राजनीति

चुनावी बॉन्ड योजना: केंद्र सरकार ने हालिया संशोधन के लिए नहीं ली चुनाव आयोग की राय

मोदी सरकार ने चुनावी बॉन्ड योजना में संशोधन करते हुए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में  विधानसभा चुनाव के वर्ष में बॉन्ड की बिक्री 15 अतिरिक्त दिन होने का प्रावधान किया है. गुजरात और हिमाचल प्रदेश में आदर्श आचार संहिता लागू होने के दौरान किए गए इस संशोधन के लिए चुनाव आयोग से चर्चा नहीं की गई थी.

(फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: दस्तावेजों से पता चलता है कि केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने फैसला किया था कि उसे चुनावी बॉन्ड योजना में 7 नवंबर के संशोधन के लिए चुनाव आयोग की सहमति की जरूरत नहीं है. गौरतलब है कि उक्त संशोधन के जरिये चुनावी बॉन्ड की बिक्री की अवधि बढ़ा दी गई थी.

संशोधन को ऐसे समय में अधिसूचित किया गया था जब हिमाचल प्रदेश और गुजरात चुनावों के लिए आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) लागू थी.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, आरटीआई कार्यकर्ता कमोडोर लोकेश बत्रा (सेवानिवृत्त) को आर्थिक मामलों के विभाग से शुक्रवार को सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मिली जानकारी दिखाती है कि प्रस्ताव पर सबसे पहले मार्च 2021 में मंत्रालय के भीतर चर्चा हुई थी और इसे मंजूरी मिली थी. हालांकि, इसकी अधिसूचना इस साल 7 नवंबर को जारी की गई थी और चुनावी बॉन्ड की बिक्री की 23वीं किश्त 9 नवंबर से 15 नवंबर तक चली.

हिमाचल प्रदेश में 12 नवंबर को विधानसभा के लिए मतदान हुआ था और गुजरात में 1 दिसंबर व 5 दिसंबर को वोटिंग होनी है.

ज्ञात हो कि मोदी सरकार ने चुनावी बॉन्ड योजना 2018 में एक संशोधन करते हुए प्रावधान किया है कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभा के चुनावों के वर्ष में बॉन्ड की बिक्री 15 अतिरिक्त दिन और होगी.

इस योजना के तहत केंद्र सरकार द्वारा निर्दिष्ट किए जाने पर बॉन्ड आम तौर पर जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर के महीनों में दस-दस दिनों की अवधि के लिए ब्रिकी के लिए उपलब्ध होते हैं, जिन्हें कोई भी व्यक्ति खरीद सकता है.

मूल योजना में प्रावधान था कि लोकसभा चुनाव वाले वर्ष में बॉन्ड बिक्री के लिए 30 अतिरिक्त दिन प्रदान किए जाएंगे, जबकि नए संशोधन में 15 दिन और जोड़ दिए गए हैं.

मंत्रालय के अधिकारियों ने अक्टूबर और नवंबर की शुरुआत में चुनाव आयोग से सहमति लेने की जरूरत पर जोर दिया था क्योंकि चुनावों की घोषणा हो गई थी और आचार संहिता लागू थी. मंत्रालय ने चुनाव आयोग को सूचित करने का फैसला किया, लेकिन सहमति नहीं मांगी क्योंकि उसने 2021 में इस मामले पर पहले ही चर्चा कर ली थी.

दस्तावेजों के मुताबिक निदेशक (बजट) सुनील बी. चौधरी ने 28 अक्टूबर को लिखा था, ‘यह उल्लेख किया जा सकता है कि पिछले साल (मार्च 2021) में माननीय वित्त मंत्री की मंजूरी के साथ चुनावी बॉन्ड योजना-2018 के खंड 8 में संशोधन का एक प्रस्ताव तैयार किया गया था और मसौदा संशोधन अधिसूचना भी कानून और न्याय मंत्रालय द्वारा भली-भांति जांची गई थी. हालांकि, संशोधन अधिसूचना को जारी/प्रकाशित नहीं किया गया था.’

यह ध्यान में रखते हुए कि चुनाव बॉन्ड योजना न्यायालय में विचाराधीन है और आदर्श आचार संहिता भी लागू है, चौधरी ने संशोधन के लिए कानून मंत्रालय से कानूनी राय और संशोधन को अधिसूचित करने व चुनावी बॉन्ड जारी करने के लिए आदर्श आचार संहिता के आधार पर चुनाव आयोग से सहमति प्राप्त करने के लिए वित्त मंत्री की मंजूरी मांगी.

1 नवंबर को उप निदेशक (बजट) ममता ने संशोधन की अधिसूचना और बॉन्ड जारी करने पर प्रेस विज्ञप्ति के लिए एक मसौदा रखा, जिसमें ‘भारतीय चुनाव आयोग से मंजूरी मांगने’ का उल्लेख था.

उसी दिन, आर्थिक मामलों के सचिव अजय सेठ ने लिखा: ‘चुनाव बॉन्ड की विस्तारित अवधि सभी राजनीतिक दलों को चुनावी चंदे के लिए वैध संसाधनों तक पहुंच बनाने में लचीलापन प्रदान करेगी. योजना में इसी तरह का संशोधन मार्च 2021 में प्रस्तावित किया गया था. जैसा कि इस मामले को चुनाव आयोग द्वारा 2021 मे पहले ही विधिवत देख लिया गया था, इसलिए मामले पर ईसीआई की सहमति के लिए एक और संदर्भ आवश्यक नहीं है.’

सेठ ने लिखा कि बॉन्ड 5 नवंबर से 14 नवंबर और फिर 5 दिसंबर से 14 दिसंबर तक जारी किए जा सकते हैं.

सेठ ने लिखा कि ‘उक्त मामले पर आज वित्त मंत्री से चर्चा हुई. यह महसूस किया गया कि बॉन्ड जारी करने से आदर्श आचार संहिता के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन नहीं होता.’

फाइलों के मुताबिक, चुनाव आयोग ने 17 मार्च 2021 को राज्य विधानसभा चुनाव के दौरान चुनावी बॉन्ड बिक्री का संदर्भ देते हुए वित्त मंत्रालय को यह कहने के लिए पत्र लिखा था कि इसे प्रेस विज्ञप्ति जारी करने पर ‘आदर्श आचार संहिता के कोण’ से कोई आपत्ति नहीं है. हालांकि, चुनाव आयोग ने दो शर्तें रखी थीं- कि कोई भी राजनीतिक पदाधिकारी मामले का जिक्र नहीं करेगा और आदर्श आचार संहिता के सभी प्रासंगिक प्रावधानों का पालन किया जाएगा. 21 मार्च 2021 के एक अन्य पत्र में चुनाव आयोग ने कहा था कि उसने प्रस्तावित संशोधन की सूचना देने वाले मंत्रालय के पत्र की सामग्री को विधिवत नोट कर लिया है.

पिछले साल संशोधन पर चर्चा करते हुए तत्कालीन निदेशक (बजट) व्यासन आर. ने 12 मार्च 2021 को लिखा था कि संशोधन के लिए कानून मंत्रालय से कानूनी राय और चुनाव आयोग से ‘मंजूरी’ की आवश्यकता है क्योंकि विधानसभा चुनावों के कारण आचार संहिता लागू है. गौरतलब है कि असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के चुनाव मार्च और अप्रैल 2021 में हुए थे.

कानून मंत्रालय में एक सहायक कानूनी सलाहकार अर्पित अनंत मिश्रा ने 15 मार्च 2021 को नोट किया था कि प्रस्तावित संशोधन लोकसभा चुनाव वाले वर्ष में चुनावी बॉन्ड की बिक्री के लिए अतिरिक्त 30 दिनों की मंजूरी के अनुरूप है, लेकिन इस पर सॉलिसिटर जनरल की राय की आवश्यकता है.

16 मार्च 2021 को अपनी राय व्यक्त करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने लिखा था, ‘मेरे विचार में राज्य विधानसभा चुनावों में चुनावी बॉन्ड जारी करने के लिए 15 दिनों की अतिरिक्त विंडो की अनुमति देने के लिए योजना में संशोधन करने को लेकर सरकार पर कोई रोक नहीं है.