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फीफा ने भारतीय फुटबॉल महासंघ पर प्रतिबंध लगाया, महिला अंडर-17 विश्वकप की मेजबानी छीनी

अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल महासंघ (फीफा) ने अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ के संचालन में तीसरे पक्ष का अनावश्यक दख़ल होने का हवाला देते हुए प्रतिबंध लगाया है. इसकी शुरुआत महासंघ के पूर्व अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल के अपना तीसरा कार्यकाल दिसंबर 2020 में समाप्त होने के बावजूद पद नहीं छोड़ने से हुई और अब उसका सबसे बुरा परिणाम भारत पर फीफा प्रतिबंध के रूप में सामने आया है.

नई दिल्ली: विश्व फुटबॉल की सर्वोच्च अंतरराष्ट्रीय निकायक संस्था फीफा (अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल महासंघ) ने मंगलवार (16 अगस्त) को भारत को करारा झटका देते हुए तीसरे पक्ष द्वारा गैरजरूरी दखल का हवाला देकर अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) को निलंबित कर दिया और उससे अक्टूबर में होने वाले अंडर-17 महिला विश्व कप के मेजबानी अधिकार छीन लिए.

भारत को 11 से 30 अक्टूबर के बीच फीफा प्रतियोगिता की मेजबानी करनी थी.

यह पिछले 85 साल के इतिहास में पहला अवसर है, जबकि फीफा ने भारतीय फुटबॉल महासंघ पर प्रतिबंध लगाया है. फीफा ने कहा है कि निलंबन तुरंत प्रभाव से लागू होगा.

फीफा ने एक बयान में कहा, ‘फीफा परिषद के ब्यूरो ने सर्वसम्मति से अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ को तीसरे पक्ष के अनुचित प्रभाव के कारण तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का फैसला किया है. तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप फीफा के नियमों का गंभीर उल्लंघन है.’

बयान में आगे कहा गया है, ‘निलंबन तभी हटेगा जब एआईएफएफ कार्यकारी समिति की जगह प्रशासकों की समिति के गठन का फैसला वापस लिया जाएगा और एआईएफएफ प्रशासन को महासंघ के रोजमर्रा के काम का पूरा नियंत्रण दिया जाएगा.’

फीफा ने कहा , ‘इसके मायने हैं कि भारत में 11 से 30 अक्टूबर के बीच होने वाला अंडर-17 महिला विश्व कप पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार भारत में नहीं हो सकता. फीफा टूर्नामेंट के संबंध में अगले चरणों का आकलन कर रहा है और यदि आवश्यक हुआ तो मामले को परिषद के ब्यूरो के पास भेजेगा.’

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2020 से चुनाव नहीं करवाने के कारण 18 मई को प्रफुल्ल पटेल को भारतीय फुटबॉल महासंघ के अध्यक्ष पद से हटा दिया था और इसके संचालन के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एआर दवे की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय प्रशासकों की समिति (सीओए) का गठन किया था. इसके बाद से ही प्रतिबंध लगने की संभावना जताई जा रही थी.

सीओए के अन्य सदस्यों में भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी और पूर्व भारतीय कप्तान भास्कर गांगुली शामिल हैं. सीओए को राष्ट्रीय खेल संहिता और दिशानिर्देशों के अनुसार एआईएफएफ के संविधान को तैयार करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी.

फीफा ने हालांकि कहा कि उसने भारत के लिए सभी विकल्प बंद नहीं किए हैं और वह खेल मंत्रालय के साथ बातचीत कर रहा है और उसे महिला जूनियर विश्व कप को लेकर सकारात्मक परिणाम की उम्मीद है.

उसने कहा, ‘फीफा भारत के खेल मंत्रालय से लगातार संपर्क में है और सकारात्मक नतीजे तक पहुंचने की उम्मीद है.’

फीफा ने बीते 6 अगस्त को भारतीय फुटबॉल महासंघ को निलंबित करने और महिला अंडर-17 विश्व कप की मेजबानी छीनने की धमकी दी थी.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने तीन अगस्त को भारतीय फुटबॉल महासंघ की कार्यकारी समिति को सीओए द्वारा प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार चुनाव कराने के निर्देश दिए थे.

फीफा ने कभी अपनी सदस्य इकाइयों के मामलों में तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप की अनुमति नहीं दी है. इनमें अदालत और सरकारी हस्तक्षेप भी शामिल है. उसने अन्य देशों में भारत जैसी स्थिति पैदा होने पर समितियों का गठन किया.

भारत पर प्रतिबंध के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, 28 अगस्त को होने वाले भारतीय फुटबॉल महासंघ चुनाव का क्या होगा, इसको लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है. शीर्ष अदालत के सीओए द्वारा तैयार समय सीमा को मंजूर करने के बाद 13 अगस्त से चुनाव प्रक्रिया शुरू हो गई थी.

प्रशासकों की समिति (सीओए) पहले ही चुनाव अधिकारी की नियुक्ति कर चुका है और उसने चुनाव के लिए निर्वाचक मंडल की सूची भी जारी कर दी है. इनमें 36 मशहूर खिलाड़ी भी शामिल हैं. नामांकन भरने की प्रक्रिया बुधवार से शुक्रवार तक चलनी है.

इससे पहले निर्वाचन अधिकारी ने जिन 36 खिलाड़ियों की सूची जारी की थी, उनमें शब्बीर अली, मनोरंजन भट्टाचार्य, प्रशांत बनर्जी, आईएम विजयन और बाईचुंग भूटिया भी शामिल हैं.

पांच प्रतिष्ठित खिलाड़ी (तीन पुरुष और दो महिला) हालांकि प्रस्तावित 22 सदस्यीय कार्यकारी समिति के सदस्य बन सकते हैं और उन्हें मतदान का अधिकार होगा.

भारतीय फुटबॉल समुदाय उम्मीद कर रहा है कि जब बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई होगी तो इसके बाद फीफा अंडर-17 महिला विश्वकप की मेजबानी को लेकर कोई न कोई हल निकल आएगा.

खेल मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में एक आवेदन दायर करके अपने पांच अगस्त के आदेश में संशोधन की मांग की थी, जिसमें 36 मशहूर खिलाड़ियों को भारतीय फुटबॉल महासंघ चुनावों में इस आधार पर मतदान करने की अनुमति दी गई थी कि फीफा, महासंघ में ‘व्यक्तिगत सदस्यता’ के पक्ष में नहीं था.

सूत्रों के अनुसार, फीफा ने सोमवार को खेल मंत्रालय के सामने अपना रुख दोहराया और उसके बाद भारत पर प्रतिबंध (स्विट्ज़रलैंड के स्थानीय समयानुसार रात करीब 10 बजे; भारत में मंगलवार को तड़के) लगाने का बयान जारी किया.

भारत के निलंबन के बाद केंद्र ने एआईएफएफ मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की

वहीं, फीफा के फैसले के बाद केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) के मामले में तत्काल सुनवाई की मांग की.

(फोटो: पीटीआई)

केंद्र की तरफ से उपस्थित सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और एएस बोपन्ना की पीठ को बताया कि एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में फीफा ने भारत को निलंबित करने का पत्र भेजा है और इसे रिकॉर्ड में लाने की आवश्यकता है.

पीठ ने मेहता से कहा कि मामला बुधवार (17 अगस्त) के लिए सूचीबद्ध है और वह इसे पहले मामले के रूप में लेने की कोशिश करेगी.

मेहता ने कहा कि फीफा का मुख्यालय जिनेवा में है और उसने कुछ फैसले लिए हैं, जो देश के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम हैं और इसे अदालत के सामने लाने की जरूरत है.

उन्होंने कहा, ‘मैं अनुरोध करता हूं कि अदालत में लंबित एआईएफएफ मामले पर तत्काल सुनवाई हो.’

फीफा ‘प्रतिष्ठित’ खिलाड़ियों के रुख पर कायम, मंत्रालय ने सीओए को जवाब दिया

इस बीच, फीफा ने खेल मंत्रालय को सूचित किया है कि वह भारतीय फुटबाल महासंघ के चुनावों के लिए निर्वाचक मंडल में अलग-अलग सदस्यों को शामिल करने के अपने विरोध पर कायम है.

सूत्रों के अनुसार, फीफा की मांगों और भारतीय फुटबॉल में चल रहे विवाद पर प्रशासकों की समिति (सीओए) को सोमवार को मंत्रालय से एक पत्र मिला.

एक सूत्र ने कहा, ‘पत्र में केंद्रीय खेल मंत्रालय ने मंत्रालय के साथ बैठक के दौरान फीफा द्वारा दिए गए सुझावों के बारे में बताया है.’

फीफा चाहता है कि निर्वाचक मंडल के सदस्य राज्य संघों और अन्य संस्थाओं से आएं.

मंत्रालय की ओर से यह पत्र, सीओए द्वारा फीफा की शर्तों और उस पर मंत्रालय के रुख के आधार पर ठोस सलाह मांगने के एक दिन बाद मिला है.

मंत्रालय के एक अधिकारी ने विस्तार से जानकारी दिए बिना कहा, ‘हमने सीओए को लिखित जवाब में भारतीय फुटबाल महासंघ पर अपना पक्ष रखा है, जिसे अगली सुनवाई में अदालत के समक्ष रखा जाएगा.’

इसे सुप्रीम कोर्ट के समक्ष 17 अगस्त को पेश किया जाएगा. यह फुटबाल महासंघ के अध्यक्ष पद के लिए नामांकन का अंतिम दिन है. प्रफुल्ल पटेल को सुप्रीम कोर्ट द्वारा बर्खास्त किए जाने के बाद यह पद खाली पड़ा है.

फीफा ने हालांकि इससे पहले भारतीय फुटबाल महासंघ को भेजे गए एक पत्र में कहा था कि निर्वाचक मंडल में राज्य संघों के प्रतिनिधियों और पूर्व खिलाड़ियों की बराबर संख्या ‘समझदारी नहीं’ है, हालांकि उसने संविधान मसौदे के 50 प्रतिशत के बजाय कार्यकारी समिति में 25 प्रतिशत खिलाड़ियों के प्रतिनिधित्व पर सहमति दी थी.

फीफा का फैसला बेहद कड़ा, लेकिन खेल को व्यवस्थित करने का भी मौका: भूटिया

इस बीच, पूर्व कप्तान बाइचुंग भूटिया ने मंगलवार को भारतीय फुटबाल पर प्रतिबंध लगाने के फीफा के फैसले को ‘बेहद कड़ा’ करार दिया, लेकिन वह इसे देश में इस खेल को व्यवस्थित करने के मौके के रूप में भी देख रहे हैं.

New Delhi: Former Indian football team captain Bhaichung Bhutia speaks during the launch of his political party 'Hamro Sikkim' during a press conference in New Delhi on Thursday. PTI Photo by Arun Sharma (PTI4_26_2018_000103B)

बाइचुंग भूटिया. (फोटो: पीटीआई)

भूटिया ने कहा, ‘यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि फीफा ने भारतीय फुटबॉल को प्रतिबंधित कर दिया है और मुझे लगता है कि यह फैसला बेहद कड़ा है.’

उन्होंने कहा, ‘लेकिन इसके साथ ही मुझे लगता है कि यह अपनी व्यवस्था को सुधारने का बेहतरीन मौका है. यह बेहद महत्वपूर्ण है कि सभी हित धारक महासंघ, राज्य संघ साथ आएं और व्यवस्था को सुधारें तथा भारतीय फुटबॉल की बेहतरी के लिए काम करें.’

पूर्व भारतीय स्टार शब्बीर अली ने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और भारतीय फुटबॉल के लिए करारा झटका बताया.

उन्होंने कहा, ‘जो कुछ भी हुआ वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और यह भारतीय फुटबॉल के लिए एक झटका है. मुझे उम्मीद है कि चुनाव होने के बाद निलंबन जल्द ही खत्म कर दिया जाएगा. अंडर-17 महिला विश्वकप भारत में ही होना चाहिए और मुझे आशा है कि सभी चीजें अनुकूल होंगी और भारत में यह टूर्नामेंट खेला जाएगा.’

पूर्व खिलाड़ी मेहताब हुसैन ने इस फैसले के लिए देश में फुटबॉल का संचालन कर रहे लोगों को जिम्मेदार ठहराया.

मेहताब ने कहा, ‘इसके लिए पूर्व अधिकारी और प्रशासकों की समिति (सीओए) दोनों ही जिम्मेदार हैं. जब फीफा ने अधिकारियों को जल्द से जल्द चुनाव कराने के निर्देश दे दिए थे तो फिर वे किसका इंतजार कर रहे थे. हमने समय गंवाया और अब उसकी सजा भुगत रहे हैं.’

उन्होंने कहा, ‘पूर्व अधिकारियों और सीओए में से किसी को नुकसान नहीं होगा. यह खिलाड़ियों और प्रशंसकों का नुकसान है. यह भारतीय फुटबॉल के लिए करारा झटका है.’

कहां से शुरू हुआ विवाद

मामले की गहराई में जाएं तो इसकी शुरुआत अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ के पूर्व अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल के अपना तीसरा कार्यकाल दिसंबर 2020 में समाप्त होने के बावजूद पद नहीं छोड़ने से हुई और अब उसका सबसे बुरा परिणाम भारत पर फीफा प्रतिबंध के रूप में सामने आया है.

प्रफुल्ल पटेल. (फोटो साभार: फेसबुक)

पटेल ने सुप्रीम कोर्ट में 2017 से लंबित मामले का सहारा लेकर शीर्ष अदालत में नए संविधान को लेकर मसला सुलझने तक चुनाव कराने से इनकार कर दिया था. खेल संहिता के अनुसार किसी भी राष्ट्रीय खेल महासंघ में कोई व्यक्ति अधिकतम 12 साल तक अपने पद पर रह सकता है और पटेल ने वह अवधि पूरी कर ली थी.

इसके बाद मामला अदालत में गया और उससे हस्तक्षेप की मांग की गई. फीफा ने तीसरे पक्ष की दखलअंदाजी को देखते हुए एआईएफएफ को निलंबित कर दिया. पूरा घटनाक्रम:

18 मई 2022: सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने भारतीय फुटबॉल महासंघ प्रमुख प्रफुल्ल पटेल और उनकी कार्यकारी समिति को पद छोड़ने के लिए मजबूर किया. सुप्रीम कोर्ट ने शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश एआर दवे, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी और भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान भास्कर गांगुली की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय प्रशासकों की समिति (सीओए) की भी नियुक्ति की.

23 मई 2022: प्रफुल्ल पटेल ने फीफा प्रमुख जियानी इन्फेंटिनो से अनुरोध किया कि भारतीय फुटबॉल महासंघ का संचालन प्रशासकों की समिति को सौंपे जाने के बाद देश पर प्रतिबंध न लगाया जाए.

29 मई 2022: सीओए सदस्य एसवाई कुरैशी ने कहा कि सितंबर के आखिर तक भारतीय फुटबॉल महासंघ का एक नवनिर्वाचित निकाय होना चाहिए और एक संशोधित संविधान 15 जुलाई तक सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा.

11 जून 2022: सीओए और कुछ संबद्ध इकाइयों के सदस्य राष्ट्रीय खेल संहिता, फीफा और एशियन फुटबॉल कन्फेडरेशन (एएफसी) कानूनों का पालन करने वाले एक नए संविधान के तहत राष्ट्रीय महासंघ के लंबे समय से लंबित चुनावों को जल्द से जल्द कराने पर चर्चा करने के लिए बैठक में शामिल हुए.

21 जून 2022: फीफा-एएफसी दल और भारतीय फुटबॉल का संचालन कर रहे सीओए के बीच पहले दौर की बातचीत अच्छी रही.

22 जून 2022: भारतीय फुटबॉल महासंघ की सदस्य इकाइयां फीफा-एएफसी के दल से मिलीं और उन्हें राष्ट्रीय खेल निकाय में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बारे में बताया.

23 जून 2022: फीफा-एएफसी दल ने व्यवस्था में सुधार के लिए समय सीमा तय की. हितधारकों से 31 जुलाई तक संविधान को मंजूरी देने और 15 सितंबर तक चुनाव कराने के लिए कहा.

13 जुलाई 2022: सीओए ने फीफा को भारतीय फुटबॉल महासंघ का अंतिम मसौदा संविधान भेजा.

16 जुलाई 2022: सीओए ने भारतीय फुटबॉल महासंघ मसौदा संविधान को मंजूरी के लिए सुप्रीम कोर्ट को सौंपा.

18 जुलाई 2022: महासंघ की राज्य इकाइयों ने सीओए द्वारा तैयार अंतिम मसौदा संविधान में कई प्रावधानों पर नाखुशी व्यक्त की, लेकिन कहा कि वे बीच का रास्ता खोजने को तैयार हैं. राज्य संघों के प्रतिनिधित्व वाले सात सदस्यीय पैनल ने फीफा को लिखा था कि अंतिम मसौदे के कई खंड भेदभावपूर्ण और अतार्किक हैं.

21 जुलाई 2022: सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय फुटबॉल महासंघ के चुनावों में तेजी लाने की आवश्यकता का समर्थन किया.

26 जुलाई 2022: फीफा ने भारतीय फुटबॉल महासंघ से सिफारिश की कि सीओए द्वारा संविधान के मसौदे में निर्धारित 50 प्रतिशत के बजाय को उसको अपनी कार्यकारी समिति में 25 प्रतिशत प्रख्यात खिलाड़ियों का प्रतिनिधित्व रखना चाहिए.

28 जुलाई 2022: जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्यकांत की सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि वह तीन अगस्त को चुनाव कराने के तौर-तरीकों पर सुनवाई करेगी.

3 अगस्त 2022: सुप्रीम कोर्ट नेफुटबॉल महासंघ कार्यकारी समिति को सीओए द्वारा प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार चुनाव जल्द से जल्द कराने के निर्देश दिए. शीर्ष अदालत ने कहा कि कार्यकारी समिति के लिए निर्वाचक मंडल में 36 राज्य संघों के प्रतिनिधि और 36 प्रख्यात फुटबॉल खिलाड़ी शामिल होंगे.

5 अगस्त 2022: सुप्रीम कोर्ट ने फुटबॉल महासंघ चुनावों के लिए सीओए की समय-सीमा को मंजूरी दी, चुनाव 28 अगस्त को होंगे और चुनाव प्रक्रिया 13 अगस्त से शुरू होगी.

6 अगस्त 2022: फीफा ने तीसरे पक्ष के प्रभाव के कारण भारतीय फुटबॉल महासंघ को निलंबित करने और अक्टूबर में महिला अंडर-17 विश्व कप की मेजबानी अधिकार को छीनने की धमकी दी.

7 अगस्त 2022: सीओए ने फीफा को आश्वासन दिया कि वह अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ को व्यवस्थित करने के लिए तैयार है.

10 अगस्त 2022: सीओए ने भारतीय फुटबॉल महासंघ के अपदस्थ अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की ‘कार्यवाही में हस्तक्षेप’ करने के लिए अवमानना ​​याचिका दायर की.

11 अगस्त 2022: सुप्रीम कोर्ट ने प्रफुल्ल पटेल की बैठकों में भाग लेने और न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप करने पर राज्य इकाइयों को चेतावनी दी.

13 अगस्त 2022: भारतीय फुटबॉल महासंघ के 28 अगस्त को होने वाले चुनाव के लिए निर्वाचक मंडल में शामिल मतदाताओं की सूची में बाईचुंग भूटिया और आईएम विजयन सहित 36 प्रतिष्ठित खिलाड़ी शामिल.

15 अगस्त 2022: फीफा ने खेल मंत्रालय को सूचित किया कि वह भारतीय फुटबॉल महासंघ के चुनावों के लिए निर्वाचक मंडल में व्यक्तिगत सदस्यों को शामिल करने के विरोध पर अडिग है. फिर उसने ‘तीसरे पक्ष के अनुचित प्रभाव’ के कारण इसे निलंबित किया और भारत से अंडर-17 महिला विश्वकप के मेजबानी अधिकार छीन लिए.