चंडीगढ़: रॉक गार्डन की दीवार गिराए जाने पर स्थानीय लोगों में आक्रोश, विरोध प्रदर्शन

चंडीगढ़ प्रशासन ने सड़क चौड़ीकरण और पार्किंग परियोजना के लिए प्रतिष्ठित रॉक गार्डन की चारदीवारी को गिरा दिया है, जिससे स्थानीय लोगों में आक्रोश है. अब रॉक गार्डन की स्थापना करने वाले नेक चंद सैनी की पौत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इसे अपूरणीय क्षति कहा है.

चंडीगढ़ का रॉक गार्डन. (फोटो: संतोषी मरकाम/द वायर)

नई दिल्ली: चंडीगढ़ प्रशासन ने सड़क चौड़ीकरण और पार्किंग परियोजना के लिए प्रतिष्ठित रॉक गार्डन के चारों ओर की दीवार को गिरा दिया है. इस निर्णय के कारण पिछले महीने से ही लोगों में स्थानीय आक्रोश है, जो अब और भी बढ़ रहा है.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, 22 फरवरी को दीवार ढहाने का काम शुरू हुआ, लेकिन यह धीमी गति से आगे बढ़ रही थी. हालांकि, सड़क चौड़ीकरण और पार्किंग परियोजना के लिए 8 और 9 मार्च की दरम्यानी रात को दीवार ढहाने का काम पूरा हो गया, जिससे लोगों में भारी आक्रोश फैल गया.

केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के अनुसार, दीवार का निर्माण निकटवर्ती वन भूमि को घेरने के लिए किया गया है और यह नेक चंद सैनी द्वारा डिजाइन किए गए उद्यान का हिस्सा नहीं है.

हालांकि, चंडीगढ़ के निवासी कई सप्ताह से ध्वस्तीकरण आदेश के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं तथा चिंता जता रहे हैं कि बुनियादी ढांचे के विकास के नाम पर साइट में किसी भी तरह के परिवर्तन की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.

रॉक गार्डन की दीवार को बचाने के लिए मार्च में गठित समूह ‘सेविंग चंडीगढ़’ के वालिंटियर्स, जो विरोध प्रदर्शन में शामिल रहे हैं, ने दीवार को गिराए जाने से रोकने के लिए ‘चिपको आंदोलन’ भी चलाया.

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने आधी रात की कार्रवाई पर नाराजगी व्यक्त की और बताया कि पर्यावरण विभाग द्वारा जारी किए गए चित्रों और साइट पर किए जा रहे वास्तविक कार्य में बड़ी विसंगतियां थीं.

विरोध प्रदर्शन में शामिल हुईं लेखिका-कार्यकर्ता गुरमेहर कौर ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट करके तोड़फोड़ पर अपनी नाराजगी जाहिर की.

उन्होंने लिखा, ‘वे इसे तोड़ रहे हैं. एक दीवार गिरा दी गई, 50 पेड़ काट दिए गए. यह सब ‘विकास’ के नाम पर किया जा रहा है. लेकिन किस कीमत पर? क्या यह वास्तव में एकमात्र तरीका था? क्या हम ऐसा समाधान नहीं खोज सकते थे जिससे हमारे इतिहास का एक हिस्सा न मिट जाए?’

ज्ञात हो कि चंडीगढ़ के रॉक गार्डन की स्थापना नेक चंद ने 1957 में की थी, जब वे एक सरकारी अधिकारी थे. उन्होंने इस परियोजना की शुरुआत गुप्त रूप से अपने खाली समय में की थी, जिसमें उन्होंने स्वतंत्रता के बाद के भारत में तोड़फोड़ से प्रभावित रहे स्थलों से एकत्रित की गई बेकार सामग्री का उपयोग करके कचरे को कला में बदल दिया था.

यह उद्यान शुरू में 5 एकड़ के वन क्षेत्र में बनाया गया था, लेकिन बाद में इसका विस्तार किया गया क्योंकि यह एक सांस्कृतिक प्रतीक बन गया.

नेक चंद की पोती ने खुला पत्र जारी किया

इस बीच, प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में नेक चंद की पोती प्रियंका सैनी ने कहा कि विध्वंस से विरासत स्थल को ‘अपूरणीय क्षति’ हुई है.

उन्होंने लिखा, ‘मैं सिर्फ़ उनके परिवार के तौर पर ही नहीं बल्कि एक नागरिक के तौर पर भी बोल रही हूं जो इस ख़ज़ाने को हो रहे विनाश, लापरवाही और अपूरणीय क्षति से बेहद दुखी है. जिस रचना ने चंडीगढ़ को दुनिया के नक्शे पर ला खड़ा किया, उसे ही नष्ट किया जा रहा है.’

उन्होंने यह भी बताया कि कैसे द इकोनॉमिस्ट ने इसे ताजमहल के बाद भारत का दूसरा सबसे अधिक देखा जाने वाला स्थल बताया है.

उन्होंने पत्र में लिखा, ‘प्रधानमंत्री मोदी जी, जब आपने 2016 में फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद को चंडीगढ़ आमंत्रित किया था, तो आप उन्हें भारत की सुंदरता और रचनात्मकता को दिखाने के लिए रॉक गार्डन लेकर आए थे. आप इसके मेहराबों से गुजरे, इसकी कीमत और महत्व को जाना. जिस गेट से आप उस दिन दाखिल हुए थे, वह अब नहीं है. पार्किंग के लिए रास्ता बनाने के लिए उसे तोड़ दिया गया है.’