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भारत पहुंचने के कुछ घंटों के अंदर अमेरिकी पत्रकार को दिल्ली एयरपोर्ट से वापस भेजा गया

अमेरिकी मीडिया कंपनी वाइस के पत्रकार अंगद सिंह को बुधवार रात दिल्ली में उतरने के तीन घंटे के अंदर वापस भेज दिया गया. उनके परिजनों के अनुसार, वे एक पारिवारिक समारोह में शामिल होने आए थे, न कि काम के सिलसिले में.

अंगद सिंह. (फोटो साभार: ट्विटर)

नई दिल्ली: बुधवार, 24 अगस्त की रात अमेरिकी नागरिक और अमेरिकी मीडिया कंपनी वाइस (Vice) के पत्रकार अंगद सिंह को दिल्ली में उनके फ्लाइट से उतरने के कुछ ही घंटों बाद ही आईजीआई एयरपोर्ट से कथित तौर पर वापस भेज दिया गया.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सिंह के परिवार ने आरोप लगाया कि उनकी फ्लाइट रात 8:30 बजे दिल्ली में उतरी थी और तीन घंटे के भीतर उन्हें वापस अमेरिका भेज दिया गया.

सिंह के परिवार ने आशंका जाहिर की है कि शायद उन्हें उनके के पत्रकारिता के काम के चलते भारत में रहने की अनुमति नहीं दी गई है.

उनके एक परिजन ने इस अख़बार को बताया, ‘अंगद सिंह दक्षिण एशिया के समाचार कवर करते हैं. उन्होंने शाहीन बाग प्रदर्शन पर एक डॉक्यूमेंट्री बनाई थी. शायद उसी के कारण सरकार को उनसे नाराजगी हो.’

अंगद के ट्विटर एकाउंट पर वाइस की कई वीडियो रिपोर्ट साझा की गई हैं, जिनमें देश में कोविड-19 के दौरान व्यवस्था की खामियां, महामारी की दूसरी लहर के दौरान अंतिम संस्कारों की बड़ी संख्या, ऑक्सीजन की कमी और ग्रामीण भारत में कोविड से हुई मौतों की कम रिपोर्टिंग से संबंधित ख़बरें हैं.

उनके परिजन ने आगे दावा किया कि कुछ समय पहले देश के दलितों को लेकर एक डॉक्यूमेंट्री बनाने के लिए उन्होंने वीज़ा आवेदन दिया था, जिसे अस्वीकार कर दिया गया था. हालांकि, इस बार वे निजी कारणों से भारत पहुंचे थे न कि पेशेवर काम के सिलसिले में.

एक फेसबुक पोस्ट में अंगद की मां ने उनके बेटे को भारत पहुंचने के फ़ौरन बाद वापस भेजे जाने पर निराशा जाहिर की है.

अंगद सिंह की मां द्वारा की गई पोस्ट. (साभार: फेसबुक)

उन्होंने लिखा, ‘उन्होंने कोई वजह नहीं बताई. लेकिन हम जानते हैं कि वो उसकी अवॉर्ड पाने वाली पत्रकारिता से डरते हैं. वो रिपोर्ट्स जो उसने की हैं और जो वो आगे कर सकता है, उनसे डरते हैं. अपनी मातृभूमि से उसकी मोहब्बत को वो बर्दाश्त नहीं कर सकते. यह वाइस न्यूज़ की बढ़िया रिपोर्टिंग है, जो उन्हें पसंद नहीं है.’

उन्होंने आगे लिखा, ‘सिख होना, वो भी गुरसिख, उस पर भी पत्रकार, सच और इंसाफ के लिए लड़ने वाला पत्रकार होना आसान नहीं है. सच बोलने की कीमत होती है, जो हमें चुकानी होती है.’

उन्होंने अंत में यह सवाल भी किया कि जिस रिपोर्ट ने ‘उन्हें’ नाराज किया, वो कौन-सी हो सकती है.