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असम: हाईकोर्ट ने उग्रवादी संगठन उल्फा के समर्थन में कविता लिखने वाली छात्रा को ज़मानत दी

असम में जोरहाट के डीसीबी कॉलेज में बीएसएस गणित की दूसरे वर्ष की छात्रा को उग्रवादी संगठन उल्फा (आई) के समर्थन में सोशल मीडिया पर कथित रूप से कविता लिखने को लेकर बीते 18 मई को गिरफ़्तार किया गया था. उसके बाद से  वह गोलाघाट केंद्रीय कारागार में बंद थीं.

(फोटो: पीटीआई)

गुवाहाटी: गुवाहाटी हाईकोर्ट ने उग्रवादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा आई) के समर्थन में सोशल मीडिया पर कथित रूप से कविता लिखने को लेकर दो महीने पहले गिरफ्तार की गई एक युवती को बृहस्पतिवार को जमानत दे दी.

जस्टिस अजीत बड़ठाकुर ने 19 वर्षीय वर्षाश्री बुरागोहेन को जमानत दी. सरकारी वकील ने उसकी जमानत का विरोध नहीं किया. वह गोलाघाट केंद्रीय कारागार में बंद थीं.

जस्टिस बड़ठाकुर ने निर्देश दिया कि उसे 25000 रुपये के मुचलके पर रिहा किया जाए.

वर्षाश्री को सोशल मीडिया पर ‘अकोउ कोरिम राष्ट्रद्रोह’ (राष्ट्र के विरुद्ध फिर बगावत करूंगी) शीर्षक वाली कविता कथित रूप से लिखने पर गोलाघाट के उरियामघाट से 18 मई को गिरफ्तार किया गया था.

उनके वकील ऋतुपल्लव सैकिया ने कहा कि जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उनकी मुवक्किल को शुक्रवार को जेल से रिहा कर दिया गया.

जोरहाट के डीसीबी कॉलेज में बीएसएस गणित की दूसरे वर्ष की छात्रा ने गोलाघाट की अदालत से यह भी अनुरोध किया था कि उन्हें अपनी सेमेस्टर परीक्षा में बैठने दिया जाए, जो 16 जुलाई से शुरू हुई है. उनका यह अनुरोध स्वीकार करते हुए कहा था कि वह पुलिस सुरक्षा में परीक्षा दे सकती हैं.

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, उस फेसबुक पोस्ट के लिए उन पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोप लगाया गया था.

इससे पहले, पुलिस महानिदेशक और मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा दोनों ने कहा था कि अगर वर्षाश्री बुरागोहेन के माता-पिता आश्वस्त कर सकते हैं कि उनकी बेटी उल्फा-आई में शामिल नहीं होगी या राष्ट्र-विरोधी बातें नहीं लिखेगी, तो उन्हें रिहा कर दिया जाएगा.

छात्रा के परिवार ने पत्रकारों से कहा कि बुरागोहेन कभी भी ऐसी किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं होगी. बुरागोहेन ने पहले गोलाघाट में जिला एवं सत्र न्यायालय में जमानत अर्जी दी थी, जिसे खारिज कर दिया गया था.

14 जून को छात्रा के एक आवेदन के आधार पर गोलाघाट में जिला और सत्र अदालत ने जेल अधिकारियों को यह प्रबंधन करने के लिए निर्देश जारी किए थे कि वह 16 जुलाई से शुरू हुई अपनी परीक्षा में शामिल हो सकें.

जबकि इस मामले पर पहले ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया. यह मामला तब सामने आया जब छात्र के माता-पिता ने मुख्यमंत्री और पुलिस से उसे रिहा करने की अपील की, ताकि वह अपने सेमेस्टर की परीक्षा दे सकें.

उसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर राज्य सरकार और पुलिस पर ‘कविता लिखने के लिए’ छात्रा को गिरफ्तार करने का आरोप लगाते हुए पोस्टों की बाढ़ आ गई.

हालांकि, पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी का सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई उसकी कविताओं से कोई लेना-देना नहीं है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)