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एमपीपीएससी परीक्षा में कश्मीर को लेकर पूछे गए सवाल पर विवाद, पर्चा बनाने वाले ब्लैक लिस्ट

मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीसीएस) की 19 जून को आयोजित राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2021 में सामान्य अभिरुचि परीक्षण के प्रश्न-पत्र में कथित तौर पर सवाल पूछा गया था कि क्या भारत को कश्मीर को पाकिस्तान को दे देने का निर्णय कर लेना चाहिए? राज्य के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि सरकार एमपीपीएससी एवं उच्च शिक्षा विभाग को पेपर तैयार करने वाले दोनों लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के लिए कहा है.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

इंदौर/भोपाल: मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) की दो दिन पहले आयोजित राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2021 में कश्मीर को लेकर आपत्तिजनक सवाल पर उत्पन्न विवाद के तूल पकड़ने के बाद आयोग ने इस प्रश्न की सामग्री से मंगलवार (21 जून) को असहमति जताई.

उसने इसके साथ ही संबंधित प्रश्न-पत्र तैयार करने वाले दो लोगों को अपनी काली सूची में डाल दिया है. एमपीपीएससी के एक आला अधिकारी ने इंदौर में यह जानकारी दी.

इसी बीच, मध्य प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भोपाल में संवाददाताओं से कहा, ‘एमपीपीएससी की परीक्षा में कश्मीर से जुड़ा विवादित प्रश्न पूछने का प्रसंग आपत्तिजनक है. जो दो (व्यक्ति) प्रश्न-पत्र बनाने वाले थे, उनमें से एक मध्य प्रदेश और एक महाराष्ट्र का है. विवादास्पद प्रश्न पूछने वाले दोनों पेपर सेटर्स पर भविष्य में प्रश्न पत्र तैयार करने पर रोक लगा दी गई है. सरकार एमपीपीएससी एवं उच्च शिक्षा विभाग को दोनों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए लिख रही है.’

उन्होंने कहा, ‘पूरे देश के अंदर इसकी सूचना दे दी गई है कि दोनों व्यक्तियों पर भविष्य में प्रश्न-पत्र तैयार करने पर रोक लगा दी गई है और इनसे कोई काम न लें.’

एमपीपीएससी के विशेष कार्याधिकारी रवींद्र पंचभाई ने इंदौर में संवाददाताओं को बताया, ‘राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2021 के सामान्य अभिरुचि परीक्षण के पर्चे में कश्मीर को लेकर पूछे गए प्रश्न की सामग्री से हम सहमत नहीं हैं. इसलिए हमने इस प्रश्न को परीक्षा से हटा दिया है.’

उन्होंने यह भी बताया कि एमपीपीएससी ने संबंधित प्रश्न-पत्र के सेटर (प्रश्न-पत्र तैयार करने वाला व्यक्ति) और मॉडरेटर (तैयार पर्चे को छपाई से पहले जांचने वाला शख्स) को काली सूची में डाल दिया है यानी उन्हें एमपीपीएससी की परीक्षा प्रणाली से हमेशा के लिए बाहर कर दिया गया है.

पंचभाई ने बताया कि एमपीपीएससी द्वारा दोनों व्यक्तियों के विभागों को उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए लिखा गया है. उन्होंने हालांकि भर्ती परीक्षा की गोपनीयता का हवाला देते हुए विवादास्पद प्रश्न-पत्र के सेटर और मॉडरेटर के नामों का खुलासा करने से इनकार कर दिया.

अधिकारियों ने बताया कि एमपीपीएससी की रविवार (19 जून) को आयोजित राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2021 में सामान्य अभिरुचि परीक्षण के प्रश्न-पत्र में कथित के रूप में सवाल किया गया था कि क्या भारत को कश्मीर को पाकिस्तान को दे देने का निर्णय कर लेना चाहिए?

इस सवाल पर पर्चे में पहला तर्क दिया गया, ‘हां, इससे भारत का बहुत-सा-धन बचेगा.’

दूसरा तर्क दिया गया, ‘नहीं, ऐसे निर्णय से इसी तरह की और भी मांगें बढ़ जाएंगी.’

प्रश्न-पत्र में इस सवाल के जवाब के लिए परीक्षार्थियों को चार विकल्प दिए गए थे. इनमें से पहले विकल्प में पहले तर्क को सही बताया गया था, दूसरे विकल्प में दूसरे तर्क को सही बताया गया था, तीसरे विकल्प में पहले और दूसरे, दोनों तर्कों को सही बताया गया था और चौथे विकल्प के अनुसार, पहला और दूसरा, दोनों तर्क सही नहीं है.

इस बीच, कश्मीर को लेकर आपत्तिजनक प्रश्न का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर फैल गया है. इस प्रश्न पर आक्रोशित लोग और विपक्षी नेता एमपीपीएससी की आयोजित परीक्षा में ऐसा सवाल किए जाने के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं.

प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष केके मिश्रा ने एमपीपीएससी के चेयरमेन के इस्तीफे की मांग करने के साथ-साथ प्रश्नपत्र चयनकर्ता पर एफआईआर दर्ज की भी मांग की.

उन्होंने कहा, ‘यह स्पष्ट रूप से राष्ट्रद्रोह का मामला है. कश्मीर को लेकर ऐसा सवाल पूछा गया था, जिसके लिए सैनिकों, लोगों और नेताओं ने अपना जीवन बलिदान कर दिया. एमपीपीएससी ने अपनी गलती स्वीकार कर ली है.’

मिश्रा ने कहा, ‘अब सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या प्रधानमंत्री, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और प्रदेश के गृह मंत्री की सहमति से सवाल पूछा गया था? ’

उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस पार्टी की मांग है कि एमपीपीएससी के चेयरमेन इस्तीफा दें और प्रश्नपत्र चयनकर्ता के खिलाफ राष्ट्रद्रोह का मुकदमा दर्ज हो.’

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी जानना चाहती है कि क्या एमपीपीएससी ने कश्मीर पर इस तरह का सवाल करने से पहले केंद्र सरकार और राज्य सरकार से सलाह ली थी.

मिश्रा ने कहा, ‘महात्मा गांधी के महान व्यक्तित्व और कार्यों पर सवाल पूछने के बजाय कुत्तों की हत्या और नसबंदी से संबंधित एक सवाल पूछा गया है. उसमें गांधी के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की गई है.’

राज्य कांग्रेस के मीडिया उपाध्यक्ष भूपेंद्र गुप्ता ने आरोप लगाया कि यह भाजपा की ‘महात्मा गांधी विरोधी सोच’ को उजागर करता है.

गुप्ता ने कहा, ‘भाजपा जहां भी सरकार में है, वह राष्ट्रपिता का अपमान करने का कोई मौका नहीं छोड़ती है.’

केके मिश्रा ने भाजपा पर पूरी शिक्षा प्रणाली को सांप्रदायिक रंग में रंगने और भारत की स्वतंत्रता में गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल और भीमराव अंबेडकर के योगदान को मिटाने की कोशिश करने का आरोप लगाया.

बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब एमपीपीएससी किसी सवाल को लेकर विवादों में रहा है. वर्ष 2020 में मध्य प्रदेश की राज्य प्रशासनिक सेवा की प्रारंभिक परीक्षा के पेपर में भील समुदाय को ‘आपराधिक प्रवृत्ति’ वाले और ‘शराब में डूबती जा रही जनजाति’ बताया गया था. जिसे लेकर काफी विवाद हुआ था.

पेपर के एक गद्यांश में ‘आपराधिक प्रवृत्ति’ वाले लोगों के रूप में भीलों का विवादास्पद सामान्यीकरण किया गया था. इसके साथ ही विवाह से जुड़ी एक प्रथा के कारण भील समुदाय को ‘शराब में डूबती जा रही जनजाति’ बताया गया था.

कांग्रेस सरकार ने तब इसे लेकर कुछ अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी.

इसके अलावा मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में राजनीति शास्त्र के पेपर में क्रांतिकारियों को कथित तौर पर आतंकवादी बताने पर विवाद हो गया था.

ग्वालियर स्थित जीवाजी विश्वविद्यालय में एमए राजनीतिक शास्त्र तीसरे सेमेस्टर की परीक्षा में प्रश्न पत्र ‘राजनीतिक दर्शन-3, आधुनिक भारत का राजनीतिक विचार’ में एक सवाल पूछा गया था, ‘क्रांतिकारी आतंकवादियों के कार्यकलाप वर्णन कीजिए. उग्रवादी और क्रांतिकारी आतंकवादियों में क्या अंतर है?’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)