नई दिल्ली: मद्रास हाईकोर्ट ने गुरुवार (6 मार्च) को एक अंतरिम आदेश पारित किया है, जिसमें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को तमिल पत्रिका वेब पोर्टल ‘विकतान’ की पूरी वेबसाइट, जिसे एक व्यंग्यात्मक कार्टून के कारण ब्लॉक कर दिया गया था, तक पहुंच बहाल करने का निर्देश दिया गया है.
ज्ञात हो कि 15 फरवरी को अमेरिका-भारत निर्वासन मुद्दे से संबंधित एक कार्टून के कारण वेबसाइट को ब्लॉक कर दिया गया था. सरकार ने दावा किया था कि कार्टून भारत की संप्रभुता और विदेशी संबंधों के लिए खतरा है.
हालांकि, हाईकोर्ट के जस्टिस डी. भरत चक्रवर्ती ने निर्देश दिया है कि मामले का फैसला होने तक कार्टून को हटाने की शर्त पर वेबसाइट को बहाल किया जाए.
आनंद विकतान प्रोडक्शंस प्राइवेट लिमिटेड और आनंद विकतान पब्लिशर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर याचिका में वेबसाइट (www.vikatan.com) को ब्लॉक करने के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के 25 फरवरी के आदेश को रद्द करने की मांग की गई थी. याचिकाकर्ताओं ने वेबसाइट की सार्वजनिक पहुंच को तत्काल बहाल करने के लिए केंद्र को निर्देश देने की भी मांग की थी.
अदालत ने विकतान को केंद्र सरकार को ईमेल भेजकर आपत्तिजनक पृष्ठों को हटाने की पुष्टि करने का आदेश दिया है.
बार एंड बेंच के अनुसार, जस्टिस चक्रवर्ती ने कहा कि एक बार ऐसा हो जाने पर अदालत के आदेश की प्रमाणित प्रति की आवश्यकता के बिना वेबसाइट पर से रोक हटा ली जाएगी.
हाईकोर्ट के आदेश के बाद विकतान ने एक्स पर एक बयान में लिखा, ‘विकतान प्लस पत्रिका (10.02.2025 को प्रकाशित) के कवर पर 16.02.2025 को प्रकाशित कार्टून को 2025 के WP 7944 मामले में माननीय मद्रास हाईकोर्ट के 06-03-2025 के आदेश के अनुसार हटाया जा रहा है.’
इसमें आगे कहा गया है, ‘इस मामले में क्या विचाराधीन कार्टून संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के तहत संरक्षित है, या केंद्र सरकार के आईटी अधिनियम के प्रावधानों के तहत? यह मामला कि क्या यह धारा 69ए (आईटी अधिनियम) के तहत निषेध है, वर्तमान में मद्रास हाईकोर्ट में विचाराधीन है.’
इस मामले की अगली सुनवाई 21 मार्च को होगी.
10 फरवरी को प्रकाशित इस कार्टून में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बगल में बेड़ियों में जकड़े हुए दिखाया गया था.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सुनवाई के दौरान पत्रिका ने दलील दी कि उसका कार्टून एक तरह का राजनीतिक व्यंग्य था जो अमेरिका से निर्वासित भारतीयों के साथ दुर्व्यवहार से जुड़ा था.
पत्रिका का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता विजय नारायण ने तर्क दिया कि कार्टून से न तो देश की संप्रभुता और अखंडता को कोई नुकसान पहुंचा है और न ही भारत और अमेरिका के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को नुकसान पहुंचा है.
वरिष्ठ वकील ने यह भी कहा कि यह मामला पत्रकारिता की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार से जुड़ा है.
