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त्रिपुरा: ब्रू समुदाय के पुनर्वास शर्तों पर राजी न होने पर बंद कर दी जाएंगी सरकारी सुविधाएं

उत्तरी त्रिपुरा ज़िले के कंचनपुर और पानीसागर उपसंभागों में मिज़ोरम से आए ब्रू शरणार्थी सात राहत शिविरों में रह रहे हैं. एक अधिकारी ने बताया कि उन्हें आदेश मिला है कि शिविरों में ठहरे शरणार्थी यदि कहीं और पुनर्वास के लिए राजी नहीं होते हैं तो एक सितंबर से उन्हें दी जाने वाली मुफ़्त राशन आदि जैसी मदद रोक दी जाएगी.

(फाइल फोटोः पीटीआई)

अगरतला: एक अधिकारी ने बताया कि ब्रू पुनर्वास पैकेज लागू होने जा रहा है और ऐसे में मिजोरम से भाग कर आने के बाद त्रिपुरा में राहत शिविरों में रह रहे ब्रू शरणार्थी यदि कहीं और पुनर्वास के लिए राजी नहीं होते हैं तो वे एक सितंबर से मुफ्त राशन जैसे लाभों को हासिल करने के हकदार नहीं रह जाएंगे.

ये ब्रू शरणार्थी उत्तरी त्रिपुरा ज़िले के कंचनपुर और पानीसागर उपसंभागों में सात राहत शिविरों में रह रहे हैं.

एक अधिकारी ने कहा कि ब्रू समुदाय के ऐसे आंतरिक रूप से विस्थापित 3,232 परिवारों को पहले ही त्रिपुरा में अन्य जगहों पर बसा दिया गया है और उन्हें आवास से लेकर नकद राहत तक के लाभ मिल रहे हैं.

कंचनपुर के उपसंभाग मजिस्ट्रेट (एसडीएम) सुभाष आचार्य ने कहा, ‘हमें आदेश मिला है कि राहत शिविरों में ठहरे ब्रू शरणार्थियों की राहत एक सितंबर से रोक दी जाएगी. तद्नुसार, ब्रू समुदाय के नेताओं से उन परिवारों के मुखिया से ‘सहमति पत्र’ जमा कराने को कहा गया है जिनका अब तक पुनर्वास नहीं हुआ है. उस पत्र में वे बताएं कि वे कहां अपना पुनर्वास चाहते हैं.’

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक,  उन्होंने कहा कि लगभग 1,200 परिवारों को पुनर्वास के लिए अपना सहमति पत्र जमा करना बाकी है.

आचार्य ने कहा, ‘ब्रू समुदाय के नेताओं को आवश्यक कदम उठाने के लिए सभी शेष परिवारों से 16 अगस्त तक सहमति पत्र जमा करने के लिए कहा गया है.’

त्रिपुरा सरकार ने 31 अगस्त तक राज्य के 12 स्थानों पर ब्रू परिवारों का पुनर्वास करने का लक्ष्य निर्धारित किया है. पिछले साल जनवरी में ब्रू समुदाय, केंद्र तथा त्रिपुरा एवं मिजोरम सरकार के बीच करार होने के बाद से राज्य (त्रिपुरा) सरकार पहले ही 6,959 ब्रू परिवारों के 37,136 सदस्यों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है.

प्रत्येक पुनर्वासित ब्रू परिवार को 1,200 वर्ग फुट का भूखंड आवंटित किया गया है और घर बनाने के लिए सरकार द्वारा 1.5 लाख रुपये प्रदान किए गए हैं.

यह समझौता प्रत्येक परिवार के लिए 4 लाख रुपये की सावधि जमा, 5,000 रुपये की मासिक राशि और सभी क्लस्टर गांवों में स्कूलों की स्थापना के अलावा दो साल के लिए मुफ्त मासिक राशन की गारंटी देता है.

मालूम हो कि बीते अप्रैल महीने में त्रिपुरा के ब्रू आदिवासियों ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से उनके पुनर्वास की प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया था.

अमित शाह को भेजे गए पत्र में ब्रू विस्थापित युवा संघ (बीडीवाईए) ने पुनर्वास प्रक्रिया को पूरा करने में देरी के लिए त्रिपुरा की बिप्लव देब सरकार के लापरवाही भरे रवैये को जिम्मेदार ठहराया था.

उल्लेखनीय है कि मिजोरम के ब्रू समुदाय के लोग 1997 में मिजो समुदाय के लोगों के साथ हुए भूमि विवाद के बाद शुरू हुई जातीय हिंसा के बाद से त्रिपुरा पलायन करने लगे थे. उस वक्त समुदाय के ब्रू समुदाय के तकरीबन 37 हजार लोग मिजोरम छोड़कर त्रिपुरा के मामित, कोलासिब और लुंगलेई जिलों में भाग आए थे. इनमें से लगभग 5,000 नौ चरणों में वापस लौटे थे, लेकिन लगभग इतने ही 2009 में दोबारा हुए संघर्षों में विस्थापित हुए और त्रिपुरा आए.

ये लोग पिछले 23 सालों से उत्तर त्रिपुरा जिले के कंचनपुर और पानीसागर उप-संभागों के छह शिविरों- नैयसंगपुरा, आशापारा, हजाचेर्रा, हमसापारा, कासकऊ और खाकचांग में रहते आ रहे थे.

ब्रू और बहुसंख्यक मिज़ो समुदाय के लोगों की बीच हुई यह हिंसा इनके पलायन का कारण बना था. इस तनाव की नींव 1995 में तब पड़ी, जब शक्तिशाली यंग मिज़ो एसोसिएशन और मिज़ो स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने राज्य की चुनावी भागीदारी में ब्रू समुदाय के लोगों की मौजूदगी का विरोध किया. इन संगठनों का कहना था कि ब्रू समुदाय के लोग राज्य के नहीं हैं.

इस तनाव ने ब्रू नेशनल लिबरेशन फ्रंट (बीएनएलएफ) और राजनीतिक संगठन ब्रू नेशनल यूनियन (बीएनयू) को जन्म दिया, जिसने राज्य के चकमा समुदाय की तरह एक स्वायत्त जिले की मांग की.

इसके बाद 21 अक्टूबर 1996 को बीएनएलफए ने एक मिजो अधिकारी की हत्या कर दी, जिसके बाद से दोनों समुदायों के बीच जातीय हिंसा भड़क उठी. दंगे के दौरान ब्रू समुदाय के लोगों को पड़ोसी उत्तरी त्रिपुरा की ओर धकेलते हुए उनके बहुत सारे गांवों को जला दिया गया था. इसके बाद से ही इस समुदाय के लोग त्रिपुरा के कंचनपुर और पानीसागर उप-संभागों में बने राहत शिविरों में रहते आ रहे थे.

आदिवासी समुदाय के इन लोगों को मिजोरम वापस भेजने के लिए जुलाई 2018 में एक समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे, लेकिन यह क्रियान्वित नहीं हो सका, क्योंकि अधिकतर विस्थापित लोगों ने मिजोरम वापस जाने से इनकार कर दिया था.

जनवरी 2020 में उनके स्थायी पुनर्वास के लिए एक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर हुआ. इसके तहत फैसला किया गया है कि मिजोरम से विस्थापित हुए 30 हज़ार से अधिक ब्रू आदिवासी त्रिपुरा में ही स्थायी रूप से बसाए जाएंगे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)