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अमेरिका: सुप्रीम कोर्ट ने रो बनाम वेड फ़ैसले को पलटते हुए महिलाओं से गर्भपात का हक़ छीना

1973 के रो बनाम वेड फ़ैसले में कहा गया था कि गर्भपात कराना या न कराना, तय करना महिलाओं का अधिकार है. सुप्रीम कोर्ट के इसे पलट देने के बाद देश के आधे राज्यों में गर्भपात पर प्रतिबंध की संभावना है. अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने कोर्ट के निर्णय को ग़लत बताते हुए कहा कि नेताओं को एक महिला और उसके डॉक्टर्स के बीच हुए फ़ैसलों में हस्तक्षेप की अनुमति नहीं दी जाएगी.

24 जून 2022 को अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के बाहर गर्भपात विरोधी प्रदर्शनकारी. (फोटो: रॉयटर्स)

वाशिंगटन/नैरोबी/नई दिल्ली: अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने 50 साल पहले के रो बनाम वेड मामले में दिए गए फैसले को पलटते हुए गर्भपात के लिए संवैधानिक संरक्षण को समाप्त कर दिया है. शुक्रवार को हुए इस घटनाक्रम से लगभग आधे राज्यों में गर्भपात पर प्रतिबंध लगने की उम्मीद है.

यह निर्णय कुछ साल पहले तक अकल्पनीय था. उच्चतम न्यायालय का फैसला गर्भपात विरोधियों के दशकों के प्रयासों को सफल बनाने वाला है.

रॉयटर्स के अनुसार, कंज़रवेटिव बहुमत वाली अदालत ने 6:3 के अनुपात में दिए गए इस फैसले में रिपब्लिकन समर्थित मिसिसिपी कानून को बरकरार रखा, जो 15 सप्ताह के बाद गर्भपात पर प्रतिबंध लगाता है.

रो फैसले को उलटने के लिए वोट अनुपात 5:4 था, जहां मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने अलग से लिखा कि उन्होंने मिसिसिपी कानून को बरकरार रखा है लेकिन इसकी पिछली नजीर पूरी तरह से मिटाने का अलग से कोई कदम नहीं उठाया.

अदालत का फैसला अधिकतर अमेरिकियों की इस राय के विपरीत है कि 1973 के रो बनाम वेड फैसले को बरकरार रखा चाहिए जिसमें कहा गया था कि गर्भपात कराना या न कराना, यह तय करना महिलाओं का अधिकार है. इससे अमेरिका में महिलाओं को सुरक्षित गर्भपात का अधिकार मिल गया था.

न्यायधीशों ने माना कि गर्भ के 24 से 28 सप्ताह के अंदर गर्भपात की अनुमति देने वाला रो बनाम वेड निर्णय गलत तरीके से लिया गया क्योंकि अमेरिकी संविधान में गर्भपात के अधिकारों का कोई विशेष उल्लेख नहीं है.

कंज़रवेटिव जस्टिस सैमुअल अलिटो द्वारा लिखा गया फैसले का एक मसौदा मई महीने आश्चर्यजनक ढंग से लीक हो गया था. शुक्रवार का फैसला उस ड्राफ्ट की ही बात कहता है.

इस फैसले के संबंध में एक महीने पहले जज की यह मसौदा राय लीक हो गई थी कि अदालत गर्भपात को मिले संवैधानिक संरक्षण को समाप्त कर सकती है. मसौदा राय के लीक होने के बाद अमेरिका में लोग सड़कों पर उतर आए थे.

अलिटो ने फैसले में लिखा, ‘संविधान गर्भपात का कोई संदर्भ नहीं देता है, और ऐसा कोई अधिकार किसी भी संवैधानिक प्रावधान द्वारा संरक्षित नहीं है.’

रो बनाम वेड में माना गया था कि अमेरिकी संविधान के तहत व्यक्तिगत निजता का अधिकार एक महिला की गर्भावस्था को समाप्त करने की क्षमता की रक्षा करता है. सुप्रीम कोर्ट ने 1992 के एक फैसले में प्लांड पेरेंटहुड ऑफ सदर्न पेनसिल्वेनिया बनाम केसी में गर्भपात के अधिकारों की पुष्टि की थी और गर्भपात करवाने को लेकर ‘अनुचित भार डालने’ वाले कानूनों को प्रतिबंधित किया था.

अलिटो ने लिखा, ‘रो शुरू से ही गंभीर रूप से गलत थे. वह तर्क असाधारण रूप से कमजोर था, और इस निर्णय के हानिकारक परिणाम हुए हैं. और गर्भपात के मुद्दे का एक राष्ट्रीय आमराय कायम करने की बजाय रो और केसी ने बहस को बढ़ाया और विभाजित किया.’

गर्भपात के अधिकारों पर सुप्रीम कोर्ट की मिसाल के उल्लंघन के रूप में मिसिसिपी के कानून को निचली अदालतों ने ब्लॉक कर दिया था.

गर्भपात को संवैधानिक अधिकार के रूप में मान्यता न देकर यह फैसला राज्यों को इसे प्रतिबंधित करने वाले कानून लाने की ताकत देता है. अब छब्बीस राज्य निश्चित या संभावित तौर पर गर्भपात को बैन करेंगे. मिसिसिपी उन 13 राज्यों में शामिल है जहां पहले से ही तथाकथित ट्रिगर कानून हैं जो गर्भपात पर प्रतिबंध लगाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं.

लिबरल राज्यों में गर्भपात वैध रहने की संभावना है. एक दर्जन से अधिक राज्यों में वर्तमान में गर्भपात के अधिकारों की रक्षा करने वाले कानून हैं. कई रिपब्लिकन नेतृत्व वाले राज्यों ने हाल के वर्षों में रो फैसले की अवहेलना करते हुए विभिन्न गर्भपात प्रतिबंध पारित किए हैं.

रो फैसले से पहले कई राज्यों ने गर्भपात पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसके चलते गर्भपात की इच्छुक महिलाओं के पास कुछ ही विकल्प बचे थे.

शुक्रवार के फैसले के परिणामस्वरूप अमेरिका के बड़े क्षेत्रों में अवांछित गर्भ न रखने की इच्छुक महिलाओं के पास दूसरे राज्य-जहां प्रक्रिया कानूनी और उपलब्ध है, की यात्रा करने, ऑनलाइन गर्भपात की गोलियां खरीदने या खतरनाक और अवैध तरह से गर्भपात करवाने का विकल्प बचा है.

रो बनाम वेड निर्णय को उलटना लंबे समय से ईसाई रूढ़िवादियों और कई रिपब्लिकन पदाधिकारियों का लक्ष्य रहा है.

रिपब्लिकन पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 2016 में एक उम्मीदवार के रूप में सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों को नियुक्त करने का वादा किया था जो रो फैसले को उलट देंगे. अपने चार साल के कार्यकाल में वो तीन कंज़रवेटिव न्यायाधीशों को नियुक्त करने में सफल रहे- जो कुल संख्या का तिहाई है. ट्रम्प की तीनों नियुक्तियां- जस्टिस नील गोरसच, ब्रेट कैवेनॉ और एमी कोनी बैरे – शुक्रवार के फैसले में बहुमत में थीं.

मिसिसिपी में शेष एकमात्र गर्भपात क्लिनिक जैक्सन विमेंस हेल्थ आर्गेनाईजेशन ने 2018 के कानून को चुनौती दी और उसे सर्वोच्च न्यायालय में डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन का समर्थन मिला. इस कानून के अनुसार, गर्भपात की अनुमति तब है जब ‘चिकित्सकीय आपात स्थिति’ (Medical Emergency) है या ‘भ्रूण गंभीर असामान्यता’ से जूझ रहा है, लेकिन यह बलात्कार या इन्सेस्ट (किसी परिजन द्वारा बनाए गए शारीरिक संबंध) के फलस्वरूप हुए गर्भधारण के लिए अपवाद नहीं देता है.

2018 में एक फ़ेडरल न्यायाधीश ने रो फैसले का हवाला देते हुए कानून को रद्द कर दिया. 2019 में न्यू ऑरलियन्स स्थित 5वीं यूएस सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स भी इसी निष्कर्ष पर पहुंचा था.

गर्भपात के अधिकारों का समर्थन करने वाले शोध संगठन न्यूयॉर्क के गुट्टमाकर इंस्टिट्यूट द्वारा 15 जून को जारी आंकड़ों के अनुसार, 2020 में बीते तीन वर्षों के दौरान अमेरिका में गर्भपात की संख्या में 8% की वृद्धि हुई है, जो 30 साल के गिरावट वाले रुझान के उलट है. (अधिक पढ़ें)

रो फैसले के सात साल बाद 1980 में अमेरिकी गर्भपात दर चरम पर थी, बच्चे पैदा करने वाली 15 से 44 की उम्र की प्रति 1,000 महिलाओं पर 29.3 गर्भपात हुए थे, 2017 में यह दर प्रति 1,000 पर 13.5  थी, जो 2020 में बढ़कर प्रति 1,000 महिलाओं में 14.4 पर पहुंच गई.

2020 में अमेरिका में 9,30,160 गर्भपात हुए, जहां 20.6% गर्भधारण में का अंत गर्भपात के रूप में हुआ. यह 2017 में 18.4% से अधिक था. 2017 से 2020 के बीच मिसिसिपी में हुए गर्भपात में 40% की वृद्धि देखी गई.

वैश्विक स्तर पर गर्भपात के अधिकार आम तौर पर बढ़ रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि दुनिया भर में हर साल लगभग 73 मिलियन गर्भपात होते हैं, जिसमें सभी 29% प्रेगनेंसी शामिल हैं.

अदालत का फैसला गलत, पूरे देश में महिलाओं का स्वास्थ्य और जीवन अब खतरे में- जो बाइडन

जो बाइडन. (फोटो: रॉयटर्स)

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने शुक्रवार को कहा कि वह उन राज्यों में गर्भपात संबंधी नियमों के मद्देनजर महिलाओं के अधिकारों के संरक्षण के लिए अपनी ‘क्षमतानुसार’ हरसंभव प्रयास करेंगे, जहां इन्हें प्रतिबंधित किया जाएगा.

अमेरिका के उच्चतम न्यायालय ने कई साल पहले रो बनाम वेड मामले में दिए गए फैसले को पलटते हुए गर्भपात के लिए संवैधानिक संरक्षण को समाप्त कर दिया है. शुक्रवार को हुए इस घटनाक्रम से लगभग आधे राज्यों में गर्भपात पर प्रतिबंध लगने की संभावना है.

बाइडन ने कहा कि नेताओं को उन फैसलों में हस्तक्षेप की अनुमति नहीं दी जाएगी जो एक महिला और उसके चिकित्सक के बीच होगा.

अमेरिकी राष्ट्रपति ने अदालती फैसले को ‘गलत’ करार दिया है. उन्होंने गर्भपात के लिए संवैधानिक सुरक्षा की वकालत करने वालों से अपील की कि वे केवल शांतिपूर्ण तरीके से विरोध-प्रदर्शन करें.

बाइडन ने ह्वाइट हाउस से संबोधित करते हुए कहा, ‘आज का दिन अदालत और देश के लिए एक दुखद दिन है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं यह स्पष्ट कर दूं कि पूरे देश में महिलाओं का स्वास्थ्य और जीवन अब खतरे में है.’

बाइडन ने कहा कि अदालत ने कुछ ऐसा किया है जो पहले कभी नहीं किया गया. उन्होंने कहा कि अदालत ने अमेरिकी जनता को अचानक एक संवैधानिक अधिकार से वंचित कर दिया.

इस बीच, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उच्चतम न्यायालय के फैसले की सराहना की. उन्होंने ‘फॉक्स न्यूज’ के साथ साक्षात्कार में कहा कि यह फैसला प्रत्येक व्यक्ति के हित में है.

उन्होंने कहा, ‘यह फैसला संविधान का पालन और अधिकारों को बहाल करने जैसा है, जोकि बहुत पहले आ जाना चाहिए था.’

उधर, इस फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय के बाहर विरोध-प्रदर्शन की आशंका के चलते पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं.

पुलिस का कहना है कि वाशिंगटन में अन्य स्थानों पर भी सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा किया जा रहा हैं और ऐसे स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जा रही है, जहां व्यापक विरोध-प्रदर्शन होने की आशंका है.

फैसले से वैश्विक बहस शुरू

गर्भपात के लिए संवैधानिक संरक्षण को समाप्त करने वाले फैसले ने दुनिया भर में गर्भपात विरोधियों को प्रोत्साहित किया है. वहीं, गर्भपात के अधिकार के पैरोकारों ने चिंता जताई है कि यह फैसला उनके देश में इसे वैध बनाने की दिशा में हाल में उठाए गए कदमों को जोखिम में डाल सकता है.

अर्जेंटीना के एक सक्रियतावादी और लैटिन अमेरिका और कैरिबियन के कम्पेनियन नेटवर्क (गर्भपात अधिकारों का समर्थन करने वाला एक समूह) के सदस्य रूथ जुरब्रिगेन ने कहा, ‘अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक रो बनाम वेड के फैसले को पलटना ‘दिखाता है कि इस प्रकार के अधिकारों को हमेशा कुचले जाने का खतरा होता है.’

विदा एसवी फाउंडेशन की अध्यक्ष सारा लारिन ने कहा, ‘मुझे विश्वास है कि इस फैसले से अमेरिका और दुनिया भर में गर्भपात को खत्म करना संभव होगा.’

केन्या में गर्भपात के अधिकारों के लिए काम करने वाली फोंसिना अर्चना ने कहा कि शुक्रवार के फैसले की खबर देखकर वह थोड़ी देर के लिए दहशत की स्थिति में आ गईं.

उन्होंने कहा, ‘यह अमेरिका में हो रहा है, जबकि महिला अधिकारों की बात आने पर उसे मिसाल होना चाहिए था. अगर यह अमेरिका में हो रहा है, तो यहां अफ्रीका में मेरे बारे में क्या? यह एक बहुत ही दुखद दिन है.’

उन्होंने चिंता जताई कि यह फैसला पूरे अफ्रीका में गर्भपात विरोधियों को प्रोत्साहित करेगा, जिन्होंने प्रजनन स्वास्थ्य क्लीनिक में बाधा पहुंचाई है या हमला करने की धमकी दी है. उन्होंने कहा, ‘महाद्वीप में कोई सुरक्षित जगह नहीं है.’

गर्भपात के अधिकारों का समर्थन करने वाले शोध संगठन न्यूयॉर्क के गुट्टमाकर इंस्टिट्यूट के अनुसार, उप-सहारा अफ्रीका में गर्भपात पहले से ही दुनिया के किसी भी अन्य क्षेत्र की तुलना में अधिक असुरक्षित है. बड़ी संख्या में बच्चे पैदा करने वाली उम्र की महिलाएं उन देशों में रहती है, जहां गर्भपात कानून अत्यधिक या मध्यम प्रतिबंधित है.

गर्भपात विरोधी कार्यकर्ताओं ने इस फैसले की सराहना की. विधि निर्माता अमालिया ग्रेनाटा ने ट्वीट किया ‘दुनिया में फिर से न्याय हुआ है. हम इसे अर्जेंटीना में भी लागू करने जा रहे हैं.’

विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख टेड्रोस अधनोम गेब्रेयेसस ने ट्विटर पर कहा, वह इस फैसले से ‘चिंतित और निराश’ हैं. उन्होंने कहा कि यह ‘महिलाओं के अधिकारों और स्वास्थ्य देखभाल तक पहुंच’ दोनों को कम करता है.

गर्भपात के अधिकार के समर्थन में मई महीने में कैलिफोर्निया में हुआ एक प्रदर्शन. (फोटो: रॉयटर्स)

पी. चिदंबरम ने फैसले की आलोचना की

भारत में विपक्षी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने भी शुक्रवार को अमेरिकी उच्चतम न्यायालय के उस फैसले की आलोचना की.

चिदंबरम ने कहा कि जब एक राष्ट्र निराशाजनक रूप से विभाजित हो जाता है, तो गैर-निर्वाचित न्यायाधीश अपनी पूर्वाग्रह से भरी राय लोगों पर थोप सकते हैं.

उन्होंने कहा कि संवैधानिक अधिकार अदालत द्वारा प्रदान नहीं किए गए हैं और अदालत उस अधिकार को वापस नहीं ले सकता जो उसके द्वारा प्रदान नहीं किया गया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)