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माकपा कार्यकर्ता हत्याकांड: केरल हाईकोर्ट ने 13 आरएसएस कार्यकर्ताओं को बरी किया

16 दिसंबर 2016 को केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में अतिरिक्त सत्र अदालत ने आरएसएस के 13 कार्यकर्ताओं को एक अप्रैल 2008 को माकपा कार्यकर्ता वीवी विष्णु की हत्या के संबंध में उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई थी. केरल हाईकोर्ट ने कहा कि जिस तरीके से अदालत के समक्ष घटनाक्रम पेश किए गए, उससे एक मनगढ़ंत कहानी को परिभाषित करने के लिए गवाहों को सिखा-पढ़ा तथा सबूत एकत्रित करने की सोची-समझी कोशिश की बू आती है.

केरल हाईकोर्ट. (फोटो साभार: विकिमीडिया कॉमंस)

कोच्चि: केरल हाईकोर्ट ने 2008 में तिरुवनंतपुरम में माकपा के एक कार्यकर्ता की हत्या के मामले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 13 कार्यकर्ताओं को बरी करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ सबूत पेश करने में नाकाम रहा.

जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टि सी. जयचंद्रन की पीठ ने उन आरएसएस कार्यकर्ताओं की अपीलों को स्वीकार कर लिया, जिन्हें पहले अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने दोषी ठहराया था.

पीठ ने मंगलवार (12 जुलाई) देर शाम दिए आदेश में कहा कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता साजिश, द्वेष और छल से पनप रही है जो अक्सर नफरत फैलाती है, जिसका नतीजा बिना सोचे-समझे खूनखराबे के रूप में सामने आ रहा है.

फैसला सुनाते हुए पीठ ने मामले की घटनाओं के क्रम को अदालत के सामने पेश करने के तरीके के लिए अभियोजन पक्ष की आलोचना की.

उसने कहा, ‘जिस तरीके से अदालत के समक्ष घटनाक्रम पेश किए गए, उससे एक मनगढ़ंत कहानी को परिभाषित करने के लिए गवाहों को सिखा-पढ़ा तथा सबूत एकत्रित करने की सोची-समझी कोशिश की बू आती है. हम आरोपियों को उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों से बरी करते हैं, अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ अपराधजन्य परिस्थितियों को साबित करने में नाकाम रहा है.’

गौरतलब है कि 16 दिसंबर 2016 को तिरुवनंतपुरम में अतिरिक्त सत्र अदालत ने आरएसएस के 13 कार्यकर्ताओं को एक अप्रैल 2008 को माकपा कार्यकर्ता वीवी विष्णु की हत्या के संबंध में उम्रकैद की सजा सुनाई थी.

मामले में अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया था कि आरएसएस कार्यकर्ताओं ने 2008 में तिरुवनंतपुरम पासपोर्ट कार्यालय के बाहर विष्णु की हत्या कर दी थी और यह अपराध आरएसएस के एक समर्पित कैडर की साजिश का हिस्सा था.

लाइव लॉ की एक रिपोर्ट के अनुसार, घटना के बाद आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 120बी (आपराधिक साजिश), 143 (गैरकानूनी सभा), 147 (दंगा), 148 (घातक हथियार से लैस), 302 (हत्या), धारा 149 (गैर-कानूनी सभा का प्रत्येक सदस्य समान लक्ष्य के अभियोजन में किए गए अपराध का दोषी) के तहत केस दर्ज किया गया था.

सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने तर्क दिया था कि मामले की जांच शुरू से ही ‘दागी’ थी और आरोप लगाया था कि सत्तारूढ़ माकपा के इशारे पर मामले को ‘इंजीनियर’ किया गया था.

न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, दोषियों में कडकमपल्ली के शिवलाल, वंचियूर के संतोष, कडकमपल्ली के सतीश कुमार, वट्टियूरकावु के सतीश, उल्लूर के सुभाष कुमार, पलथरा के बीजू कुमार, मनाकौड के रंजीत कुमार, उलियाजथुरा के बोस, हरिलाल, मनोज और बालू महेंद्रन, कडकमपल्ली के बाबिन और उल्लूर के विनोद कुमार शामिल थे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)