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गुड़गांव में मांस की दुकानें और बूचड़खाने 24 अगस्त से एक सितंबर तक बंद रहेंगेः नगर निगम

गुड़गांव नगर निगम ने जैन समाज के ‘पर्यूषण पर्व’ के चलते मांस की दुकानें और बूचड़खाने बंद रखने का फैसला किया है. हालांकि अधिकारियों ने बताया कि सुपरमार्केट में ‘पैकेज़्ड फ्रोज़न’ मीट की बिक्री पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा.

(फाइल फोटो: पीटीआई)

गुड़गांव: हरियाणा के गुड़गांव शहर में नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली मांस की दुकानें और बूचड़खाने जैन समाज के ‘पर्यूषण पर्व’ के चलते 24 अगस्त से लेकर एक सितंबर तक बंद रहेंगे. अधिकारियों ने यह जानकारी दी.

नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि सुपरमार्केट में ‘पैकेज्ड फ्रोजन’ मीट की बिक्री पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा.

शहर के उप-निगमायुक्त विजयपाल यादव ने कहा, ‘हमें राज्य सरकार से आदेश मिला है, जिस पर अमल करते हुए हमने शहर में मांस की सभी दुकानों को 24 अगस्त से एक सितंबर की अवधि तक बंद करने का फैसला किया है. हम पर्यूषण पर्व के दौरान मांस की बिक्री पर प्रतिबंध के बारे में जानकारी देने के लिए जल्द ही दुकान मालिकों की बैठक बुलाएंगे.’

उन्होंने कहा कि हालांकि, सुपरमार्केट को ‘पैकेज्ड फ्रोजन’ मीट बेचने की अनुमति है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, हमारी टीमें आदेशों के पालन की जांच के लिए क्षेत्रों की निगरानी करेंगी और दुकानों को बंद नहीं करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

इस संबंध में हरियाणा के शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय के एक कार्यकारी इंजीनियर द्वारा सभी उपायुक्तों, नगर निगमों के आयुक्तों और कार्यकारी अधिकारियों और हरियाणा में नगर परिषदों और समितियों के सचिवों को 20 जुलाई को जारी एक आदेश पत्र में कहा गया है कि एसएस जैन महासभा, हरियाणा के अध्यक्ष ने जानकारी दी थी कि प्रदेश में 24 अगस्त से 1 सितंबर तक पर्यूषण पर्व मनाया जा रहा है.

पत्र में कहा गया है, इस संबंध में सक्षम प्राधिकारी द्वारा मुझे आपसे अनुरोध करने का निर्देश दिया गया है कि पर्यूषण पर्व की अवधि के दौरान सभी बूचड़खाने और मांस की दुकानें बंद रहें.

निगम के इस फैसले को लेकर कई मांस दुकान मालिकों ने कहा कि अगर नौ दिन की अवधि के लिए दुकानें बंद रहती हैं तो उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा.

गौरतलब है कि पिछले साल 18 मार्च को गुड़गांव नगर निगम ने हर मंगलवार शहर में मांस की दुकानों को बंद रखने का फैसला किया था. पार्षदों ने हिंदू भावनाओं का हवाला देते हुए मंगलवार को बंद के पक्ष में दलील दी थी.

नगर निगम ने उस समय मांस की दुकानों के लिए लाइसेंस शुल्क को 5,000 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये करने और अनधिकृत कसाइयों पर जुर्माना 500 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये करने का भी फैसला किया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)