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त्रिपुरा: भाजपा नेता की गाड़ी से 400 किलोग्राम गांजा ज़ब्त किया गया

त्रिपुरा भाजपा की राज्य समिति के उपाध्यक्ष मंगल देबबर्मा रविवार को कमालपुर जा रहे थे, जब धलाई ज़िले में उनकी गाड़ी से गांजे की चार सौ किलोग्राम की खेप बरामद की गई. बताया गया है कि ग्रामीणों को इस बारे में पता लगा, जिसके बाद उन्होंने पुलिस पर देबबर्मा की कार पर छापा मारने का दबाव बनाया.

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: ट्विटर)

नई दिल्ली: धलाई जिले में रविवार को त्रिपुरा भाजपा की राज्य समिति के उपाध्यक्ष मंगल देबबर्मा की गाड़ी से लगभग 400 किलोग्राम गांजे की एक बड़ी खेप जब्त करने के बाद पुलिस ने सोमवार को उनके खिलाफ जांच शुरू की है.

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, उस दिन वे कमालपुर जा रहे थे. बताया गया है कि गाड़ी को जब्त किया गया था लेकिन रात में छोड़ दिया गया.

धलाई जिला पुलिस ने बताया है कि मंगल के वाहन को खोवाई और कमालपुर के बीच एक नाके पर हिरासत में लिया गया. उन्होंने इसमें उनकी संलिप्तता और खेप के बारे में जानकारी से इनकार किया.

बताया गया है कि स्थानीय लोगों ने पुलिस को थाने में गाड़ी रोकने के लिए मजबूर किया था.

समाचार एजेंसी यूएनआई के अनुसार, उधर, मंगल ने कहा कि कुछ निहित स्वार्थ वाले समूहों ने उनका करिअर बर्बाद करने के लिए साजिश रची है.

उन्होंने कहा, ‘मेरा राजनीतिक करिअर बर्बाद करने के लिए अपना स्वार्थ साधने वाले कुछ समूहों ने मेरे खिलाफ साजिश रची है. न मुझे और न ही मेरे ड्राइवर को गाड़ी में पीछे रखी उस खेप के बारे में मालूम था. हमारी गैर-मौजूदगी का फायदा उठाते हुए किसी ने वो गांजे के पैकेट हमारी कार में रख दिए. उन्होंने जरूर पुलिस को बताया होगा, वरना पुलिस को वो कैसे पता, जो मुझे ही पता नहीं था.’

हालांकि, इस बीच भाजपा के नेताओं ने कहा है कि वे हमेशा निष्पक्ष जांच के पक्ष में हैं और अगर मंगल दोषी पाए जाते हैं तो उन पर कानून के अनुसार मामला दर्ज होना चाहिए. नेताओं ने इस घटना को पार्टी को बदनाम करने की साजिश कहा है.

वहीं, सूत्रों ने बताया कि ग्रामीणों ने मंगल के वाहन में 400 किलोग्राम गांजा पाया और पुलिस को कार पर छापा मारने के लिए मजबूर किया. छापा मारे जाने के दौरान मंगल गाड़ी में ही थे, लेकिन किसी तरह वहां से निकलने में कामयाब रहे. बाद में पुलिस उन्हें थाने ले गई.

ग्रामीणों की शिकायत है कि खोवाई-कमालपुर रोड पर गांजे की तस्करी करने में पुलिस भी तस्करों की मदद कर रही है और कुछ वीआईपी वाहनों, जिनमें नेताओं और अफसरों की गाड़ियां भी शामिल हैं, को प्रतिबंधित सामग्री लाने-ले जाने में इस्तेमाल किया जा रहा है.