भारत

पाकिस्तान में जाकर गिरी मिसाइल को दुर्घटनावश दागने को लेकर वायुसेना के तीन अधिकारी बर्ख़ास्त

इस साल नौ मार्च को ग़लती से एक ब्रह्मोस मिसाइल दागी गई थी जो पाकिस्तान के एक इलाके में गिरी थी. कोर्ट ऑफ इंक्वायरी ने घटना की जांच में पाया कि तीन अधिकारियों ने मानक संचालन प्रक्रिया का पालन नहीं किया. अब उनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं.

प्रतीकात्मक फोटो: (रॉयटर्स)

नई दिल्ली: वायु सेना के तीन अधिकारियों को मंगलवार को बर्खास्त कर दिया जिन्हें नौ मार्च को दुर्घटनावश ब्रह्मोस मिसाइल दागे जाने की घटना की उच्चस्तरीय जांच में जिम्मेदार ठहराया गया था. वह मिसाइल पाकिस्तान में गिरी थी.

एक आधिकारिक बयान के अनुसार कोर्ट ऑफ इंक्वायरी (सीओए) ने इस घटना की जांच में पाया कि तीन अधिकारियों ने मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पालन नहीं किया. उस घटना के बाद, रक्षा मंत्रालय ने ‘गहरा खेद’ जताया था वहीं पाकिस्तान ने कड़ा विरोध दर्ज कराया था.

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, ‘नौ मार्च को गलती से एक ब्रह्मोस मिसाइल दागी गई थी. जिसे व्यापक रूप से एक बेहद खतरनाक घटना के रूप में देखा जा रहा है, जिससे दो परमाणु-सशस्त्र पड़ोसियों के बीच टकराव हो सकता था.’

इसमें कहा गया, ‘इस घटना को लेकर जिम्मेदारी तय करने सहित मामले के तथ्यों को स्थापित करने के लिए गठित कोर्ट ऑफ इंक्वायरी (कर्नल) ने पाया कि तीन अधिकारियों द्वारा मानक संचालन प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया.’

बयान के अनुसार, ‘इन तीन अधिकारियों को घटना के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया गया है. केंद्र सरकार ने उनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं. अधिकारियों को 23 अगस्त को बर्खास्तगी के आदेश दे दिए गए हैं.’

वायु सेना ने हालांकि उन अधिकारियों के रैंक और नामों का जिक्र नहीं किया है जिन्हें बर्खास्त किया गया है. लेकिन समझा जाता है कि बर्खास्त अधिकारियों में एक ग्रुप कैप्टन हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, बर्खास्त किए गए अन्य अधिकारी एक विंग कमांडर (लेफ्टिनेंट-कर्नल) और एक स्क्वाड्रन लीडर (मेजर) हैं.

घटना के बाद 9 मार्च की रात पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में भारतीय दूतावास के प्रभारी को ‘उड़ने वाली भारतीय सुपर-सोनिक वस्तु’ द्वारा ‘बिना किसी उकसावे के’ उसके हवाई क्षेत्र के कथित उल्लंघन को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया था.

रक्षा मंत्रालय ने 11 मार्च को कहा था कि तकनीकी खराबी के कारण नियमित रख-रखाव के दौरान दुर्घटनावश एक मिसाइल चल गई थी और पाकिस्तान के एक इलाके में गिरी. 15 मार्च को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में कहा था कि सरकार ने इस घटना को बहुत ही गंभीरता से लिया है तथा उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं.

पाकिस्तानी सेना ने कहा था कि 124 किलोमीटर की दूरी से एक वस्तु भारत की ओर से पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र में पहुंची थी और पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के खानेवाल जिले में मियां चन्नू इलाके के पास गिरी थी. इसमें किसी नागरिक संपत्ति को कोई नुकसान नहीं हुआ था.

उस समय पाकिस्तान ने भारत के दूतावास प्रभारी को तलब कर एक भारतीय मिसाइल द्वारा उसके हवाई क्षेत्र का कथित रूप से बिना उकसावे के उल्लंघन करने पर अपना कड़ा विरोध दर्ज करते हुए कहा था कि इस तरह की ‘गैर-जिम्मेदाराना घटनाएं’ भारत की ‘हवाई सुरक्षा के प्रति उपेक्षा’ को दर्शाती हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)