राजनीति

बिहार: ज़मीन सौदों पर सवाल उठने के बाद आरसीपी सिंह ने जदयू छोड़ी

जदयू ने बीते पांच अगस्त को अपने पूर्व प्रमुख आरसीपी सिंह पर भूमि ख़रीद में ‘भारी अनियमितताओं’ का आरोप लगाया था. इस संबंध में बिहार जदयू के अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह को पत्र लिखकर उनके ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की मांग की है. इस्तीफ़ा देने के बाद आरसीपी सिंह ने पार्टी को डूबता जहाज बताया है.

आरसीपी सिंह. (फोटो साभार: फेसबुक)

पटना: पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह ने शनिवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जनता दल (यूनाइटेड) छोड़ दी. इसके कुछ घंटे पहले यह खबर आई थी कि पार्टी ने कुछ अज्ञात कार्यकर्ताओं द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों पर उनसे स्पष्टीकरण मांगा है.

जदयू ने बीते पांच अगस्त को अपने पूर्व प्रमुख आरसीपी सिंह पर भूमि संपत्ति घोषित करने में ‘भारी अनियमितताओं’ का आरोप लगाया था, जिसने उन्हें अपने इस्तीफे की घोषणा करने और पार्टी को ‘डूबता जहाज’ कहने के लिए प्रेरित किया.

जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सिंह को पार्टी द्वारा राज्यसभा के एक और कार्यकाल से इनकार करने के बाद अपना मंत्रिपद छोड़ना पड़ा था. उन्होंने पार्टी छोड़ने की घोषणा नालंदा जिले स्थित अपने पैतृक आवास पर आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में की.

उन्होंने कहा, ‘आरोप उन लोगों द्वारा एक साजिश है, जिन्होंने मुझे केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने से ईर्ष्या की थी. मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि कांच के घरों में रहने वालों को दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकने चाहिए. मैं पार्टी की अपनी प्राथमिक सदस्यता भी छोड़ रहा हूं.’

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, बीते 4 अगस्त को सिंह को लिखे एक पत्र में जदयू बिहार के अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने दो अज्ञात पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा लगाए गए एक आरोप का जवाब मांगा कि उन्होंने 2013 से 2022 के बीच नालंदा में कम से कम 47 भूखंड खरीदे थे.

इस अवधि के दौरान सिंह जदयू महासचिव (संगठन), राज्यसभा सांसद, जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री तक रहे.

2016 के अपने राज्यसभा चुनाव हलफनामे में सिंह ने नालंदा जिले के अस्थाना गांव में 4.86 लाख रुपये (अपने हिस्से के रूप में) की एक साझा अचल संपत्ति दिखाई थी. उन्होंने अपनी पत्नी के नाम करीब 2.53 करोड़ रुपये और 15 लाख रुपये से अधिक की चल संपत्ति घोषित की थी.

जदयू द्वारा तीसरे राज्यसभा कार्यकाल के लिए उन्हें मैदान में उतारने से इनकार करने के बाद सिंह को हाल ही में केंद्रीय मंत्री के रूप में पद छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था. उत्तर प्रदेश कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी सिंह ने राजनीति में आने के लिए 2010 में वीआरएस लिया था.

मुख्यमंत्री के रूप में पहले पांच वर्षों के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रमुख सचिव के रूप में भी उन्होंने कार्य किया था और पार्टी के अंदर विभिन्न पदों पर रहे थे.

रिपोर्ट के अनुसार, नीतीश के साथ उनके संबंधों में खटास तब आई, जब उन्होंने भाजपा के साथ उनकी कथित निकटता और मुख्यमंत्री की सहमति के बिना मंत्री पद स्वीकार कर लिया था. सिंह को पार्टी प्रमुख का पद छोड़ने के लिए भी कहा गया था.

जदयू बिहार के अध्यक्ष कुशवाहा द्वारा आरसीपी सिंह को लिखे गए पत्र के साथ अंतत: यह तनाव सामने आ गया.

पत्र में कुशवाहा ने भूमि सौदों की एक सूची प्रस्तुत की थी, जिसमें दिखाया गया था कि सिंह ने कथित तौर पर अपनी पत्नी गिरिजा सिंह और दो बेटियों के नाम पर नालंदा के अस्थाना और इस्लामपुर ब्लॉक में भूखंड (कुल 1,600 डिसमिल) खरीदे थे.

रिपोर्ट के अनुसार, इस खरीद के समय एक डिसमिल भूमि की अनुमानित सरकारी दर 15,000 रुपये से 40,000 रुपये तक थी. अस्थाना और इस्लामपुर में जमीन का मौजूदा मूल्य 25,000 रुपये से लेकर 90,000 रुपये प्रति डिसमिल के बीच है.

पता चला है कि कुशवाहा ने बीते 26 जुलाई को जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह को जमीन खरीद की सूची के साथ पत्र लिखा था.

कुशवाहा ने कहा, ‘हमारे नेता नीतीश कुमार ने आप पर विश्वास किया और आपको पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का प्रमुख पद दिया, आपको दो बार राज्यसभा भेजा और आपने केंद्रीय मंत्री के रूप में भी कार्य किया. आप यह भी जानते हैं कि नीतीश कुमार का लंबा राजनीतिक करिअर बेदाग रहा है और उन्होंने अपने लिए कोई संपत्ति जमा नहीं की है. पार्टी आपसे अपेक्षा करती है कि आप अपने खिलाफ शिकायत का बिंदुवार जवाब दें.’

इसके बाद आरसीपी सिंह ने नालंदा में संवाददाताओं से कहा, ‘उन्हें (कुशवाहा) दो लोगों के हवाले से मुझे लिखने के बजाय सीधे मुझसे (जमीन की खरीद के बारे में) पूछना चाहिए था. यह मेरे खिलाफ एक साजिश है. मैं अभी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहा हूं. जदयू एक डूबता जहाज है. सिर्फ झोला धोने वाले लोग बचे हैं.’

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सिंह ने कथित भूमि खरीद पर कोई टिप्पणी नहीं की. उनकी बेटियों में से एक लिपि सिंह, जो सहरसा की एसपी हैं, ने भी इस संबंध में भेजे गए एक मोबाइल संदेश (एसएमएस) का कोई जवाब नहीं दिया है.

राजीव रंजन को लिखे अपने पत्र में कुशवाहा ने कहा है कि आरसीपी सिंह की पत्नी, जिनका उल्लेख 2016 के चुनावी हलफनामे में गिरिजा सिंह के रूप में किया गया है, भूमि लेन-देन में ‘गिरजा देवी’ थीं.

सिंह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कुशवाहा ने राजीव रंजन को लिखा है, ‘पार्टी में शीर्ष पदों पर रहे आरसीपी सिंह द्वारा संपत्ति का संचय एक अपराध है और पार्टी की छवि को खराब करता है. हमने अभी तक सिर्फ नालंदा में उनकी संपत्ति को उजागर किया है, यह सूची लंबी हो सकती है.’

नालंदा के डीएम शशांक शुभंकर ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘आरसीपी सिंह द्वारा भूमि खरीद को लेकर हमें अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली है. फिलहाल हमें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)