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केंद्र के आंकड़े बताते हैं कि सरकारी नौकरी पाने वाले पूर्व सैनिकों की संख्या 2015 से लगातार घटी है

लोकसभा में रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट द्वारा दिए गए लिखित जवाब में साल 2014 से 2021 तक पूर्व सैनिकों की भर्ती का ब्योरा दिया गया है. इसके अनुसार, सरकारी नौकरियों में पूर्व सैनिकों की वार्षिक संख्या में पिछले सात वर्षों में भारी गिरावट देखी गई है, जो 2015 में 10,982 से घटकर 2021 तक 2,983 हो गई है.

(प्रतीकात्मक तस्वीर: पीटीआई)

नई दिल्ली: सरकारी नौकरियों में लिए जाने वाले पूर्व सैनिकों की वार्षिक संख्या में पिछले सात वर्षों में भारी गिरावट देखी गई है, जो 2015 में 10,982 से घटकर 2021 में 2,983 रह गई है. केंद्र की मोदी सरकार द्वारा शुक्रवार 22 जुलाई को लोकसभा में साझा किए गए आंकड़ों से ये जानकारी सामने आई है.

लोकसभा में रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट द्वारा दिए गए लिखित उत्तर में 2014 से 2021 तक पूर्व सैनिकों की भर्ती का विवरण है.

2014 में सरकारी नौकरियों में केवल 2,322 पूर्व सैनिकों की भर्ती की गई थी. 2015 में यह संख्या बढ़कर 10,982 हो गई थी. हालांकि आगे के वर्षों में साल 2020 तक इनकी संख्या में गिरावट देखने को मिली. साल 2016 में सरकारी नौकरियों में भर्ती होने वाले सैनिकों की संख्या 9,086, 2017 में 5,638, 2018 में 4,175, 2019 में 2,968 और साल 2020 में 2,584 थी. हालांकि 2021 में इस संख्या में थोड़ी सी बढ़ोतरी देखी गई, जो 2,983 थी.

सरकार द्वारा पूर्व सैनिकों (ईएसएम) की सरकारी नौकरियों में भर्ती का ब्योरा. (स्रोतः लोकसभा)

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने 14 विपक्षी सदस्यों द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में यह आंकड़ा साझा किया. इनमें से 11 नेता डीन कुरियाकोस, एंटो एंटनी, अदूर प्रकाश, बेनी बेहानन, डॉ. अमर सिंह, डॉ. ए. चेल्लाकुमार, उत्तम कुमार रेड्डी नलमाडा, बालूभाऊ उर्फ सुरेश नारायण धनोरकर, मनिकम टैगोर बी., मोहम्मद जावेद और कुंभकुडी सुधाकरन कांग्रेस से थे. इसके अलावा राकांपा (मोहम्मद फैजल पीपी), सीपीआई (एम. सेल्वराज) और सीपीएम (एस. वेंकटेशन) से एक-एक नेता शामिल थे.

इन सांसदों ने 2014 से 2022 तक सरकारी नौकरियों में भर्ती हुए पूर्व सैनिकों की कुल संख्या का विवरण मांगा था. साथ ही वे विभिन्न सरकारी विभागों में पूर्व सैनिकों की भर्ती के लिए आरक्षण कोटा के बारे में भी जानना चाहते थे.

उत्तर के अनुसार, 30 जून, 2021 तक केंद्रीय सिविल सेवा और पदों (CCS&P) में ग्रुप-सी के तहत भूतपूर्व सैनिकों का प्रतिनिधित्व 1.39 प्रतिशत और ग्रुप डी में 2.77 प्रतिशत था.

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) में भूतपूर्व सैनिकों का प्रतिनिधित्व समूह ए में 2.2 प्रतिशत, समूह बी में 0.87 प्रतिशत और समूह सी में 0.47 प्रतिशत था.

केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (सीपीएसयू) में उनका प्रतिनिधित्व समूह सी में 1.14 प्रतिशत और समूह डी में 0.37 प्रतिशत था और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) में उनका प्रतिनिधित्व समूह सी में 9.10 प्रतिशत और समूह डी में 21.34 प्रतिशत था.

सरकार की ओर से दिए गए जवाब से पता चलता है कि इन विभागों में सरकारी नौकरियों में पूर्व सैनिकों का प्रतिनिधित्व उनको मिलने वाले आरक्षण से कम था.

भूतपूर्व सैनिकों को केंद्र सरकार के मंत्रालयों/विभागों (CCS&P) और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) में ग्रुप सी पदों पर सीधी भर्ती में 10 फीसदी और ग्रुप डी पदों में 20 फीसदी आरक्षण है.

केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में उनका कोटा और भी अधिक है, क्योंकि ग्रुप-सी पदों में सभी सीधी भर्ती का 14.5 प्रतिशत और ग्रुप-डी में 24.5 प्रतिशत भूतपूर्व सैनिकों के लिए आरक्षित है.

एक अन्य प्रश्न के जवाब में रक्षा राज्य मंत्री भट्ट ने लोकसभा को सूचित किया कि सेना में 1,35,850 से अधिक पद खाली पड़े हैं. भारतीय सेना में 1,16,464 (अधिकारी 7,308, एमएनएस अधिकारी 471 और जेसीओ/ओआर 1,08,685); भारतीय नौसेना में 13, 597 और भारतीय वायुसेना में 5,789 (अधिकारी 572 और एयरमैन 5,217) पद खाली पड़े हैं.

भट्ट ने कहा, ‘सरकार ने इस कमी को पूरा करने के लिए कई उपाय किए हैं. इनमें अन्य बातों के साथ-साथ करिअर मेलों और प्रदर्शनियों में भागीदारी और एक चुनौतीपूर्ण और संतोषजनक करिअर अपनाने के लाभों के बारे में युवाओं में जागरूकता पैदा करने के लिए प्रचार अभियान शामिल हैं.’

उन्होंने आगे कहा, ‘इसके अलावा सरकार ने सशस्त्र बलों में नौकरी को आकर्षक बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिसमें पदोन्नति की संभावनाओं में सुधार भी शामिल है.’

मालूम हो कि केंद्र सरकार ने दशकों पुरानी रक्षा भर्ती प्रक्रिया में आमूलचूल परिवर्तन करते हुए थलसेना, नौसेना और वायुसेना में सैनिकों की भर्ती संबंधी अग्निपथ नामक योजना की बीते 14 जून को घोषणा की थी, जिसके तहत सैनिकों की भर्ती सिर्फ चार साल की कम अवधि के लिए संविदा आधार पर की जाएगी.

भर्ती के नए प्रारूप की घोषणा के बाद देश के कई हिस्सों में हिंसक विरोध देखा गया. विपक्ष इस योजना को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर रही है. सरकार का तर्क है चार साल में रिटायर होने के बाद इन पूर्व सैनिकों को विभिन्न क्षेत्र की नौकरियों में प्राथमिकता दी जाएगी.

इस योजना के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों को विफल करने के प्रयास के तहत देश के सैन्य नेतृत्व ने बीते 19 जून को घोषणा की थी कि नई भर्ती योजना के लिए आवेदकों को इस प्रतिज्ञा के साथ एक शपथ-पत्र देना होगा कि उन्होंने किसी भी विरोध, आगजनी या आंदोलन में भाग नहीं लिया है.