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दिल्ली: मंकीपॉक्स का चौथा मामला सामने आया, नाइजीरियाई महिला में संक्रमण की पुष्टि

अब तक देश में मंकीपॉक्स वायरस से संक्रमितों की संख्या बढ़ कर नौ हो गई है, जिनमें से एक मरीज की मौत हुई है. मंकीपॉक्स के बढ़ते मामलों के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इससे बचने के लिए ‘क्या करें’ और ‘क्या न करें’ से संबंधित एक सूची जारी की है.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी में बुधवार को नाइजीरिया की 31 वर्षीय महिला में मंकीपॉक्स के संक्रमण की पुष्टि हुई, जिसके बाद दिल्ली में संक्रमितों की संख्या बढ़कर चार हो गई है. देश में यह पहली महिला हैं, जिसमें मंकीपॉक्स के संक्रमण की पुष्टि हुई है.

इस बीच केंद्र सरकार ने बृहस्पतिवार को मंकीपॉक्स के मामलों से निपटने के लिए मौजूदा दिशानिर्देशों पर पुनर्विचार करने के वास्ते शीर्ष स्वास्थ्य विशेषज्ञों की एक बैठक बुलाई है.

दिल्ली में मंकीपॉक्स के नए मामले सामने आने के बाद अब देश में इस संक्रमण से संक्रमितों की संख्या बढ़ कर नौ हो गई है, जिनमें से एक मरीज की मौत हो गई है. केरल के त्रिशूर में बीते 30 जुलाई को 22 वर्षीय इस व्यक्ति की मौत हो गई थी.

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, एक दुर्लभ लेकिन संभावित रूप से गंभीर वायरल बीमारी मंकीपॉक्स का पहला मामला केरल के कोल्लम जिले से बीते 14 जुलाई को सामने आया था और मरीज को पिछले हफ्ते अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी. राज्य में सभी पांच संक्रमितों का संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का यात्रा इतिहास था.

सूत्रों ने बताया कि महिला को बुखार है और उनके हाथ में दाने हैं. उन्हें लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल (एलएनजेपी) में भर्ती कराया गया है. उन्होंने बताया कि उनका नमूना जांच के लिए भेजा गया था और बुधवार को उसमें संक्रमण की पुष्टि हुई.

मंकीपॉक्स की स्थिति की नजदीक से निगरानी करने वाली टीम से जुड़े सूत्रों ने बताया, ‘महिला को एलएनजेपी अस्पताल में मंगलवार को भर्ती कराया गया था. उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर है.’

उन्होंने बताया कि हाल ही में उनकी किसी विदेश यात्रा की जानकारी नहीं मिली है.

गौरतलब है कि बीते एक अगस्त को दिल्ली में मंकीपॉक्स के पहले मरीज को एलएनजेपी अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी.

दिल्ली में मंकीपॉक्स का तीसरा मामला अफ्रीकी मूल का एक 35 वर्षीय व्यक्ति का था, जिसकी विदेश यात्रा का कोई हालिया इतिहास नहीं था. उसे सोमवार को एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया था और अगले दिन जांच में वह संक्रमित पाया गया था.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में मंकीपॉक्स के मामलों में वृद्धि के साथ सरकार ने तीन निजी अस्पतालों की पहचान की है, जहां पुष्ट और संदिग्ध मामलों के लिए आइसोलेशन वार्ड बनाए जाएंगे. इनमें एमडी सिटी अस्पताल, बत्रा अस्पताल और कैलाश दीपक अस्पताल शामिल हैं. मंकीपॉक्स के मामलों के आइसोलेशन के प्रबंधन के लिए हर अस्पताल में 10 बेड (पांच पुष्ट और पांच संदिग्ध मामलों के लिए) आरक्षित होंगे.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बीते 23 जुलाई को मंकीपॉक्स को वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित किया था. उसके अनुसार, मंकीपॉक्स पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाला संक्रमण है और इसके लक्षण चेचक जैसे होते हैं.

विश्व स्तर पर 90 प्रतिशत से अधिक मामले एमएसएम (पुरुषों के साथ यौन संबंध रखने वाले) नेटवर्क में पाए गए हैं.  हालांकि, श्वसन की कणों के माध्यम से करीबी संपर्कों या परिवार के सदस्यों को भी संक्रमण से इनकार नहीं किया गया है.

त्वचा से त्वचा के संपर्क और आमने-सामने के संपर्क को रोग के संक्रमण के दो वैज्ञानिक तरीकों के रूप में जाना जाता है. संक्रमित व्यक्ति की त्वचा पर चकत्ते या उनके कपड़े और अन्य सामग्री के किसी भी संपर्क से भी आगे प्रसार हो सकता है.

स्पेन ने बीते 30 जुलाई को मंकीपॉक्स से दूसरी मौत की सूचना दी. ऐसा माना जाता है कि ये हाल ही में अफ्रीका से बाहर फैलने के बाद से यूरोप में मंकीपॉक्स से हुई मौत के पहले मामले हैं. स्पेन ने बीते 29 जुलाई पहली मौत की सूचना दी थी.

मई के बाद से लगभग 80 देशों में मंकीपॉक्स के प्रकोप के 22,000 से अधिक मामले देखे गए हैं. अफ्रीका में 75 संदिग्ध मौतें हुई हैं, जिनमें ज्यादातर नाइजीरिया और कांगो में हैं.

स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंकीपॉक्स से बचने के लिए दिशानिर्देश जारी किए

देश में मंकीपॉक्स के बढ़ते मामलों के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को इससे बचने के लिए ‘क्या करें’ और ‘क्या न करें’ से संबंधित एक सूची जारी की.

मंत्रालय ने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक या बार-बार संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आता है, तो वह भी संक्रमित हो सकता है.

मंत्रालय ने कहा कि संक्रमण से बचने के लिए संक्रमित व्यक्ति को अन्य व्यक्तियों से दूर रखा जाना चाहिए. इसने कहा कि इसके अलावा हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल, साबुन और पानी से हाथ धोना, मास्क पहनना तथा दस्ताने पहनना कुछ ऐसे उपाय हैं, जिनसे बीमारी से बचा जा सकता है, साथ ही आसपास की जगहों को भी रोगाणुमुक्त किया जाना चाहिए.

मंत्रालय ने बताया कि उन लोगों के साथ रूमाल, बिस्तर, कपड़े, तौलिए और अन्य वस्तुएं साझा करने से बचा जाना चाहिए, जो संक्रमित पाए गए हैं.

 

इसने रोगियों और गैर-संक्रमित व्यक्तियों के गंदे कपड़े एक साथ नहीं धोने और सार्वजनिक कार्यक्रमों में जाने से बचने की सलाह भी दी.

मंत्रालय ने कहा, ‘संक्रमितों और संदिग्ध रोगियों से भेदभाव नहीं करें. इसके अलावा किसी अफवाह या गलत जानकारी पर विश्वास न करें.’

केंद्र सरकार की मंकीपॉक्स पर विशेषज्ञों के साथ बैठक

केंद्र सरकार ने मंकीपॉक्स के मामलों से निपटने के लिए मौजूदा दिशानिर्देशों पर पुनर्विचार करने के वास्ते बृहस्पतिवार को शीर्ष स्वास्थ्य विशेषज्ञों की एक बैठक बुलाई है.

एक अधिकारी ने बताया, ‘यह मौजूदा दिशानिर्देशों पर पुनर्विचार के लिए की गई एक तकनीकी बैठक है.’

बैठक की अध्यक्षता आपात चिकित्सा राहत के निदेशक डॉ. एल. स्वस्तिचरण कर रहे हैं और इसमें राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन, राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रतिनिधि शामिल हुए हैं.

केंद्र द्वारा ‘मंकीपॉक्स बीमारी के प्रबंधन पर जारी दिशा निर्देशों’ के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति ने पिछले 21 दिनों के भीतर प्रभावित देशों की यात्रा की है और उसके शरीर पर लाल चकत्ते पड़ने, लसिका ग्रंथियों में सूजन, बुखार, सिर में दर्द, शरीर में दर्द और बहुत ज्यादा कमजोरी जैसे लक्षण दिखायी देते हैं तो उसे ‘संदिग्ध’ माना जाएगा.

दिशा निर्देशों में संपर्क में आए लोगों को परिभाषित करते हुए कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति किसी संक्रमित में पहला लक्षण दिखाई देने और त्वचा पर जमी पपड़ी के गिर जाने तक की अवधि के दौरान उसके एक से अधिक बार संपर्क में आता है तो उसे संपर्क में आया व्यक्ति माना जाएगा.

यह संपर्क चेहरे से चेहरे का, सीधा शारीरिक संपर्क में आना, जिनमें यौन संबंध बनाना भी शामिल है, उसके कपड़ों या बिस्तर के संपर्क में आना हो सकता है. इसे मंकीपॉक्स का संदिग्ध या पुष्ट मामला माना जाएगा.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)