भारत

सुप्रीम कोर्ट ने शिंदे खेमे के ‘असली’ शिवसेना होने के दावे पर चुनाव आयोग को सुनवाई की अनुमति दी

सुप्रीम कोर्ट ने असली शिवसेना के रूप में मान्यता देने और पार्टी का चुनाव चिह्न ‘तीर-कमान’ आवंटित करने संबंधी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की याचिका की सुनवाई पर आगे बढ़ने के लिए निर्वाचन आयोग को अनुमति देते हुए उद्धव ठाकरे नीत खेमे की इसे रोकने की मांग वाली याचिका ख़ारिज कर दी.

New Delhi: A view of Supreme Court of India in New Delhi, Thursday, Nov. 1, 2018. (PTI Photo/Ravi Choudhary) (PTI11_1_2018_000197B)

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली/मुंबई: उच्चतम न्यायालय ने असली शिवसेना के रूप में मान्यता देने और पार्टी का चुनाव चिह्न ‘तीर-कमान’ आवंटित करने संबंधी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की याचिका की सुनवाई पर आगे बढ़ने के लिए मंगलवार को निर्वाचन आयोग को अनुमति दे दी.

जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने उद्धव ठाकरे नीत खेमे की याचिका खारिज कर दी, जिन्होंने ‘मूल’ शिवसेना होने के शिंदे खेमे के दावे पर फैसला करने से निर्वाचन आयोग को रोकने का अनुरोध किया था.

पीठ में जस्टिस एमआर शाह, जस्टिस कृष्ण मुरारी, जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस पीएस नरसिम्हा भी शामिल थे.

संविधान पीठ ने कहा, ‘हम निर्देश देते हैं कि निर्वाचन आयोग के समक्ष कार्यवाही पर कोई रोक नहीं होगी.’

ठाकरे खेमे की ओर से न्यायालय में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि चुनाव चिह्न आदेश तभी लागू किया जा सकता है, जब दावा करने वाला उसी राजनीतिक दल से हो, लेकिन दावा एक विरोधी खेमा का हो.

उन्होंने कहा, ‘मेरा कहना है कि शिंदे पार्टी में अब नहीं हैं और सदस्यता त्याग दी गई है. ऐसे में, निर्वाचन आयोग उनकी सुनवाई कैसे करेगा?’

सिब्बल ने इस साल जून में महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत करने वाले शिंदे और शिवसेना के कुछ अन्य विधायकों के खिलाफ आयोग्यता नोटिस जारी किए जाने का हवाला देते हुए यह कहा.

निर्वाचन आयोग की ओर से न्यायालय में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने कहा कि आयोग यह फैसला करने के लिए स्वतंत्र है कि किस खेमे में अधिक विधायक हैं.

महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की ओर से पेश हुए सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि आयोग सिर्फ यह फैसला कर रहा है कि कौन सा खेमा ‘मूल’ शिवसेना है और इसलिए उसे शिंदे की याचिका पर आगे बढ़ने की अनुमति दी जाए.

शिंदे खेमे के वकील और वरिष्ठ अधिवक्ता एनके कौल ने दलील दी कि चुनाव चिह्न विधायक की संपत्ति नहीं है और यह किस खेमे से संबद्ध है, उस पर निर्वाचन आयोग को फैसला करना है.

पीठ शिवसेना के शिंदे खेमे की बगावत के कारण महाराष्ट्र में पैदा हुए राजनीतिक संकट से जुड़े लंबित मामलों पर सुनवाई कर रही है. शिंदे नीत खेमे की बगावत के चलते राज्य में महाविकास आघाड़ी की सरकार गिर गई थी.

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, बीते 19 जुलाई को शिंदे ने चुनाव आयोग के समक्ष कार्यवाही शुरू की थी, जिसने तीन दिन बाद उद्धव को नोटिस जारी किया था.

इसके बाद उद्धव खेमे ने चुनाव आयोग को चुनाव चिह्न आदेश के तहत आगे बढ़ने से रोकने के लिए शीर्ष अदालत के समक्ष आवेदन दिया था. अदालत ने मौखिक रूप से चुनाव आयोग को आवेदन पर फैसला होने तक इंतजार करने को कहा था.

शिवसेना का औपचारिक रूप से विभाजन नहीं हुआ है, शिंदे के नेतृत्व वाले गुट को पार्टी के अधिकांश विधायकों का समर्थन प्राप्त है. इसने यह भी दावा किया है कि यह असली शिवसेना है.

शिंदे ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा, ‘हमने कानून के दायरे से बाहर कभी कुछ नहीं किया.’ वहीं, ठाकरे गुट ने कहा कि लड़ाई लोकतंत्र और संविधान के लिए महत्वपूर्ण है.

अदालत के फैसले पर आदित्य ठाकरे ने कहा- सच्चाई के लिए लड़ते रहेंगे

शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने मंगलवार को कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा चुनाव आयोग को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले धड़े की याचिका पर सुनवाई करने की अनुमति देने को किसी भी खेमे की जीत नहीं माना जा सकता.

उन्होंने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग में सच्चाई के लिए लड़ाई जारी रहेगी.

शिवसेना प्रमुख व पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे ने कहा कि शीर्ष अदालत का फैसला न ही किसी की जीत है और न ही किसी की हार है.

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘मामले में दी गई दलीलों का देश में लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा. हम सच के लिए खड़े हैं और सच्चाई की जीत होगी. दलीलों का मंच अदालत से निर्वाचन आयोग में स्थानांतरित हो गया है. हम सुनवाई के लिए तैयार हैं. हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है. हम संविधान में विश्वास करते हैं और पूरी ताकत से सच्चाई के लिए लड़ते रहेंगे.’

फैसले से शिंदे गुट को कोई राहत नहीं मिलेगी: कांग्रेस

महाराष्ट्र में कांग्रेस ने मंगलवार को कहा कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की याचिका पर उच्चतम न्यायालय के फैसले से उनके गुट को कोई फायदा नहीं होगा क्योंकि 16 बागी विधायकों की अयोग्यता का मसला अभी हल नहीं हुआ है.

कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के मुख्य प्रवक्ता अतुल लोंढे ने एक बयान में कहा, ‘एकनाथ शिंदे समेत 16 विधायकों की अयोग्यता का मुद्दा अभी तक हल नहीं हुआ है. उन पर अयोग्यता की तलवार लटक रही है.’

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में मौजूदा शिंदे-देवेंद्र फडणवीस सरकार असंवैधानिक है और ‘उनकी योग्यता पर फैसला आने तक, उन्हें कोई संवैधानिक निर्णय लेने का अधिकार नहीं है.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)