नई दिल्ली: कोलकाता पुलिस ने रविवार (9 मार्च) को स्वतः संज्ञान लेते हुए जादवपुर विश्वविद्यालय परिसर में ग्राफिटी और पोस्टर लगाने के मामले में छात्र संगठन पीडीएसएफ (प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन) के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़, पुलिस का कहना है कि ये पोस्टर नफरत फैलाने और सार्वजनिक शांति भंग करने के उद्देश्य से लगाए गए थे. पुलिस के अनुसार, इन पोस्टरों और ग्राफिटी के माध्यम से ‘आज़ाद कश्मीर’, ‘फ्री फिलिस्तीन’ और ‘फ़ासिज़्म मस्ट बर्न’ जैसे नारे लिखे थे.
कोई नामजद नहीं, लेकिन पूछताछ संभव
पुलिस ने पीडीएसएफ समर्थकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, लेकिन कोई नामज़द नहीं है. हालांकि, पुलिस ने संकेत दिए हैं कि वे कुछ व्यक्तियों को पूछताछ के लिए बुला सकते हैं.
जादवपुर की डीसीपी बिदिशा कलिता दासगुप्ता के मुताबिक़, एफआईआर भारतीय दंड संहिता (BNS) की धारा 152 और 61(2) के तहत दर्ज की गई है. इन धाराओं का संबंध भारत की संप्रभुता को खतरे में डालने और आपराधिक साजिश से है.
एक सप्ताह पहले भी हुआ था बवाल
यह कार्रवाई उस घटना के एक हफ्ते बाद की गई, जिसमें राज्य के शिक्षा मंत्री बृत्या बसु की कार एक विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों को टक्कर मारते हुए निकल गई थी. एक मार्च की इस घटना में जादवपुर विश्वविद्यालय में पहले वर्ष के अंडरग्रेजुएट छात्र इंद्रनुज रॉय घायल हो गए थे.
द टेलीग्राफ के मुताबिक़, 9 मार्च को रॉय को अस्पताल से छुट्टी मिल गई. डॉक्टरों ने उन्हें कम से कम दो हफ्ते तक बेड रेस्ट करने की सलाह दी है. दो हफ्ते बाद एक नेत्र रोग विशेषज्ञ से परामर्श करने की सलाह दी गई है. उनके बाएं आंख के पास कटने की चोट आई थी, जिसके कारण उन्हें 14 टांके लगाने पड़े.
इंद्रनुज उन छात्रों में शामिल थे जो शिक्षा मंत्री बसु की कार को रोकने की कोशिश कर रहे थे. छात्रों की मांग थी कि मंत्री उन्हें यह बताएं कि पिछले पांच वर्षों से छात्रों के संघ (स्टूडेंट यूनियन) के चुनाव क्यों नहीं हुए और चुनाव कब कराए जाएंगे. जब इंद्रनुज मंत्री की कार को रोकने की कोशिश कर रहे थे, तभी कार तेज़ी से आगे बढ़ी और वह सड़क पर गिर गए, जिससे उन्हें चोटें आईं.
इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के तीन दिन बाद कोलकाता पुलिस ने शनिवार (8 मार्च) को राज्य के शिक्षा मंत्री के खिलाफ दर्ज एफआईआर की जांच शुरू की.
छात्रसंघ चुनाव
उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल में छात्रसंघ के चुनाव कई वर्षों से स्थगित हैं. जादवपुर विश्वविद्यालय में आखिरी चुनाव 2020 में हुआ था, लेकिन राज्य के अधिकांश कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में 2013 के बाद से कोई चुनाव नहीं हुआ.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2013 में कोलकाता के गार्डन रीच इलाके में नामांकन प्रक्रिया के दौरान एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर की गोली मारकर हत्या कर दी गई. इसके बाद टीएमसी सरकार ने छह महीने के लिए छात्र संघ चुनावों को निलंबित कर दिया, लेकिन फिर ये चुनाव दोबारा नहीं हुए. इसके विरोध में एसएफआई ने अप्रैल 2013 में आंदोलन किया.
इसी दौरान, रवींद्र भारती विश्वविद्यालय के छात्र और एसएफआई नेता सुदीप्तो गुप्ता की पुलिस हिरासत में मौत हो गई. सीपीआई (एम) ने इसे हत्या बताया, जबकि पुलिस ने इसे दुर्घटनावश हुई मौत करार दिया.
2019-20 में सरकार ने चार विश्वविद्यालयों— जादवपुर विश्वविद्यालय, प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय, डायमंड हार्बर महिला विश्वविद्यालय और रवींद्र भारती विश्वविद्यालय में चुनाव बहाल किए. इनमें प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय और जादवपुर विश्वविद्यालय के आर्ट्स विभाग में एसएफआई जीती. रवींद्र भारती विश्वविद्यालय में टीएमसीपी (टीएमसी का छात्र संगठन) बिना चुनाव के विजयी घोषित हुआ. डायमंड हार्बर में चुनाव ही नहीं हुए और टीएमसीपी को विजेता घोषित कर दिया गया. 2020 में कोविड-19 महामारी के कारण आगे के चुनाव नहीं हो सके.
जुलाई 2022 में बसु ने कहा था कि सरकार ‘स्वतंत्र और निष्पक्ष’ चुनाव कराना चाहती है. 2023 में एसएफआई ने बसु को ज्ञापन सौंपा. तब मंत्री ने कहा कि पंचायत चुनावों के बाद विश्वविद्यालय चुनाव होंगे. लेकिन अब तक कोई तैयारी नहीं हुई है.
