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हिमाचल प्रदेश की भाजपा सरकार ने और अधिक सख़्त धर्मांतरण रोधी विधेयक पेश किया

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में मौजूदा धर्मांतरण रोधी क़ानून में संशोधन के लिए एक विधेयक पेश किया गया, जिसमें मौजूदा क़ानून में सज़ा बढ़ाने का और ‘सामूहिक धर्मांतरण’ के उल्लेख का प्रावधान है. मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि अधिनियम को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सज़ा की धाराओं में बदलाव किए जा रहे हैं.

विधानसभा में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर. (फाइल फोटो: ट्विटर/@jairamthakurbjp)

शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा में मौजूदा धर्मांतरण रोधी कानून में संशोधन के लिए एक विधेयक शुक्रवार को पेश किया गया, जिसमें मौजूदा कानून में सजा बढ़ाने का और ‘सामूहिक धर्मांतरण’ के उल्लेख का प्रावधान है.

अधिनियम धोखाधड़ी, बल, अनुचित प्रभाव, जबरदस्ती, प्रलोभन, शादी या किसी भी कपटपूर्ण तरीके से धर्मांतरण को प्रतिबंधित करता है. हिमाचल प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक, 2022 में और अधिक कड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं.

हिमाचल प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2019 को 21 दिसंबर 2020 को ही अधिसूचित किया गया था. इस संबंध में विधेयक 15 महीने पहले ही विधानसभा में पारित हो चुका था. 2019 के विधेयक को भी 2006 के एक कानून की जगह लेने के लिए लाया गया था, जिसमें कम सजा का प्रावधान था.

जयराम ठाकुर नीत भारतीय जनता पार्टी द्वारा पेश नए संशोधन विधेयक में बलपूर्वक धर्मांतरण के लिए कारावास की सजा को सात साल से बढ़ाकर अधिकतम 10 साल तक करने का प्रस्ताव है.

विधेयक में प्रावधान प्रस्तावित है कि कानून के तहत की गई शिकायतों की जांच सब इंस्पेक्टर से निम्न दर्जे का कोई पुलिस अधिकारी नहीं करेगा. इस मामले में मुकदमा सत्र अदालत में चलेगा.

हिमाचल प्रदेश के धर्मांतरण कानून में प्रावधान है कि यदि कोई धर्म बदलना चाहता है तो उसे जिलाधिकारी को एक महीने का नोटिस देना होगा कि वे स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन कर रहे हैं.

धर्मांतरण समारोह करने वाला पुजारी भी एक महीना पहले नोटिस देगा, जो लोग अपने ‘मूल धर्म’ में परिवर्तित हो रहे हैं, उन्हें इस प्रावधान से छूट दी गई है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने विधेयक पेश करते हुए कहा, ‘अधिनियम को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सजा की धाराओं में कुछ मामूली बदलाव किए जा रहे हैं.’

मुख्यमंत्री ठाकुर ने कहा कि 2019 अधिनियम में सामूहिक धर्मांतरण पर अंकुश लगाने का प्रावधान नहीं है, इसलिए इस आशय का प्रावधान किया जा रहा है.

इस विधेयक में 2019 अधिनियम की धारा 2, 4, 7 और 13 में संशोधन करने और धारा 8ए डालने का प्रयास किया गया है.

विधेयक के तहत, ‘सामूहिक धर्मांतरण’ तब होता है, जब एक ही समय में दो या दो से अधिक लोग धर्म परिवर्तन करते हैं.

इस मसौदा कानून के तहत अधिकतम सजा 10 साल है, जो 2019 अधिनियम में सात और पुराने हिमाचल प्रदेश धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2006 में तीन था.

वर्तमान कानून कहता है कि इसके प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति या संगठन को देश के भीतर या बाहर से किसी भी प्रकार का दान या योगदान स्वीकार करने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

2006 का कानून वीरभद्र सिंह की कांग्रेस सरकार द्वारा लाया गया था. भाजपा सरकार द्वारा पेश किए गए 2019 संस्करण को सर्वसम्मति से पारित किया गया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)