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अग्निपथ योजना: सेना में भर्ती के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, जुलाई से शुरू होगी प्रक्रिया

सेना ने कहा कि ‘अग्निवीर’ नाम से भारतीय सेना में एक अलग रैंक बनाया जाएगा, जो कि किसी भी अन्य मौजूदा रैंक से अलग होगा. अग्निवीर के लिए शासकीय गोपनीयता अधिनियम, 1923 के तहत किसी भी अनधिकृत व्यक्ति या स्रोत को चार साल की सेवा अवधि के दौरान प्राप्त विशिष्ट जानकारी का खुलासा करने पर रोक रहेगी. अग्निपथ योजना के तहत भर्ती किए जाने वाले कर्मचारियों को ‘अग्निवीर’ के रूप में जाना जाएगा.

(फोटो साभार: फेसबुक वीडियोग्रैब)

नई दिल्ली: केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा लाई गई संविदा आधारित अल्पकालिक सैन्यभर्ती योजना ‘अग्निपथ’ को वापस लिए जाने की मांग को लेकर जारी प्रदर्शनों के बीच बीते सोमवार को सेना ने जुलाई से इसके तहत नौकरी के आकांक्षी युवाओं के लिए अनिवार्य ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन को लेकर एक अधिसूचना जारी की है.

अधिसूचना में सेना ने कहा कि नए मॉडल के तहत नौकरी के इच्छुक सभी युवाओं के लिए सेना की भर्ती वेबसाइट पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है, जो जुलाई से शुरू होगी.

सेना ने कहा कि ‘अग्निवीर’ नाम से भारतीय सेना में एक अलग रैंक बनाया जाएगा, जो कि किसी भी अन्य मौजूदा रैंक से अलग होगा. सेना ने कहा कि अग्निवीर के लिए शासकीय गोपनीयता अधिनियम, 1923 के तहत किसी भी अनधिकृत व्यक्ति या स्रोत को चार साल की सेवा अवधि के दौरान प्राप्त विशिष्ट जानकारी का खुलासा करने पर रोक रहेगी.

इसमें कहा गया है कि इस योजना के शुरू होने से चिकित्सा शाखा के तकनीकी काडर को छोड़कर भारतीय सेना के नियमित काडर में सैनिकों की भर्ती केवल उन कर्मचारियों के लिए उपलब्ध होगी, जिन्होंने अग्निवीर के रूप में अपनी सेवा की अवधि पूरी कर ली है.

सेना ने कहा कि सेवा की शर्तों को पूरा करने से पहले अनुरोध पर किसी अग्निवीर की सेवा से मुक्ति की अनुमति नहीं है. सेना ने कहा, ‘हालांकि, सबसे दुर्लभ मामलों में अगर सक्षम प्राधिकारी द्वारा मंजूरी दी जाती है तो इस योजना के तहत लिए गए कर्मचारियों को सेवामुक्त किया जा सकता है.’

अग्निपथ योजना के तहत भर्ती किए जाने वाले कर्मचारियों को ‘अग्निवीर’ के रूप में जाना जाएगा.

सेना ने कहा कि नई भर्तियां सेना अधिनियम, 1950 के प्रावधानों के अधीन होंगी और ये अग्निवीर जमीन, समुद्र या हवा में जहां कहीं भी आदेश दिया जाएगा, वहां जाने के लिए उत्तरदायी होंगे.

अधिसूचना में कहा गया है कि अग्निवीर को अपनी सेवा अवधि के दौरान अपनी वर्दी पर एक ‘विशिष्ट प्रतीक चिह्न’ लगाना होगा और इस पर विस्तृत निर्देश अलग से जारी किए जाएंगे.

सेना ने कहा कि संगठनात्मक आवश्यकताओं और नीतियों के आधार पर ‘अग्निवीर’ को प्रत्येक बैच में उनकी सेवा की अवधि पूरी होने पर नियमित कैडर में नामांकन के लिए आवेदन करने का अवसर प्रदान किया जाएगा.

सेना द्वारा जारी दस्तावेज के अनुसार, ‘इन आवेदनों पर सेना वस्तुनिष्ठ मानदंडों के आधार पर केंद्रीकृत तरीके से विचार करेगी, जिसमें सेवा की अवधि के दौरान उनका प्रदर्शन शामिल है और अग्निवीरों के प्रत्येक विशिष्ट बैच के 25 प्रतिशत से अधिक को चार साल सेवा की अवधि पूरी होने के बाद नियमित कैडर में शामिल नहीं किया जाएगा.’

दस्तावेज के अनुसार, ‘नियमित कैडर के रूप में नामांकित अग्निवीरों को 15 साल की एक और अवधि के लिए सेवा करना आवश्यक होगा और वे वर्तमान में प्रचलित सेवा के नियम और शर्तों (जूनियर कमीशंड अधिकारी/अन्य रैंक के) द्वारा शासित होंगे.’

सेना ने कहा कि अग्निवीरों को उनके चार साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद फिर से चुने जाने का कोई अधिकार नहीं होगा. भर्ती प्रक्रिया के तहत प्रत्येक ‘अग्निवीर’ को अग्निपथ योजना के सभी नियमों और शर्तों को औपचारिक रूप से स्वीकार करना होगा. दस्तावेज के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु के कर्मचारियों के लिए नामांकन प्रपत्र पर माता-पिता या अभिभावकों के हस्ताक्षर की आवश्यकता होगी.

‘अग्निवीर’ नियमित सेवा करने वालों के लिए 90 दिनों के अवकाश की तुलना में वर्ष में 30 दिनों के अवकाश के लिए पात्र होंगे. चिकित्सकीय सलाह के आधार पर चिकित्सा अवकाश प्रदान किया जाएगा. सेना ने कहा कि अग्निवीरों के मासिक वेतन का 30 प्रतिशत अनिवार्य रूप से एक कोष में जमा किया जाएगा और उतनी ही राशि का योगदान सरकार करेगी.

अग्निपथ योजना की घोषणा के बाद से बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा और तेलंगाना समेत अनेक राज्यों में उग्र प्रदर्शन के बाद रविवार को तुलनात्मक शांति देखी गई, जबकि कई जगहों पर शांतिपूर्ण आंदोलन हो गए थे.

इस दौरान बीते 17 जून को तेलंगाना के सिकंदराबाद स्टेशन पर प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए आरपीएफ द्वारा की गई फायरिंग में एक 24 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई थी. हिंसा के दौरान किसी की मौत का यह पहला मामला है. मृत युवक की पहचान वारंगल जिले के दबीरपेट गांव के रहने वाले 24 वर्षीय राकेश के रूप में हुई है.

अग्निपथ सैन्य भर्ती योजना के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों को विफल करने के प्रयास के तहत देश के सैन्य नेतृत्व ने बीते 19 जून को घोषणा की थी कि नई भर्ती योजना के लिए आवेदकों को इस प्रतिज्ञा के साथ एक शपथ-पत्र देना होगा कि उन्होंने किसी भी विरोध, आगजनी या आंदोलन में भाग नहीं लिया है.

डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स में अतिरिक्त सचिव लेफ्टिनेंट जनरल अनिल पुरी ने योजना के खिलाफ हो रहे विध्वंसक प्रदर्शनों में शामिल लोगों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि जो युवा आगजनी एवं हिंसा में लिप्त हैं, वे सशस्त्र बलों की तीनों सेवाओं में नहीं शामिल हो पाएंगे, क्योंकि किसी को भी सशस्त्र बलों में शामिल करने से पहले पुलिस सत्यापन प्रक्रिया चलाई जाएगी.

वहीं तीनों सेनाओं (थलसेना, नौसेना और वायुसेना) ने नई नीति के तहत भर्ती के लिए बीते 18 जून को विस्तृत कार्यक्रम प्रस्तुत किया था.

दरअसल, केंद्र सरकार ने दशकों पुरानी रक्षा भर्ती प्रक्रिया में आमूलचूल परिवर्तन करते हुए थलसेना, नौसेना और वायुसेना में सैनिकों की भर्ती संबंधी अग्निपथ नामक योजना की बीते 14 जून को घोषणा की थी, जिसके तहत सैनिकों की भर्ती सिर्फ चार साल की कम अवधि के लिए संविदा आधार पर की जाएगी.

योजना के तहत तीनों सेनाओं में इस साल करीब 46,000 सैनिक भर्ती किए जाएंगे. योजना के तहत 17.5 साल से 21 साल तक के युवाओं को चार साल के लिए सेना में भर्ती किया जाएगा और उनमें से 25 फीसदी सैनिकों को अगले 15 और साल के लिए सेना में रखा जाएगा.

हालांकि बाद में सरकार ने 2022 में भर्ती के लिए अधिकतम आयु सीमा को बढ़ाकर 23 साल कर दिया. इस नई योजना के तहत भर्ती रंगरूटों को ‘अग्निवीर’ कहा जाएगा.

मालूम हो कि अग्निपथ योजना के तहत रोजगार के पहले वर्ष में एक ‘अग्निवीर’ का मासिक वेतन 30,000 रुपये होगा, लेकिन हाथ में केवल 21,000 रुपये ही आएंगे. हर महीने 9,000 रुपये सरकार के एक कोष में जाएंगे, जिसमें सरकार भी अपनी ओर से समान राशि डालेगी.

इसके बाद दूसरे, तीसरे और चौथे वर्ष में मासिक वेतन 33,000 रुपये, 36,500 रुपये और 40,000 रुपये होगा. प्रत्येक ‘अग्निवीर’ को ‘सेवा निधि पैकेज’ के रूप में 11.71 लाख रुपये की राशि मिलेगी और इस पर आयकर से छूट मिलेगी.

यह भर्ती ‘अखिल भारतीय, अखिल वर्ग’ के आधार पर की जाएगी. इससे उन कई रेजींमेंट की संरचना में बदलाव आएगा, जो विशिष्ट क्षेत्रों से भर्ती करने के अलावा राजपूतों, जाटों और सिखों जैसे समुदायों के युवाओं की भर्ती करती हैं.

सशस्त्र बलों द्वारा समय-समय पर घोषित की गई संगठनात्मक आवश्यकता और सेना की नीतियों के आधार पर चार साल की सेवा पूरी होने पर ‘अग्निवीर’ को सशस्त्र बलों में स्थायी नामांकन के लिए आवेदन करने का अवसर प्रदान किया जाएगा.

बताया जा रहा है कि इस योजना का मकसद रक्षा विभाग के बढ़ते वेतन और पेंशन खर्च को कम करना है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) की बैठक में योजना को मंजूरी मिलने के थोड़ी ही देर बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मीडिया को नई पहल के बारे में पूरा ब्योरा उपलब्ध कराया.

अग्निपथ लागू करने के प्रति मोदी सरकार दृढ़

केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के मोर्चा खोलने के बावजूद सरकार इस योजना को लागू करने के प्रति दृढ़ दिख रही है.

इस बीच अग्निपथ योजना के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई, जिसमें आरोप लगाया गया है कि सरकार ने सशस्त्र बलों के लिए वर्षों पुरानी चयन प्रक्रिया को रद्द कर दिया है, जो संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत है और इसके लिये संसद की मंजूरी भी नहीं ली गई है.

विरोध प्रदर्शनों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि फैसले और सुधार अस्थायी रूप से अप्रिय हो सकते हैं, लेकिन समय के साथ देश को उनका लाभ महसूस होगा.

कर्नाटक में विभिन्न विकास कार्यों का उद्घाटन या शिलान्यास करने के बाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘सुधारों का मार्ग ही हमें नए लक्ष्यों और नए संकल्प की ओर ले जा सकता है. हमने अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्र को खोल दिया है, जो दशकों तक सरकारी नियंत्रण में थे.’

इस बीच, महिंद्रा ग्रुप और टाटा संस जैसे प्रमुख कारोबारी समूहों ने सैन्य भर्ती के लिए लाई गई अग्निपथ योजना का समर्थन करते हुए कहा कि इस योजना में युवाओं के लिए कॉरपोरेट क्षेत्र में भी रोजगार की अपार संभावनाएं हैं.

केंद्र द्वारा बीते 14 मई को अग्निपथ योजना का अनावरण किए जाने के बाद भड़के हिंसक विरोध के सिलसिले में सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया गया है और विभिन्न कोचिंग सेंटर की भूमिका की जांच की जा रही है.

सरकार ने इस योजना को सेना के युवा स्वरूप को बढ़ाने के लिए दशकों पुरानी चयन प्रक्रिया में एक बड़े बदलाव के रूप में पेश किया, लेकिन प्रदर्शनकारी यह दावा करते हुए इसे वापस लेने की मांग कर रहे हैं कि नौकरी की सुरक्षा और अन्य लाभ से वे वंचित होंगे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)