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दिल्ली दंगा: आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या का आरोपी तेलंगाना से गिरफ़्तार

दिल्ली पुलिस ने शहर के उत्तर-पूर्वी हिस्सों में फरवरी 2020 में हुए दंगों के दौरान आईबी के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या में कथित रूप से शामिल 34 वर्षीय मुंतजिम उर्फ मूसा क़ुरैशी फरवरी 2020 से ही फ़रार था. 25 फरवरी 2020 को दंगों के दौरान चांद बाग की पुलिया पर भीड़ ने शर्मा की बर्बर हत्या कर दी थी.

आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा. (फोटो: एएनआई)

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने शहर के उत्तर-पूर्वी हिस्सों में फरवरी 2020 में हुए दंगों के दौरान खुफिया ब्यूरो (आईबी) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या में कथित रूप से शामिल 34 वर्षीय शख्स को तेलंगाना से गिरफ्तार किया है.

अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि आरोपी मुंतजिम उर्फ मूसा कुरैशी चांद बाग का रहने वाला है. उसे तेलंगाना में मीरपेट के गायत्री नगर से सोमवार को गिरफ्तार किया गया.

पुलिस के मुताबिक, 25 फरवरी 2020 को दंगों के दौरान चांद बाग की पुलिया पर भीड़ ने शर्मा की बर्बर हत्या कर दी थी. हत्या के बाद उनका शव पास के ही एक नाले में फेंक दिया गया था, जिसे अगले दिन यानी 26 फरवरी 2020 को बरामद किया गया था.

स्पेशल सेल के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) पीएस कुशवाह ने बताया कि इस हत्या की जांच के दौरान आम आदमी पार्टी के तत्कालीन पार्षद  ताहिर हुसैन समेत 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहा गया है कि शर्मा पर धारदार हथियार से 52 बार वार किए गए थे.

छानबीन और अन्य आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि कुरैशी भी भीड़ में शामिल था और वह फरवरी 2020 से ही फरार था. इस वजह से उसे भगोड़ा घोषित कर दिया गया था. उसकी सूचना देने पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था.

पुलिस ने बताया कि कुरैशी अगवा करने और बलात्कार करने के एक मामले में जेल जा चुका है. जेल में वह बरेली के कुख्यात अपराधी मुजीब से मिला था. जेल से बाहर आने के बाद वह अपने मामा के साथ गाजीपुर मुर्गा मंडी में काम करने लगा था.

पुलिस ने बताया कि मगर अपने खर्चे पूरे करने के लिए उसने आपराधिक घटनाओं को अंजाम देना शुरू कर दिया.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, एक पुलिस अधिकारी ने दावा किया, ‘हमारे पास वॉयस कॉल रिकॉर्डिंग है जहां कुरैशी को शर्मा के बारे में बात करते हुए ‘चलो, मारना है’ और ‘सब आ जाओ’ कहते हुए सुना जा सकता है. वह इस मामले में हमलावरों में से एक है और मुख्य आरोपियों में से एक है.’

डीसीपी (स्पेशल सेल) प्रमोद सिंह कुशवाह ने कहा, ‘सह-आरोपियों की गिरफ्तारी के दौरान कुरैशी की भूमिका सामने आई थी. हमारे पास पर्याप्त सबूत थे, लेकिन वह फरार हो गया. हमारी टीम दंगों के आरोपियों और बड़ी साजिश में शामिल लोगों की तलाश कर रही थी. हमें हाल ही में सूचना मिली थी कि वह छह महीने से तेलंगाना में रह रहा है.’

सूचना के आधार पर एसीपी ललित मोहन नेगी के नेतृत्व में एक टीम को उसकी तलाश में तेलंगाना के मीरपेट भेजा गया था. पुलिस ने कहा कि उन्होंने कई छापे मारे और पाया कि वह हर दिन इलाके में एक केमिस्ट की दुकान पर जाता है. सोमवार (10 अक्टूबर) शाम को पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया.

पूछताछ के दौरान कुरैशी ने पुलिस को बताया कि उसे पहले अपहरण और बलात्कार के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था. जेल में रहते हुए वह एक और अपराधी से मिला और उसकी रिहाई के बाद छोटे-मोटे अपराध करने लगा. कुरैशी ने पुलिस को बताया कि दंगों के दौरान उसके दोस्त सलमान और समीर चांद बाग स्थित उसके घर आए थे.

डीसीपी ने कहा, ‘उन लोगों ने शाम को दंगों में भाग लेने की योजना बनाई. उन्होंने दूसरों को बुलाया और फिरदौस मस्जिद, मुस्तफाबाद के पास इकट्ठा हुए. वे अपने निशाने की तलाश कर रहे थे जब उन्होंने शर्मा को अपने घर की ओर जाते हुए पाया. उन्होंने उन पर हमला कर कई वार किए. हम मामले में सलमान और समीर को पहले ही गिरफ्तार कर चुके हैं.’

पुलिस ने कहा कि कुरैशी दिल्ली में पांच अन्य आपराधिक मामलों में शामिल है.

गौरतलब है कि फरवरी 2020 में राष्ट्रीय राजधानी में हुए इन दंगों में 53 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 700 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे.

चांद बाग में हुए विरोध प्रदर्शन के आयोजक की जमानत याचिका खारिज

इधर, दिल्ली की एक अदालत ने साल 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों से संबंधित एक मामले में बृहस्पतिवार को एक आरोपी की जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि विभिन्न गवाहों ने दावा किया है कि आरोपी चांद बाग में हुए विरोध प्रदर्शन का आयोजक था, जहां भड़काऊ भाषण दिए गए.

अदालत शादाब अहमद नामक व्यक्ति की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो उस कथित साजिश में शामिल होने का आरोपी है, जिसके परिणामस्वरूप दंगे हुए.

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने कहा, ‘सिर्फ जमानत के लिहाज से आरोप-पत्र और उससे संबंधित दस्तावेजों का जितना मैंने अध्ययन किया है, उसके आधार पर मेरा विचार है कि आरोपी शादाब अहमद पर लगे आरोप प्रथमदृष्टया सही हैं. लिहाजा, वर्तमान जमानत याचिका खारिज की जाती है.’

अदालत ने कहा कि विभिन्न गवाहों के बयानों में दावा किया गया है कि आरोपी चांद बाग में हुए विरोध प्रदर्शन के आयोजकों में से एक था, जहां भड़काऊ भाषण दिए गए.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)