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बांग्लादेश: फेसबुक पोस्ट में इस्लाम के कथित अपमान को लेकर हिंदू समुदाय के मंदिर और घरों पर हमला

बांग्लादेश पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि एक युवक ने फेसबुक पर कुछ आपत्तिजनक पोस्ट किया था, जिससे मुस्लिम समुदाय के लोग आक्रोशित हो गए. इसके बाद नारेल ज़िले के सहपारा गांव में कई घरों में तोड़फोड़ की गई, एक मकान में आग लगा दिया गया और गांव के एक मंदिर पर ईंटें भी फेंकीं गईं.

बांग्लादेश का राष्ट्रीय ध्वज. (प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

ढाका: फेसबुक पर किए गए एक पोस्ट में इस्लाम के कथित अपमान को लेकर बांग्लादेश के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में हिंदू समुदाय के एक मंदिर, दुकानों और कई घरों में तोड़फोड़ की गई. रविवार को मीडिया में आईं खबरों में यह जानकारी दी गई है.

ऑनलाइन समाचार पत्र बीडीन्यूज24.कॉम (bdnews24.com) ने स्थानीय थाने के निरीक्षक हरन चंद्र पॉल के हवाले से खबर दी कि शुक्रवार (15 जुलाई) शाम को नारेल जिले के सहपारा गांव में अज्ञात लोगों ने कई घरों में तोड़फोड़ की और एक मकान को आग लगा दी. हमलावरों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने हवा में गोलियां चलाईं.

उन्होंने कहा कि हमलावरों ने शाम करीब साढ़े सात बजे हमले के दौरान गांव के एक मंदिर पर ईंट भी फेंकीं. उन्होंने मंदिर के अंदर के फर्नीचर को भी तोड़ दिया.

‘द डेली स्टार’ समाचार पत्र ने अपनी खबर में बताया कि कई दुकानों में भी तोड़फोड़ की गई.

हरन ने कहा कि एक युवक ने फेसबुक पर कुछ आपत्तिजनक पोस्ट किया था, जिससे मुस्लिम समुदाय के लोग आक्रोशित हो गए. पुलिस ने युवक की तलाश की, लेकिन जब वह नहीं मिला तो उसके पिता को थाने ले गई.

उन्होंने कहा कि फेसबुक पोस्ट को लेकर शुक्रवार की नमाज के बाद तनाव बढ़ गया और मुस्लिम समुदाय लोगों के एक समूह ने दोपहर में विरोध प्रदर्शन किया. बाद में उन्होंने घरों पर हमला कर दिया. अभी किसी हमलावर को गिरफ्तार नहीं किया गया है.

पुलिस निरीक्षक ने कहा कि रात में स्थिति सामान्य रही.

द टेलीग्राफ के मुताबिक, इस बीच पुलिस ने फेसबुक पोस्ट को लेकर एक 20 वर्षीय कॉलेज छात्र को गिरफ्तार किया है. लोहागरा पुलिस स्टेशन के प्रमुख शेख अबू हेना मिलन ने बताया कि छात्र की पहचान आकाश साहा के रूप में हुई है.

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि दिघलिया गांव के सलाहुद्दीन कोच्चि ने 15 जुलाई को आकाश पर इस्लाम को कमतर आंकने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया था. इस मामले में आकाश को कोर्ट में पेश किया गया था.

वहीं, नारेल के पुलिस अधीक्षक प्रबीर कुमार रॉय ने कहा कि कानून प्रवर्तक एजेंसियां स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए काम कर रही हैं.

रॉय ने कहा, ‘हम घटना की जांच कर रहे हैं. हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल स्थिति सामान्य है.’

‘द डेली स्टार’ समाचार पत्र की खबर में बताया गया है कि बाद में हिंसा न हो, इसके लिए इलाके में पुलिस बलों को तैनात किया गया है.

अखबार ने दीपाली रानी साहा नामक स्थानीय निवासी के हवाले से कहा, ‘एक समूह ने हमारा सारा कीमती सामान लूट लिया. इसके बाद दूसरा समूह आया और उसने हमारा दरवाजा खुला पाया. चूंकि लूटने के लिए कुछ नहीं बचा था, इसलिए उन्होंने हमारे घर में आग लगा दी.’

दीपाली का घर उन घरों और दर्जनों दुकानों में शामिल है, जिनमें सहपारा गांव में तोड़फोड़ की गई या जला दिया गया.

दिघलिया संघ परिषद की एक पूर्व महिला सदस्य ने कहा कि हमले के बाद ज्यादातर लोग गांव छोड़कर चले गए हैं. उन्होंने कहा, ‘लगभग सभी घरों में ताला लगा हुआ है.’

अखबार ने गांव के राधा-गोविंद मंदिर के अध्यक्ष शिबनाथ साहा (65) के हवाले से कहा, ‘पुलिस गांव में पहरा दे रही है, लेकिन हम उन पर भरोसा नहीं कर सकते.’

‘बीडीन्यूज24’ ने अपनी खबर में कहा कि मुस्लिम बहुल बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़ रहे हैं और उनमें से कई हमले अफवाहों या सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट किए जाने के बाद हुए हैं.

पिछले साल, बांग्लादेश में कुछ हिंदू मंदिरों में दुर्गा पूजा समारोह के दौरान अज्ञात मुस्लिम कट्टरपंथियों ने तोड़फोड़ की थी, जिसके बाद सरकार को 22 जिलों में अर्धसैनिक बलों को तैनात करना पड़ा था. इस दौरान हुए दंगों में चार लोग मारे गए थे और कई अन्य घायल हो गए थे.

कानूनी अधिकार समूह ऐन ओ. सलीश केंद्र (Ain O Salish Kendra) की एक रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2013 से सितंबर 2021 के बीच बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर 3,679 हमले किए गए.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)