नई दिल्ली: गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति (पीएससी) ने सिफारिश की है कि जनगणना जल्द से जल्द पूरी की जाए.
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, समिति ने गृह मंत्रालय को सुझाव दिया है कि वह बांग्लादेशी, म्यांमार से आए रोहिंग्या और अन्य देशों से आए प्रवासियों का आंकड़ा तैयार करे.
समिति ने कहा है कि ‘रोहिंग्या अवैध रूप से देश के विभिन्न हिस्सों में बस रहे हैं.’ समिति ने सुझाव दिया है कि गृह मंत्रालय अवैध रूप से बसे रोहिंग्याओं की पहचान कर उन्हें उनके मूल देश भेजने के लिए प्रभावी कदम उठाए.
जनगणना में देरी और बजट
2021 में प्रस्तावित जनगणना को सरकार ने अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया था. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद राधा मोहन दास अग्रवाल की अध्यक्षता वाली पीएससी ने सोमवार (10 मार्च) को गृह मंत्रालय की अनुदान मांगों (2025-26) पर 252वीं रिपोर्ट राज्यसभा में पेश की.
गृह मंत्रालय ने समिति को बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 के केंद्रीय बजट में जनगणना के लिए 1,309.46 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, लेकिन जनगणना की घोषणा न होने के कारण संशोधित बजट 572 करोड़ रुपये कर दिया गया.
2025-26 के लिए यह राशि 574.80 करोड़ रुपये रखी गई है, जो विभिन्न गतिविधियों के खर्चों को ध्यान में रखते हुए तय की गई है.
मंत्रालय ने कहा कि जनगणना से जुड़ी कई तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और तकनीकी अपडेट जारी हैं. जैसे ही जनगणना शुरू होगी, आवश्यकतानुसार अतिरिक्त बजट की मांग की जाएगी.
एनपीआर और एनआरसी के लिए बजट
गृह मंत्रालय ने बताया कि 2025-26 के लिए प्रस्तावित बजट में जनगणना और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) से जुड़े कार्यों को जारी रखने के लिए आवश्यक खर्च शामिल हैं. इसमें कर्मचारियों के वेतन, आईटी और भाषा विभाग, जियोस्पेशियल मैपिंग और असम में एनआरसी डेटा सेंटर की सुरक्षा से जुड़े खर्च शामिल हैं.
सीमा सुरक्षा को मजबूत करने की सिफारिश
समिति ने अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए गृह मंत्रालय के प्रयासों की सराहना की है. साथ ही सरकार से सीमा बाड़बंदी (फेंसिंग) परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने और आवंटित बजट का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करने की सिफारिश की है.
साथ ही, सीमा सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए नियमित निरीक्षण और रणनीतिक प्राथमिकताओं के आधार पर बजट आवंटन की जरूरत बताई.
