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यूपी पुलिस की छापेमारी के कुछ घंटे बाद आरोपी की मौत, 10 पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज

उत्तर प्रदेश की फ़र्रूख़ाबाद पुलिस ने बताया कि घटना उस समय घटी जब मीरापुर थाने की टीम ने 23 जून की रात एक गांव में कथित तौर पर ज़हरीली शराब की बिक्री करने वाले लोगों के घरों पर छापेमारी की थी. उसी रात करीब डेढ़ बजे गांव के एक 30 वर्षीय युवक की मौत की सूचना मिली और आरोप लगाया गया कि पुलिस के पीटने से उसकी मृत्यु हुई.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

फर्रूखाबाद: उत्तर प्रदेश के फर्रूखाबाद में अवैध शराब बनाने के आरोपी के घर पर पुलिस की छापेमारी की कार्रवाई के कुछ घंटों बाद व्यक्ति की मौत हो गई. मृतक के परिजनों ने आरोपी की मौत के लिए पुलिस को जिम्मेदार ठहराया है, जिसके बाद 10 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई.

पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा ने कहा कि यह घटना उस समय घटी जब मीरापुर थाने की टीम ने 23 जून की रात ब्रह्मपुरी गांव में कथित तौर पर जहरीली शराब की बिक्री करने वाले लोगों के घरों पर छापेमारी की थी.

उन्होंने कहा कि पुलिस की टीम ने कुछ घरों से जहरीली शराब बरामद की जिसे नष्ट कर दिया गया और टीम लौट आई.

मीणा ने कहा कि रात करीब डेढ़ बजे गांव के युवक गौतम उर्फ सेना (30 वर्ष) की मौत की सूचना मिली और आरोप लगाया गया है कि पुलिस के पीटने से उस व्यक्ति की मृत्यु हुई.

मृतक के परिजनों ने पूरी रात पुलिस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और आरोपी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी तथा मृतक के आश्रितों को मुआवजा दिए जाने की मांग की. पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने शनिवार सुबह मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा.

अपर पुलिस अधीक्षक अजय प्रताप ने बताया कि मृतक की पत्नी की शिकायत पर 10 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. इनमें से चार पुलिसकर्मी नामजद हैं, जबकि अन्य अज्ञात हैं.

उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जा रही है. उन्होंने बताया कि पुलिस की उपस्थिति में शनिवार शाम परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार कर दिया.

मालूम हो कि उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के छपरौली क्षेत्र के बाछौड़ गांव में एक ग्रामीण ने बीते तीन मई को पुलिस में तहरीर दी थी कि उनकी पुत्री को गांव का ही प्रिन्स नामक युवक लेकर फरार हो गया था. इस मामले में पुलिस लड़के के घर लगातार दबिश दे रही थी.

बीते 24 मई को पुलिस दबिश के दौरान लड़के की मां ने अपनी दो बेटियों के साथ कथित तौर पर जहर खा लिया था. इसके अगले दिन 25 मई को तड़के बड़ी बेटी स्वाति (19 वर्ष) की मौत हो गई थी.

परिजनों की तहरीर के आधार पर छपरौली थाने के दारोगा नरेश पाल समेत छह लोगों के खिलाफ उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज किया गया था.

इसके बाद 25 मई की देर रात अनुराधा (49 वर्ष) और उनकी छोटी बेटी प्रीति (17 वर्ष) की भी मेरठ के अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी.

बीते 14 मई को उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के सदर थाना क्षेत्र के एक गांव में पुलिस की दबिश के दौरान एक महिला की कथित तौर पर गोली लगने से मौत हो गई थी. इस मामले में 15 मई को सिद्धार्थ नगर कोतवाली के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था.

सात मई को प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के पचोखरा क्षेत्र में कथित रूप से पुलिस द्वारा हिंसात्मक रूप से धक्का दिए जाने से गिरी एक 60 वर्षीय एक बुजुर्ग महिला की मौत का मामला सामने आया था.

मृतक राधा देवी के चार बेटे पिछले महीने अपने रिश्तेदारों से मारपीट के आरोप में जेल गए थे और सात मई की शाम को ही जेल से छूटकर आए थे. पुलिस का दस्ता उनसे पूछताछ करने गया था, जब यह घटना हुई.

इससे पहले बीते एक मई को उत्तर प्रदेश में चंदौली जिले के सैयदराजा क्षेत्र में पुलिस की दबिश के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में एक युवती की मौत हो गई थी. इस मामले में निलंबित थानाध्यक्ष समेत छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था.

सैयदराजा थाना क्षेत्र के मनराजपुर गांव में पुलिस का एक दल एक बालू कारोबारी कन्हैया यादव को पकड़ने के लिए उसके घर पहुंचा था. यादव के खिलाफ गैर-जमानती वॉरंट जारी हुआ था.

पीड़ित परिवार का आरोप है कि इस दौरान एक पुलिसकर्मी ने कारोबारी की 24 साल की बेटी से बलात्कार किया तथा मारपीट और जोर-जबर्दस्ती के कारण उसकी मौत हो गई.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)