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भारत को धार्मिक स्वतंत्रता की ‘विशेष चिंता’ सूची से बाहर रखने की अमेरिकी आयोग ने निंदा की

अमेरिका ने चीन, पाकिस्तान और म्यांमार समेत 12 देशों को वहां की धार्मिक स्वतंत्रता की मौजूदा स्थिति को लेकर ‘विशेष चिंता वाले देश’ घोषित किया है, जबकि यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम ने भारत को भी इस सूची डालने की सिफारिश की थी.

(फोटोः रॉयटर्स)

वाशिंगटन: यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (यूएससीआईआरएफ) ने कहा है कि अमेरिकी विदेश विभाग ने अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत ‘विशेष चिंता वाले देशों’ (सीपीसी) की सूची में भारत को शामिल न करके अपनी आंखें मूंद ली हैं.

आयोग के अध्यक्ष नूरी टर्केल ने एक बयान में कहा, ‘नाइजीरिया या भारत को धार्मिक स्वतंत्रता के घोर उल्लंघनकर्ताओं के रूप में मान्यता देने में राज्य विभाग की विफलता का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि वे स्पष्ट तौर पर ‘विशेष चिंता वाले देशों’ में शामिल होने के कानूनी मानकों को पूरा करते हैं.’

उन्होंने आगे कहा, ‘यूएससीआईआरएफ इस बात से बहुत निराश है कि विदेश मंत्री ने हमारी सिफारिशों को लागू नहीं किया और यूएससीआईआरएफ व विदेश विभाग दोनों द्वारा उन देशों में जो धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन की गंभीरता को उल्लेखित किया गया था, उसे पहचाना नहीं.’

उन्होंने कहा, ‘विदेश विभाग की स्वयं की रिपोर्टिंग में नाइजीरिया और भारत में गंभीर धार्मिक स्वतंत्रता उल्लंघन के कई उदाहरण विशेष तौर पर शामिल हैं.’

अमेरिका ने चीन, पाकिस्तान और म्यांमार समेत 12 देशों को वहां की धार्मिक स्वतंत्रता की मौजूदा स्थिति को लेकर ‘विशेष चिंता वाले देश’ घोषित किया है.

अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने शुक्रवार (02 दिसंबर) को कहा था, ‘आज, मैं म्यांमार, चीन, क्यूबा, एरिट्रिया, ईरान, निकारागुआ, उत्तर कोरिया, पाकिस्तान, रूस, सऊदी अरब, ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान को धार्मिक स्वतंत्रता के गंभीर उल्लंघन में शामिल होने के लिए अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता कानून-1998 के तहत ‘विशेष चिंता वाले देश’ घोषित कर रहा हूं.’

ब्लिंकन ने अल्जीरिया, मध्य अफ्रीकी गणराज्य, कोमोरोसा और वियतनाम को भी धार्मिक स्वतंत्रता के गंभीर उल्लंघन में शामिल रहने या उसे बर्दाश्त करने के लिए विशेष निगरानी वाली सूची में रखने की जानकारी दी.

गौरतलब है कि पिछले महीने यूएससीआईआरएफ ने आरोप लगाया था कि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता और संबंधित मानवाधिकार लगातार खतरे में हैं.

यह लगातार चौथी बार है कि आयोग ने भारत में धार्मिक स्वतंत्रता को ‘गंभीर रूप से बिगड़ते’ पाया है.

इस साल अप्रैल में यूएससीआईआरएफ ने अपनी 2022 की वार्षिक रिपोर्ट में सिफारिश की थी कि अमेरिकी विदेश विभाग भारत को ‘विशेष चिंता वाले’ देशों की सूची में डाले.

रिपोर्ट में कहा गया था, ‘2021 में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति काफी खराब हो गई थी. 2021 में भारत सरकार ने हिंदू राष्ट्रवादी एजेंडा को बढ़ावा देकर ऐसी नीतियों का प्रचार किया, जिससे मुस्लिमों, ईसाइयों, सिखों, दलितों और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा.’

साथ ही कहा था, ‘(भारत) सरकार ने मौजूदा और नए कानूनों और देश के धार्मिक अल्पसंख्यकों के प्रति शत्रुतापूर्ण संरचनात्मक बदलावों के जरिये राष्ट्रीय और राज्य स्तरों पर हिंदू राष्ट्र की अपनी वैचारिक दृष्टि को व्यवस्थित करना जारी रखा.’

भारत ने पहले यूएससीआईआरएफ टिप्पणियों को पक्षपाती और गलत करार देते हुए खारिज कर दिया था. हालांकि, अमेरिकी विदेश विभाग के लिए यह अनिवार्य नहीं है कि वह इसकी सिफारिशें लागू करे.

इस साल जुलाई में यूएससीआईआरएफ की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा था, ‘यूएससीआईआरएफ द्वारा भारत पर पक्षपातपूर्ण और गलत टिप्पणी की गई है.’

2020 से ही भारत ‘विशेष चिंता वाले देशों’ की श्रेणी में बना हुआ है. हालांकि, अमेरिकी विदेश विभाग ने अब भी भारत के संबंध में आयोग की सिफारिश को स्वीकार नहीं किया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)