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यूपी: लखनऊ के लुलु मॉल में अनधिकृत रूप से नमाज़ पढ़ने के चार आरोपी गिरफ़्तार किए गए

बीते 13 जुलाई को लखनऊ स्थित लुलु मॉल में नमाज़ पढ़ने का वीडियो वायरल हुआ था, जिसके बाद ये गिरफ़्तारियां हुई हैं. गिरफ़्तार चारों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. बीते 15 जुलाई को यहां हनुमान चालीसा पढ़ने की कोशिश करने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ़्तार किया गया था. दो और लोगों को पूजा करने और एक व्यक्ति को नमाज़ पढ़ने के लिए गिरफ़्तार किया गया था.

लखनऊ स्थित लुलु मॉल. (फोटो: पीटीआई)

लखनऊ: उत्तर प्रदेश पुलिस ने राजधानी लखनऊ स्थित लुलु मॉल में अनधिकृत रूप से नमाज पढ़ने के चार आरोपियों को मंगलवार सुबह गिरफ्तार किया, जबकि चार अन्य की तलाश की जा रही है.

गिरफ्तारी के बाद मॉल में घुसने का प्रयास कर रहे अयोध्या के महंत परमहंस को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. इस घटना से संबंधित वायरल वीडियो में महंत यह कहते सुने जा सकते कि उन्हें मॉल में जाने से इसलिए रोका जा रहा हैं, क्योंकि वह भगवा वस्त्र पहने हुए हैं.

पुलिस के अनुसार, अनधिकृत रूप से नमाज पढ़ने वाले आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और उनमें से मॉल का कोई कर्मचारी नहीं हैं.

पुलिस आयुक्त डीके ठाकुर ने मंगलवार को कहा, ‘मॉल में अनधिकृत रूप से नमाज पढ़ने को लेकर चार लोगों को मंगलवार को गिरफ्तार किया गया. उनकी पहचान मोहम्मद रेहान और आतिफ खान, मोहम्मद लोकमान और मोहम्मद नोमान के रूप में की गई है. वे सभी लखनऊ के रहने वाले हैं.’

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, चारों लखीमपुर खीरी जिले के मोहम्मदी, लहरपुर और सीतापुर के रहने वाले हैं.

डीके ठाकुर ने कहा कि इन लोगों ने 12 जुलाई को एक नाबालिग और तीन महिलाओं के साथ मॉल का दौरा किया और परिसर में नमाज अदा की. उन्होंने कहा कि इसमें शामिल सभी आठ लोगों की पहचान कर ली गई है और तदनुसार कार्रवाई की जा रही है.

उन्होंने बताया कि चारों आरोपियों को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. उन्होंने बताया कि चार अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है.

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार चारों आरोपियों को अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (एसीजेएम) अंबरीश कुमार श्रीवास्तव की अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में एक अगस्त तक के लिए जेल भेज दिया गया.

रिपोर्ट के अनुसार, 14 जुलाई को मॉल प्रबंधन, जिसकी लोगों को नमाज अदा करने की अनुमति देने के लिए आलोचना की गई थी, ने अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153ए (विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और 295ए (धार्मिक भावनाओं को आहत करने के इरादे से जान-बूझकर किया गया कार्य) के तहत एफआईआर) दर्ज की थी.

वीडियो क्लिप के आधार पर दक्षिणपंथी हिंदू समूह अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने लोगों द्वारा मॉल के अंदर नमाज अदा करने पर आपत्ति जताते हुए धिकारियों से वहां हनुमान चालीसा पढ़ने की अनुमति मांगी थी, जिसे अस्वीकार कर दिया गया था.

15 जुलाई को सरोज नाथ योगी, कृष्ण कुमार पाठक और गौरव गोस्वामी के रूप में पहचाने गए तीन लोगों को मॉल के अंदर हनुमान चालीसा पढ़ने की कोशिश करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.

उसी दिन, चौथे व्यक्ति अरशद अली को मॉल के अंदर नमाज पढ़ने की कोशिश करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. उनके खिलाफ उपद्रव करने के लिए मामला दर्ज किया गया था और एक निवारक उपाय के रूप में गिरफ्तार किया गया था.

16 जुलाई को मॉल की पूर्वी सीमा पर पूजा करने की कोशिश कर रहे और नारे लगाते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था. 17 जुलाई को एक हिंदू संगठन से जुड़े दो दर्जन से अधिक लोगों को मॉल के बाहर विरोध प्रदर्शन करने से रोका गया था.

पुलिस ने कहा कि मॉल प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले संगठन के पांच कार्यकर्ताओं के वाहनों को रोक दिया गया और पुलिस ने उन्हें वापस जाने के लिए मजबूर कर दिया.

इस बीच, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार रात कहा, ‘लखनऊ प्रशासन को बहुत गंभीरता से इसे लेना चाहिए और इस प्रकार की किसी भी शरारत को स्वीकार नहीं करना चाहिए. उसे ऐसे तत्वों से सख्ती से निपटना चाहिए जो अनावश्यक मामलों को बढ़ावा देकर माहौल खराब करने का प्रयास करते हैं.’

आदित्यनाथ ने प्रशासन को माहौल खराब करने पर तुले हुए तत्वों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करने का निर्देश दिया और जोर दिया कि मॉल के कामकाज के खिलाफ कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए.

सरकारी अधिकारियों की एक बैठक में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को प्रार्थना करने के संबंध में प्रशासन द्वारा निर्धारित मानदंडों का पालन करना चाहिए.

घटनाक्रम से वाकिफ अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने अनावश्यक मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन कर सड़कें बाधित करने पर भी नाराजगी जताई.

मुख्यमंत्री ने बैठक में भाग लेने वाले सरकारी अधिकारियों के अनुसार उन्होंने कहा, ‘व्यावसायिक गतिविधियों को अंजाम देने वाले लुलु मॉल को राजनीतिक केंद्र में बदल दिया गया है. कुछ खास लोग बेवजह बयानबाजी कर रहे हैं. मॉल में आने वाले लोगों की आवाजाही में बाधा डालने के लिए प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं. मॉल में अशांति पैदा करने की कोशिश कर रहे उपद्रवियों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए.’

मंगलवार को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा.

यादव ने अपने ट्वीट में कहा, ‘अब तो मान्यवर (योगी) स्वयं कह रहे हैं कि मॉल पर कोई राजनीति कर रहा है. जनता कह रही है जब लगाम आपके हाथ में है तो और कौन इस सत्ता का सूत्रधार हो सकता है या फिर इस सत्ता के धागे किसी और के हाथ में हैं.’

यादव ने महंत परमहंस का एक वीडियो भी ट्वीट में साझा किया है, जिसमें वह पुलिस से झड़प करते दिखाई दे रहे हैं.

गौरतलब है कि बुधवार यानी 13 जुलाई को लुलु मॉल में नमाज पढ़ने का वीडियो वायरल हुआ था. पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों पर शिकंजा कसा है.

इसी मामले पर दक्षिणपंथी संगठन अखिल भारतीय हिंदू महासभा के कुछ सदस्यों ने बृहस्पतिवार 14 जुलाई को लुलु मॉल के गेट पर धरना-प्रदर्शन किया था.

खुद को महासभा का राष्ट्रीय प्रवक्ता बताने वाले शिशिर चतुर्वेदी ने आरोप लगाया था कि अगर एक समुदाय विशेष के लोगों को मॉल के अंदर नमाज पढ़ने की अनुमति दी जा रही है, तब मॉल के अधिकारियों को हिंदुओं तथा अन्य धर्मावलंबियों को भी मॉल के अंदर प्रार्थना करने की इजाजत देनी चाहिए.

शिशिर चतुर्वेदी और संगठन के अन्य लोगों ने थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई थी.

शिकायत में कहा गया, ‘मॉल के अंदर नमाज पढ़ी गई, जो कि सार्वजनिक स्थलों पर नमाज पढ़ने की इजाजत नहीं होने संबंधी नीति के खिलाफ है. सोशल मीडिया पर प्रसारित खबरों के मुताबिक लुलु मॉल में पुरुष कर्मचारियों में 70 प्रतिशत मुस्लिम हैं और 30 प्रतिशत महिला कर्मचारी हिंदू समुदाय से है. ऐसा करके लुलु मॉल प्रबंधन लव जिहाद को बढ़ावा दे रहा है.’

इसके बाद लुलु मॉल के महाप्रबंधक समीर वर्मा ने एक वीडियो जारी कर कहा था, ‘लुलु मॉल सभी धर्मों का आदर करता है. मॉल के अंदर किसी भी तरह का धार्मिक कार्य या इबादत की इजाजत नहीं है. हम अपने स्टाफ तथा सुरक्षाकर्मियों को ऐसी गतिविधियों पर नजर रखने का प्रशिक्षण देते हैं.’

मॉल प्रबंधन ने बीते 18 जुलाई को एक बयान जारी कर कहा था, ‘हमारे यहां जितने भी कर्मचारी हैं, उनमें स्थानीय उत्तर प्रदेश एवं देश के विभिन्न हिस्सों के लोग हैं. उनमें से 80 प्रतिशत से अधिक हिंदू तथा बाकी मुस्लिम, ईसाई एवं अन्य समुदायों से हैं.’

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े मॉल कहे जा रहे लुलु मॉल का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 10 जुलाई को उद्घाटन किया था. इस दौरान राज्य सरकार के कई मंत्री तथा लुलु समूह के अध्यक्ष युसूफ अली भी मौजूद थे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)