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यूएन के रूस में मानवाधिकार उल्लंघन पर निगरानी संबंधी प्रस्ताव पर भारत ने वोट नहीं दिया

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में यूरोपीय संघ के देशों द्वारा लाए गए प्रस्ताव में रूस में मानवाधिकार उल्लंघनों पर निगरानी रखने के लिए एक स्वतंत्र विशेषज्ञ की नियुक्ति की बात कही गई थी.

जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद का बैठक कक्ष. (फोटो: ohchr.org)

नई दिल्ली: भारत ने शुक्रवार (7 अक्टूबर) को यूएनएचआरसी के रूस के खिलाफ लाए गए मसौदे पर मतदान से खुद को अलग रखा.

रिपोर्ट के अनुसार, उक्त मसौदे में रूस द्वारा अपने यहां मनमानी गिरफ्तारियों, असहमति की आवाजों पर कार्रवाई और यूक्रेन युद्ध के दौरान स्वतंत्र आवाजों पर लगाम कसने के खिलाफ एक स्वतंत्र विशेषज्ञ की नियुक्ति की बात कही गई थी.

47 सदस्यीय मानवाधिकार परिषद ने पिछले सप्ताह यूरोपीय संघ के सभी सदस्य देशों (हंगरी को छोड़कर) द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव को 17-6 वोटों से पास किया था. 24 देशों से मतदान में भाग नहीं लिया था. जिनेवा में मतदान से कुछ समय पहले ही रूसी मानवाधिकार समूह मेमोरियल को 2022 के नोबेल शांति पुरस्कार का सह-विजेता घोषित किया गया था.

मूल प्रस्ताव में रूस में स्वंतत्र मीडिया, गैर-सरकारी संगठनों और विपक्षी समूहों के कामकाज को जबरन खामोश कराने को लेकर चिंता व्यक्त की गई.

मानवाधिकार परिषद ने बहुमत से तय किया कि रूस में अधिकारों के उल्लंघन पर नजर रखने और रिपोर्ट भेजने के लिए एक विशेष व्यक्ति नियुक्त किया जाएगा.

यह पहली बार है जब परिषद ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद पांच स्थायी सदस्य देशों: ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, रूस और अमेरिका में से किसी में मानवाधिकार मुद्दों पर नज़र रखने के लिए एक विशेष प्रतिवेदक (rapporteur) की नियुक्ति की हो.

रूसी राजदूत गेनेडी गैटिलोव ने मसौदा प्रस्ताव को एक ‘निंदनीय प्रस्ताव’ बताया, जिसका मकसद रूस पर दबाव बनाने का एक और तरीका खोजना था.

गैटिलोव ने कहा, ‘यूरोपीय संघ और उसके सहयोगियों द्वारा यह योजना एक स्वतंत्र विदेश और घरेलू नीति का पालन करने को लेकर हमारे देश को दंडित करने का एक और प्रयास है.’