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मुंबई: आरे में मेट्रो कार शेड के ख़िलाफ़ प्रदर्शन, चार प्रदर्शनकारियों को 10 घंटे हिरासत में रखा

मुंबई के आरे वन क्षेत्र में मेट्रो-3 कार शेड परियोजना को 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चह्वाण लेकर आए थे. जिसे बाद में देवेंद्र फडणवीस सरकार ने भी आगे बढ़ाया था, जबकि पर्यावरण कार्यकर्ता लगातार इसके विरोध में थे. 2019 में जब उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में महाविकास अघाड़ी सरकार सत्ता में आई तो उसने इस परियोजना पर रोक लगा दी थी. अब मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सत्ता संभालने के तुरंत बाद इसे हरी झंडी दे दी है.

(फाइल फोटो: पीटीआई)

मुंबई: मुंबई के आरे वन क्षेत्र में मेट्रो रेल कार शेड निर्माण के विरोध में सोमवार को हिरासत में लिए गए चार लोगों को 10 घंटे बाद मुक्त कर दिया गया. एक पुलिस अधिकारी ने यह जानकारी दी.

उन्होंने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 149 (संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए कार्रवाई) के तहत नोटिस जारी किए जाने के बाद सबसे पहले प्रदर्शनकारी तबरेज सैय्यद और जयेश भिसे को हिरासत में लिया गया. अधिकारी ने बताया कि इसके बाद लक्ष्मण जाधव और रोहित नाम के दो अन्य लोगों को हिरासत में लिया गया.

अधिकारी ने बताया कि शाम को वनराई थाने में समर्थकों की भीड़ के बीच इन चारों को 10 घंटे तक हिरासत में रखने के बाद रिहा कर दिया गया. उन्होंने कहा कि इलाके में पुलिस की तैनाती बढ़ाने के साथ बैरिकेड लगाए गए हैं और सड़कों को या तो बंद कर दिया गया है या मार्ग में बदलाव किया गया है.

उन्होंने कहा कि लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध है. केवल आसपास के निवासियों को ही आधार कार्ड आदि पहचान-पत्र की जांच के बाद प्रवेश की अनुमति है.

कार शेड स्थल के आसपास आरे में पेड़ों को गिराने और काटने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर प्रदर्शनकारियों द्वारा प्रसारित किया जा रहा है. वहीं, बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग ने भी अपनी कुछ बसों के मार्ग परिवर्तित कर दिए.

मुंबई पुलिस ने सोमवार को आरे कॉलोनी क्षेत्र में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी और बीते 24 जुलाई को आपराधिक दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के तहत कार शेड के निर्माण के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले लोगों को नोटिस भेजना शुरू कर दिया था.

एक अधिकारी ने कहा था कि पुलिस ने सीआरपीसी की धारा-149 के तहत नोटिस जारी करना शुरू कर दिया है. इसके तहत गोरेगांव के पश्चिमी उपनगर में धरना स्थल पर अवैध रूप से इकट्ठा होने पर पाबंदी लगाई गई है.

महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों सहित बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने तख्तियों, बैनरों पर ‘आरे बचाओ’ (Save Aarey) लिखकर प्रदर्शन किया. कुछ लोगों को तख्तियों के साथ नवनिर्वाचित राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से शहर में वन क्षेत्र को बचाने और हस्तक्षेप करने की अपील करते देखा गया.

पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) जोन 12 सोमनाथ घरगे ने कहा था, ‘नेता, गैर-सरकारी संगठनों के प्रमुख और विभिन्न समूहों के प्रमुख लोग प्रदर्शन करने की अनुमति के लिए पुलिस से संपर्क कर रहे हैं. इसलिए हमने कानून व्यवस्था बनाए रखने और उन्हें चेतावनी देने के लिए सीआरपीसी की धारा 149 के तहत नोटिस जारी किया है.’

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, सोमवार को हिरासत में लिए गए चार प्रदर्शनकारियों को वनराय पुलिस स्टेशन ले जाया गया. उसके बाद वनराय पुलिस स्टेशन में एक दर्जन से अधिक ‘आरे बचाओ’ कार्यकर्ताओं के मौन, धरना प्रदर्शन के बाद चारों को आखिरकार रात 8:30 बजे रिहा कर दिया गया.

सैयद ने सोमवार रात को रिहा होने के तुरंत बाद कहा, ‘मैं करीब 12 घंटे हिरासत में था. कानून के मुताबिक मुझे आरे थाने ले जाना चाहिए था न कि वनराय. जब मैंने पूछा कि क्या मुझे हिरासत में लिया गया है या गिरफ्तार किया गया है, तो मुझे नहीं बताया गया.’

प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, आरे कॉलोनी इलाके में सिर्फ निवासियों को ही प्रवेश दिया जा रहा है और पुलिस बाहर से आने वाले लोगों को रोक रही है.

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, आरे क्षेत्र में पेड़ काटने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने वालों में से एक अमृता भट्टाचार्य ने कहा, ‘आज एक से दो फीट के बीच की शाखाओं को काट दिया गया है. यह सिर्फ टहनियां या पत्ते नहीं हैं. हमें कोई अनुमति नहीं दिखाई गई और न ही कोई पूर्व सूचना थी. यह 2019 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ है. इसके अलावा महाराष्ट्र ट्री एक्ट के खिलाफ भी है.’

मुंबई मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (एमएमआरसीएल) के अधिकारियों ने आरोप से इनकार किया और कहा कि सोमवार को पेड़ नहीं काटे गए.

एमएमआरसीएल के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘हमने आज आरे में एक भी पेड़ नहीं काटा. बृहन्मुंबई महानगर पालिका और डेयरी विभाग की अनुमति से केवल मौजूदा पेड़ों की शाखाओं को ही काटा गया है. आरे में कई ट्रक और क्रेन तैनात किए जाने के कारण यातायात को डायवर्ट किया गया था. जब कर्मचारी पेड़ों की शाखाओं की छंटाई कर रहे थे कर रहे हों तो यातायात को स्वतंत्र रूप से गुजरने देना सुरक्षित नहीं है. आरे के अंदर किसी भी बड़े ट्रैफिक जाम से बचने के लिए ट्रैफिक को डायवर्ट किया गया था.’

आरे वन क्षेत्र मुंबई के उपनगर गोरेगांव में एक हरित क्षेत्र है. 1,800 एकड़ में फैले इस वन क्षेत्र को शहर का ‘ग्रीन लंग्स’ भी कहा जाता है. आरे वन में तेंदुओं के अलावा जीव-जंतुओं की करीब 300 प्रजातियां पाई जाती हैं. यह संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान से जुड़ा है.

पर्यावरण कार्यकर्ताओं के अनुसार, वन न केवल शहर के लोगों को ताजा हवा देते हैं, बल्कि यह वन्यजीवों के लिए प्रमुख प्राकृतिक वास है और इनमें से कुछ तो स्थानिक प्रजातियां हैं. इस वन में करीब पांच लाख पेड़ हैं और कई नदियां और झीलें यहां से गुजरती हैं.

महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार ने बीते 21 जुलाई को आरे कॉलोनी में मेट्रो-3 कार शेड के निर्माण पर लगी रोक हटा दी थी. बीते 30 जून को कार्यभार संभालने के तुरंत बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने राज्य प्रशासन को कांजुरमार्ग के बजाय आरे कॉलोनी में मेट्रो-थ्री कार शेड बनाने का निर्देश दिया था.

उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली पिछली महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार ने पर्यावरण संरक्षण के आधार पर प्रस्तावित कार शेड साइट को आरे कॉलोनी से कांजुरमार्ग में स्थानांतरित कर दिया था, लेकिन यह मुद्दा कानूनी विवाद में उलझ गया था.

2019 में तत्कालीन उद्धव ठाकरे सरकार ने पर्यावरण संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए आरे मेट्रो रेल कार शेड पर काम रोक दिया था.

आरे क्षेत्र में कार शेड स्थापित करने के फैसले को पर्यावरणविदों के विरोध का सामना करना पड़ा था, क्योंकि इस परियोजना में सैकड़ों पेड़ों को काटा जाना है. बाद में ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार ने परियोजना को कांजुरमार्ग में स्थानांतरित करने की घोषणा की थी.

तब फडणवीस ने कहा था, ​‘अगर कार शेड को कांजुरमार्ग में स्थानांतरित किया जाता है तो इससे और अधिक संख्या में पेड़ कटेंगे, परियोजना में देरी होगी और करोडों रुपये बर्बाद होंगे.​’

हालांकि, बाद में कांजुरमार्ग में कार शेड निर्माण करने की योजना अटक गई थी.

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 14 दिसंबर 2020 को मुंबई उपनगरीय जिला कलेक्टर द्वारा कांजुरमार्ग क्षेत्र में मेट्रो कार शेड के निर्माण के लिए 102 एकड़ जमीन के आवंटन के आदेश पर रोक लगा दी थी. अदालत ने अधिकारियों को उक्त जमीन पर कोई भी निर्माण कार्य करने से भी रोक दिया था.

इससे पहले अक्टूबर 2019 में जब देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री थे, तब मुंबई मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड ने कार शेड के निर्माण के लिए क्षेत्र में 2,000 से अधिक पेड़ों को काट दिया था. क्षेत्र में पेड़ों की कटाई को चुनौती देने संबंधी याचिकाओं को बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा खारिज करने के बाद केवल 24 घंटों के भीतर पेड़ों को काट दिया गया था.

पेड़ों की कटाई के बाद पूरे शहर में स्थानीय आदिवासियों ने विरोध प्रदर्शन किए थे. तब पुलिस ने आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई का विरोध कर रहे पर्यावरण कार्यकर्ताओं समेत कम से कम 29 लोगों को गिरफ्तार किया था.

द वायर की रिपोर्ट के मुताबिक, अब सालों बाद चिंतित मुंबईवासी एक बार फिर आरे कॉलोनी में कार शेड बनाने के खिलाफ खड़े हो गए हैं.

बता दें कि मेट्रो-3 कार शेड को 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चह्वाण ने सबसे पहले आरे में बनाने का प्रस्ताव दिया था, जिसे स्थानीय एनजीओ वनशक्ति ने बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. इसके बाद फडणवीस भी इसी प्रस्ताव पर आगे बढ़े, लेकिन पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने कार शेड के लिए आरे में पेड़ काटे जाने का कड़ा विरोध किया था.

शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन के 2019 में सत्ता में आने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने इस फैसले को पलट दिया और मेट्रो-3 कार शेड को कांजुर मार्ग पूर्वी उपनगर में बनाने का प्रस्ताव दिया. ठाकरे सरकार ने आरे को आरक्षित वन भी घोषित कर दिया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)