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पंजाब विधानसभा ने अग्निपथ सैन्य भर्ती योजना के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पारित किया

प्रस्ताव में कहा गया है कि पंजाब विधानसभा को दृढ़ता से लगता है कि जिस योजना में युवाओं को केवल चार साल की अवधि के लिए रोज़गार दिया जाएगा और केवल 25 प्रतिशत तक ही रखा जाएगा, वह न तो राष्ट्रीय सुरक्षा के सर्वोत्तम हित में है और न ही इस देश के युवाओं के हित में है.

भगवंत मान. (फोटो साभार: ट्विटर)

चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा ने केंद्र की अग्निपथ सैन्य भर्ती योजना के खिलाफ बृहस्पतिवार को एक प्रस्ताव पारित कर दिया. इस दौरान भारतीय जनता पार्टी के दो विधायकों अश्विनी शर्मा और जांगी लाल महाजन ने प्रस्ताव का विरोध किया.

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सदन में इस प्रस्ताव को पेश किया. प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए उन्होंने कहा कि वह जल्द ही अग्निपथ योजना के मुद्दे को प्रधानमंत्री तथा केंद्रीय गृह मंत्री के समक्ष उठाएंगे.

अग्निपथ योजना का विरोध करते हुए मान ने कहा कि यह योजना देश के युवाओं के विरुद्ध है.

विपक्ष के नेता और कांग्रेस विधायक प्रताप सिंह बाजवा ने मांग की कि अग्निपथ योजना वापस ले ली जाए.

अकाली दल के विधायक मनप्रीत सिंह अयाली ने भी प्रस्ताव का समर्थन किया और योजना को वापस लिए जाने की मांग की.

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्ताव में कहा गया है, ‘भारत सरकार द्वारा अग्निपथ योजना की एकतरफा घोषणा की, पंजाब सहित सभी राज्यों में व्यापक प्रतिक्रियाएं देखी गई हैं. यह योजना देश के युवाओं के खिलाफ है.’

इसमें कहा गया है कि, ‘इस योजना में सशस्त्र बलों के लंबे समय से चले आ रहे एस्प्रिट डे कॉर्प्स (esprit de corps) को कमजोर करने की प्रवृत्ति भी है. इस प्रस्ताव के माध्यम से यह सदन राज्य सरकार से इस मामले को केंद्र के समक्ष उठाने की सिफारिश करता है, ताकि अग्निपथ योजना को तत्काल वापस लिया जा सके.’

प्रस्ताव में कहा, ‘पंजाब विधानसभा को दृढ़ता से लगता है कि जिस योजना में युवाओं को केवल चार साल की अवधि के लिए रोजगार दिया जाएगा और केवल 25 प्रतिशत तक ही रखा जाएगा, वह न तो राष्ट्रीय सुरक्षा के सर्वोत्तम हित में है और न ही इस देश के युवाओं के हित में है.’

प्रस्ताव पढ़ते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘इस नीति से उन युवाओं में असंतोष पैदा होने की संभावना है, जो जीवन भर देश के सशस्त्र बलों की सेवा करना चाहते हैं.’

मान ने कहा, ‘इस बात पर प्रकाश डाला जाना चाहिए कि पंजाब के एक लाख से अधिक सैनिक देश के सशस्त्र बलों में सेवा करते हैं और उनमें से कई हर साल देश की सीमाओं पर अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान देते हैं.’

उन्होंने कहा, ‘पंजाब के युवा भारतीय सशस्त्र बलों में सेवा करना गर्व और सम्मान की बात मानते हैं और अपनी वीरता और साहस के लिए प्रसिद्ध हैं. इस (अग्निपथ) योजना ने पंजाब के कई युवाओं के सपनों को कुचल दिया है, जो नियमित सैनिकों के रूप में सशस्त्र बलों में शामिल होने के इच्छुक हैं.’

इससे पहले मान ने मंगलवार (28 जून) को विधानसभा में कहा था कि उनकी सरकार अग्निपथ योजना के खिलाफ एक प्रस्ताव लाएगी, जिसमें कहा गया था कि केंद्र सरकार की सैन्य भर्ती पहल भारतीय सेना के मूल ताने-बाने को नष्ट कर देगी.

इस दौरान सदन में विपक्ष के नेता और कांग्रेस विधायक प्रताप सिंह बाजवा ने मांग की कि अग्निपथ योजना प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया जाए. उन्होंने कहा, ‘ऐसा क्यों है कि भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार द्वारा शुरू की गई किसी भी नई योजना का विरोध किया जा रहा है?’

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, बाजवा ने कहा कि भारत का सामना अद्वितीय भौगोलिक चुनौतियों से है, क्योंकि यह परमाणु शक्ति संपन्न पाकिस्तान और चीन से घिरा हुआ है.

उन्होंने कहा, ‘हम इजराइल और अमेरिका की नकल नहीं कर सकते, क्योंकि उनकी हमारी जैसी शत्रुतापूर्ण सीमाएं नहीं हैं. यह दुखद है कि हमारे देश ने अनुबंध के आधार पर सैनिकों को रखने की योजना बनाई है. संविदा कर्मचारी शत्रुओं से नहीं लड़ सकते.’

बाजवा ने कहा कि अग्निपथ योजना को वापस लिया जाना चाहिए, क्योंकि आप चार साल में सैनिक नहीं बन सकते, जिसमें से 18 महीने प्रशिक्षण के लिए समर्पित हैं. उन्होंने कहा कि प्रस्ताव राज्यपाल के माध्यम से केंद्र को भेजा जाना चाहिए.

बाजवा ने मुख्यमंत्री से इस योजना को वापस लेने के लिए राज्य से एक संयुक्त दल के प्रतिनिधिमंडल को प्रधानमंत्री के पास ले जाने का भी आग्रह किया.

राज्य के कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा, ‘सैनिक सशस्त्र बलों की रीढ़ हैं. अग्निपथ योजना बलों की रीढ़ तोड़ देगी.’

इस प्रस्ताव का सदन में भाजपा के दो विधायकों अश्विनी शर्मा और जंगी लाल महाजन ने विरोध किया. शर्मा ने कहा, ‘हमें थल सेना, नौसेना और वायु सेना के तीन प्रमुखों के प्रमुखों पर विश्वास करना चाहिए जो इस योजना के साथ खड़े हैं.’

बता दें कि केंद्र सरकार ने दशकों पुरानी रक्षा भर्ती प्रक्रिया में आमूलचूल परिवर्तन करते हुए थलसेना, नौसेना और वायुसेना में सैनिकों की भर्ती संबंधी अग्निपथ नामक योजना की बीते 14 जून को घोषणा की थी, जिसके तहत सैनिकों की भर्ती सिर्फ चार साल की कम अवधि के लिए संविदा आधार पर की जाएगी.

भर्ती के नए प्रारूप की घोषणा के बाद देश के कई हिस्सों में हिंसक विरोध देखा गया था.

सैन्य भर्ती की नई योजना के तहत केवल चार साल के लिए 17.5 वर्ष से 21 वर्ष की आयु के युवाओं की भर्ती का प्रावधान है, जिनमें से 25 प्रतिशत को और 15 वर्षों के लिए सेवा में बनाए रखने का प्रावधान है. वर्ष 2022 के लिए ऊपरी आयु सीमा को बढ़ाकर 23 वर्ष कर दिया गया है.

योजना के तहत तीनों सेनाओं में इस साल करीब 46,000 सैनिक भर्ती किए जाएंगे. योजना के तहत 17.5 साल से 21 साल तक के युवाओं को चार साल के लिए सेना में भर्ती किया जाएगा और उनमें से 25 फीसदी सैनिकों को अगले 15 और साल के लिए सेना में रखा जाएगा.

तीनों सैन्य सेवाओं की तरफ से मंगलवार को कहा गया कि अग्निपथ योजना सैनिकों की भर्ती की मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं करती और उनकी युद्धक क्षमताओं और संचालनात्मक तैयारियों को प्रभावित नहीं करेगी.

अग्निपथ योजना के तहत रोजगार के पहले वर्ष में एक ‘अग्निवीर’ का मासिक वेतन 30,000 रुपये होगा, लेकिन हाथ में केवल 21,000 रुपये ही आएंगे. हर महीने 9,000 रुपये सरकार के एक कोष में जाएंगे, जिसमें सरकार भी अपनी ओर से समान राशि डालेगी.

इसके बाद दूसरे, तीसरे और चौथे वर्ष में मासिक वेतन 33,000 रुपये, 36,500 रुपये और 40,000 रुपये होगा. प्रत्येक ‘अग्निवीर’ को ‘सेवा निधि पैकेज’ के रूप में 11.71 लाख रुपये की राशि मिलेगी और इस पर आयकर से छूट मिलेगी.

अग्निपथ सैन्य भर्ती योजना के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों को विफल करने के प्रयास के तहत देश के सैन्य नेतृत्व ने बीते 19 जून को घोषणा की थी कि नई भर्ती योजना के लिए आवेदकों को इस प्रतिज्ञा के साथ एक शपथ-पत्र देना होगा कि उन्होंने किसी भी विरोध, आगजनी या आंदोलन में भाग नहीं लिया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)