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जम्मू कश्मीर: हिरासत में मौत मामले में क्राइम ब्रांच को पुलिस पर केस दर्ज करने का निर्देश

जम्मू कश्मीर पुलिस ने बीते 9 जुलाई को श्रीनगर के नाटीपोरा इलाके में रहने वाले 21 वर्षीय युवक मुस्लिम मुनीर लोन को चोरी के एक मामले में हिरासत में लिया था. आरोप है कि इसके बाद पुलिसकर्मियों ने बेहोशी की हालत में उन्हें वापस उनके घर पहुंचा दिया था. फ़िर परिजन उन्हें अस्पताल लेकर गए थे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था.

मुस्लिम मुनीर लोन. (फोटो: जहांगीर अली)

श्रीनगर: जम्मू कश्मीर की एक अदालत ने शुक्रवार को अपराध शाखा (Crime Branch) को निर्देश दिया कि श्रीनगर के नाटीपोरा इलाके में कथित तौर पर हिरासत में एक युवक की मौत की जांच की जाए और इस संबंध में पुलिस के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की जाए.

पिछले सप्ताह चोरी के एक मामले में 21 वर्षीय युवक मुस्लिम मुनीर लोन को थाने में बुलाया गया था और कथित तौर पर हिरासत में उनकी मौत हो गई थी. मृतक की मां शफीका की याचिका पर सुनवाई करने के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ने यह निर्देश दिया है.

अदालत ने अपने आदेश में कहा, ‘क्राइम ब्रांच थाना प्रभारी को निर्देश दिया जाता है कि इस मामले में आरोपी संख्या दो अब्दुल रशीद (पुलिस विभाग में मुंशी) और नौगाम थाना के अन्य पुलिसकर्मियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की जाए.’

अदालत ने क्राइम ब्रांच से यह भी कहा कि दोषियों पर मामला दर्ज करने के लिए मामले की जांच एक सक्षम पुलिस अधिकारी से करवाई जाए.

मृतक के परिवार ने पुलिस पर हिरासत में हत्या का आरोप लगाया है. हालांकि, जम्मू कश्मीर पुलिस ने इन आरोपों से इनकार करते हुए दावा किया था कि मुनीर लोन को पुलिस हिरासत में प्रताड़ित नहीं किया गया था. वह नशे (ड्रग्स) का आदी था, जिसके चलते संभवत: उसकी मौत हो गई.

मालूम हो कि जम्मू कश्मीर पुलिस ने बीते 9 जुलाई को 21 वर्षीय युवक मुस्लिम मुनीर लोन को चोरी के एक मामले (एफआईआर संख्या 95/2022) में उसकी कथित संलिप्तता को लेकर हिरासत में लिया था. उस दिन सुबह 9:30 बजे श्रीनगर के नौगाम पुलिस थाने से एक टीम नाटीपोरा इलाके में उनके घर आई थी.

मुनीर की मां शफीका ने बताया था कि उसी दिन दोपहर में वही पुलिस टीम फिर से उनके घर आई. उनके अनुसार, केवल पुरुष पुलिसकर्मी एक निजी कार में आए थे. उन्होंने बताया था, ‘पुलिसकर्मियों ने मुझसे कहा कि मुझे थाने आना होगा, क्योंकि मुनीर ने होश खो दिया है. यह सुनकर मैं डर गई.’

शफीका पुलिस के साथ उसी कार में चल दीं. 15 मिनट बाद वह कार एक जगह पर रुकी.

शफीका के अनुसार, ‘पुलिस ने मुझे दूसरे वाहन में शिफ्ट होने के लिए कहा, जो कि सड़क के एक किनारे खड़ा था. जब मैं उस कार में घुसी तो देखा कि मु​नीर बीच की सीट पर लेटा हुआ है. वह बात नहीं कर पा रहा था. उन्होंने मुझसे कुछ कागजों पर हस्ताक्षर कराए और मुझे 400 रुपये दिए.’

आरोप है कि अस्पताल या थाने जाने के बजाय पुलिसकर्मी महिला और उनके बेटे को वापस उनके घर ले गए. पुलिसवालों के जाने के बाद भी मुनीर की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ. परिजन उन्हें अस्पताल लेकर गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

मुनीर परिवार में इकलौते कमाने वाले थे. शफीका के एक और बेटे मोमिन मुनीर लोन हैं, जो बेरोजगार हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)