रेजीमेंट या यूनिट में तैनात किया जा सकेगा.

उसने कहा कि सरकारी गोपनीयता कानून, 1923 के तहत ‘अग्निवीरों’ को चार साल की सेवा के दौरान मिली गोपनीय सूचनाओं को किसी भी अनाधिकारिक व्यक्ति या सूत्र को बताने से प्रतिबंधित किया जाएगा.

सेना ने कहा, ‘इस योजना के लागू होने से सेना के मेडिकल ब्रांच के टेक्निकल कैडर के अलावा अन्य सभी सामान्य कैडरों में सैनिकों की नियुक्ति सिर्फ उन्हीं के लिए खुलेगी, जिन्होंने बतौर अग्निवीर अपना कार्यकाल पूरा किया है.’

सेना ने एक विज्ञप्ति में कहा कि सेवा काल समाप्त होने से पहले ‘अग्निवीर’ अपनी इच्छा से सेना नहीं छोड़ सकेंगे.

उसमें कहा गया है, ‘हालांकि, बेहद दुर्लभ मामले में इस योजना के तहत भर्ती सैनिक को सक्षम प्राधिकार की अनुमति पर सेना छोड़ने की अनुमति होगी.’

केंद्र सरकार ने दशकों पुरानी रक्षा भर्ती प्रक्रिया में आमूलचूल परिवर्तन करते हुए थलसेना, नौसेना और वायुसेना में सैनिकों की भर्ती संबंधी अग्निपथ नामक योजना की बीते 14 जून को घोषणा की थी, जिसके तहत सैनिकों की भर्ती सिर्फ चार साल की कम अवधि के लिए संविदा आधार पर की जाएगी.

योजना के तहत तीनों सेनाओं में इस साल करीब 46,000 सैनिक भर्ती किए जाएंगे. योजना के तहत 17.5 साल से 21 साल तक के युवाओं को चार साल के लिए सेना में भर्ती किया जाएगा और उनमें से 25 फीसदी सैनिकों को अगले 15 और साल के लिए सेना में रखा जाएगा.

हालांकि बाद में सरकार ने 2022 में भर्ती के लिए अधिकतम आयु सीमा को बढ़ाकर 23 साल कर दिया. इस नई योजना के तहत भर्ती रंगरूटों को ‘अग्निवीर’ कहा जाएगा.

मालूम हो कि अग्निपथ योजना के तहत रोजगार के पहले वर्ष में एक ‘अग्निवीर’ का मासिक वेतन 30,000 रुपये होगा, लेकिन हाथ में केवल 21,000 रुपये ही आएंगे. हर महीने 9,000 रुपये सरकार के एक कोष में जाएंगे, जिसमें सरकार भी अपनी ओर से समान राशि डालेगी.

इसके बाद दूसरे, तीसरे और चौथे वर्ष में मासिक वेतन 33,000 रुपये, 36,500 रुपये और 40,000 रुपये होगा. प्रत्येक ‘अग्निवीर’ को ‘सेवा निधि पैकेज’ के रूप में 11.71 लाख रुपये की राशि मिलेगी और इस पर आयकर से छूट मिलेगी.

यह भर्ती ‘अखिल भारतीय, अखिल वर्ग’ के आधार पर की जाएगी. इससे उन कई रेजींमेंट की संरचना में बदलाव आएगा, जो विशिष्ट क्षेत्रों से भर्ती करने के अलावा राजपूतों, जाटों और सिखों जैसे समुदायों के युवाओं की भर्ती करती हैं.

सशस्त्र बलों द्वारा समय-समय पर घोषित की गई संगठनात्मक आवश्यकता और सेना की नीतियों के आधार पर चार साल की सेवा पूरी होने पर ‘अग्निवीर’ को सशस्त्र बलों में स्थायी नामांकन के लिए आवेदन करने का अवसर प्रदान किया जाएगा.

बताया जा रहा है कि इस योजना का मकसद रक्षा विभाग के बढ़ते वेतन और पेंशन खर्च को कम करना है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) की बैठक में योजना को मंजूरी मिलने के थोड़ी ही देर बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मीडिया को नई पहल के बारे में पूरा ब्योरा उपलब्ध कराया.

कांग्रेस ने योजना के विरोध में ‘सत्याग्रह’ किया

इस बीच, केंद्र सरकार पर अपना हमला तेज करते हुए कांग्रेस ने अग्निपथ योजना का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों के समर्थन में रविवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ‘सत्याग्रह’ का आयोजन किया.

कोलकाता में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का योजना के​ विरोध में प्रदर्शन. (फोटो: पीटीआई)

पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने युवाओं से ‘फर्जी राष्ट्रवादियों’ को पहचानने की अपील करते हुए उनसे कहा कि युवा देश में ऐसी नई सरकार का गठन सुनिश्चित करें जो ‘वास्तविक तौर पर देशभक्त हो.’

प्रियंका गांधी वाद्रा ने आरोप लगाया कि नयी सैन्य भर्ती योजना युवाओं के साथ-साथ रक्षा बलों के लिए भी विनाशकारी होगी.

सत्याग्रह में कांग्रेस महासचिव संगठन केसी वेणुगोपाल, लोकसभा में पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी, हरीश रावत, संचार विभाग के प्रमुख जयराम रमेश, सलमान खुर्शीद, सचिन पायलट, दीपेंद्र हुड्डा और अजय माकन सहित कांग्रेस कांग्रेस के कई शीर्ष नेताओं ने जंतर मंतर पर आयोजित सत्याग्रह में भाग लिया.

प्रियंका गांधी ने कहा, ‘आपसे बड़ा कोई देशभक्त नहीं है. मैं आपसे कहना चाहती हूं, अपनी आंखें खोलो और नकली राष्ट्रवादियों और नकली देशभक्तों को पहचानो. पूरा देश और कांग्रेस आपके संघर्ष में आपके साथ है.’

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने नई दिल्ली में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि योजना को लेकर युवाओं के मन में काफी शंकाएं हैं और इसे वापस लिया जाना चाहिए.

उन्होंने सवाल किया कि क्या यह शिक्षित युवाओं के लिए मनरेगा जैसी योजना है या फिर इसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का कोई ‘गुप्त एजेंडा’ है. यादव ने अपनी पार्टी द्वारा बिहार में हिंसा भड़काने के आरोपों को खारिज किया और युवाओं से शांतिपूर्वक आंदोलन करने की अपील की. उन्होंने सवाल किया, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरे मामले पर चुप क्यों हैं?’

इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिंसक प्रदर्शनों पर अभी तक कुछ नहीं कहा है. उन्होंने रविवार को ‘अग्निपथ’ योजना के खिलाफ आंदोलन का सीधा जिक्र तो नहीं किया लेकिन कहा, ‘यह हमारे देश का दुर्भाग्य है कि अच्छी नीयत से लाई गईं बहुत सी अच्छी चीजें राजनीतिक रंग में फंस जाती हैं. टीआरपी की मजबूरी में मीडिया भी इसमें घसीटा जाता है.’

उन्होंने केंद्र द्वारा प्रगति मैदान एकीकृत ट्रांजिट कॉरिडोर परियोजना की मुख्य सुरंग और पांच अंडरपास का यहां उद्घाटन करने के बाद यह बात कही.

इधर, बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष मायावती ने दावा किया कि इस योजना से युवा निराश और हताश हैं.

झारखंड में मंदार उपचुनाव के लिए निर्दलीय उम्मीदवार देव कुमार धन के समर्थन में एक रैली को संबोधित करते हुए एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार पर राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा, ‘मोदी सरकार ने पिछले आठ वर्षों में देश की अर्थव्यवस्था को नष्ट कर दिया. वर्तमान में देश में बेरोजगारी एक बड़ा मुद्दा है, जो मेरी गणना के अनुसार लगभग 16-17 प्रतिशत है. अब, वे अग्निपथ योजना लाकर राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं.’

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भी केंद्र पर निशाना साधा. पार्टी के 56वें ​​स्थापना दिवस पर शिवसेना विधायकों और वरिष्ठ नेताओं को संबोधित करते हुए ठाकरे ने कहा कि अगर युवाओं के पास नौकरी नहीं है तो भगवान राम के बारे में बोलने का कोई मतलब नहीं है.

उन्होंने सवाल किया, ‘जिन योजनाओं का कोई मतलब नहीं है, उन्हें ‘अग्निवीर’ और ‘अग्निपथ’ जैसे नाम क्यों दें? 17 से 21 साल के युवाओं को चार साल बाद क्या मिलेगा?’

उन्होंने कहा, ‘सैनिकों को अनुबंध पर रखना खतरनाक है और युवाओं की महत्वाकांक्षाओं और जीवन के साथ खिलवाड़ करना गलत है. केवल भगवान राम के बारे में बोलने का कोई मतलब नहीं है, अगर युवाओं के पास नौकरी नहीं है.’

आम आदमी पार्टी ने इस योजना को देश के युवाओं के साथ ‘एक बड़ा धोखा’ करार दिया और इसे वापस लेने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार नई सैन्य भर्ती योजना के लाभों के बारे में भ्रामक दावे कर रही है.

योजना का भाजपा नेताओं ने बचाव किया

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने रविवार को जम्मू में कहा कि एक ‘शानदार और दूरदर्शी’ योजना के खिलाफ भ्रम उत्पन्न करने के लिए जान-बूझकर प्रयास किए जा रहे हैं. मंत्री ने यह भी कहा कि यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बेरोजगार युवाओं के लिए ‘लंबे और सावधानीपूर्वक’ विचार-विमर्श के बाद शुरू की गई है.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस नयी भर्ती नीति का बचाव किया.

उन्होंने लखनऊ में कहा, ‘पूरी दुनिया ने अग्निपथ योजना का स्वागत किया है, वहीं विपक्षी दल युवाओं के जीवन से खिलवाड़ की अपनी प्रवृत्ति के अनुरूप उन्हें गुमराह कर रहे हैं. हम अग्निवीरों को उत्तर प्रदेश पुलिस और अन्य सेवाओं में प्राथमिकता देंगे. ये युवा हमारे लिए उपहार होंगे, जिनके पास प्रतिकूल समय के दौरान प्रशिक्षण, अनुशासन और देश के प्रति देशभक्ति की भावना होगी.’

अग्निपथ योजना के विरोध में प्रदर्शन जारी

इस बीच अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने सहारनपुर, भदोही और देवरिया जिलों में हिंसक प्रदर्शनों में कथित रूप से शामिल रहने और युवाओं को उकसाने के मामले में नौ लोगों को गिरफ्तार किया और कई अन्य को हिरासत में लिया.

कठुआ में अग्निपथ योजना के विरोध में प्रदर्शन करते युवा. (फोटो: पीटीआई)

अधिकारियों ने बताया कि भदोही में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया और चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया. देवरिया में प्रदर्शनकारियों ने एक गैस फिलिंग स्टेशन में पथराव किया और तोड़फोड़ की. वहां के एक सेल्समैन ने प्रदर्शनकारियों पर नकदी लूटने का भी आरोप लगाया है. चौक और पैना रोड पर स्थित दुकानों के मालिकों ने भय के चलते अपनी दुकानें बंद कर दी.

गुजरात के अहमदाबाद शहर में बिना अनुमति लिए प्रदर्शन के लिए जमा हुए कम से कम 14 लोगों को हिरासत में लिया गया. जिन राज्यों में व्यापक हिंसा और आगजनी हुई थी, उनमें आज अपेक्षाकृत शांति रही.

इस बीच चंडीगढ़ से प्राप्त सूचना के अनुसार सेना में नौकरी के आकांक्षी युवकों ने रविवार को पंजाब के रूपनगर और होशियारपुर जिलों में अग्निपथ योजना के खिलाफ विरोध मार्च निकाला और आनंदपुर साहिब में चंडीगढ़-ऊना राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों के आवागमन को एक घंटे के लिए रोक दिया.

विरोध के बीच पुलिस को स्थिति पर बहुत बारीकी से नजर रखने और शांति सुनिश्चित करने के लिए उपयुक्त निवारक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है.

केंद्र ने बीते 18 जून को अग्निपथ से सेवानिवृत्त होने वालों के लिए रक्षा मंत्रालय और अर्धसैनिक बलों में रिक्तियों में 10 प्रतिशत आरक्षण सहित कई प्रोत्साहनों की घोषणा की.

यह घोषणा कई राज्यों में नई सैन्य भर्ती योजना के खिलाफ हिंसक विरोध प्रदर्शनों को शांत करने की कोशिश के तहत की गई, जबकि विपक्षी दलों ने इस वापस लेने के लिए दबाव बढ़ाया.

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सीएपीएफ और असम राइफल्स में भर्ती के लिए निर्धारित ऊपरी आयु सीमा से अग्निवीरों को 3 साल की छूट देने का भी फैसला किया.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के कार्यालय के अनुसार, भारतीय तटरक्षक और रक्षा असैन्य पद तथा सार्वजनिक क्षेत्र के सभी 16 रक्षा उपक्रमों में 10 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाएगा.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)