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राजनीतिक अवसरवाद के लिए लोगों को बांटा जा रहा है: अमर्त्य सेन

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने इस बात पर भी अफ़सोस जताया कि राजनीतिक कारणों से लोगों को क़ैद करने की औपनिवेशिक प्रथा भारत को आज़ादी मिलने के दशकों बाद भी जारी है. उन्होंने कहा कि राजनीतिक अवसरवाद के कारण हिंदुओं और मुसलमानों के सह-अस्तित्व में दरार पैदा की जा रही है.

नोबेल विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन. (फोटो साभार: विकीमीडिया कॉमन्स/CC-BY-SA-2.0)

कोलकाता: नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने शनिवार को कहा कि देश के लोगों को ‘राजनीतिक अवसरवाद’ के लिए बांटा जा रहा है.

सेन ने इस बात पर भी अफसोस जताया कि राजनीतिक कारणों से लोगों को कैद करने की औपनिवेशिक प्रथा भारत को आजादी मिलने के दशकों बाद भी जारी है.

उन्होंने ‘आनंदबाजार पत्रिका’ के शताब्दी समारोह को डिजिटल माध्यम से संबोधित करते हुए कहा, ‘भारतीयों को बांटने की कोशिश हो रही है. राजनीतिक अवसरवाद के कारण हिंदुओं और मुसलमानों के सह-अस्तित्व में दरार पैदा की जा रही है.’

इस दैनिक अखबार का पहला संस्करण 13 मार्च, 1922 को प्रकाशित हुआ था. प्रफुल्ल कुमार सरकार इसके संस्थापक-संपादक थे.

88 वर्षीय सेन ने कहा, ‘उस समय (1922) देश में कई लोगों को राजनीतिक कारणों से जेल में डाल दिया गया था. मैं तब बहुत छोटा था और अक्सर सवाल करता था कि क्या बिना कोई अपराध किए लोगों को जेल भेजने की यह प्रथा कभी बंद होगी.’

उन्होंने कहा, ‘इसके बाद भारत आजाद हो गया, लेकिन यह प्रथा अभी भी जारी है.’

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत ने जहां कई मोर्चों पर प्रगति की है, वहीं गरीबी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं जैसे मुद्दे बने हुए हैं.

उन्होंने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि न्याय के रास्ते पर चलने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए.

इस महीने की शुरुआत में अमर्त्य सेन ने भारत की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त की थी और कहा था कि लोगों को एकता बनाए रखने की दिशा में काम करना चाहिए.

नोबेल पुरस्कार विजेता ने कोलकाता में साल्ट लेक में अमर्त्य रिसर्च सेंटर के उद्घाटन के अवसर पर कहा था, मुझे लगता है कि अगर कोई मुझसे पूछे कि क्या मुझे किसी चीज से डर लगता है, तो मैं ‘हां’ कहूंगा. अब डरने की एक वजह है. देश में मौजूदा स्थिति डर का कारण बन गई है.’

सेन ने देश की परंपराओं के अनुरूप एकजुट रहने की आवश्यकता पर भी बल दिया था. उन्होंने कहा, ‘मैं चाहता हूं कि देश एक हो. मैं उस देश में विभाजन नहीं चाहता जो ऐतिहासिक रूप से उदार था. हमें एक साथ काम करना होगा.’

उन्होंने कहा था कि भारत केवल हिंदुओं या मुसलमानों का नहीं हो सकता. उन्होंने देश की परंपराओं के आधार पर एकजुट रहने की आवश्यकता पर जोर दिया.

सेन ने कहा था, ‘भारत केवल हिंदुओं का देश नहीं हो सकता. साथ ही अकेले मुसलमान भारत का निर्माण नहीं कर सकते. हर किसी को एक साथ मिलकर काम करना होगा.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)