नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के संभल में पुलिस ने सदियों से लगने वाले नेजा मेला पर रोक लगा दी है. इस मेले को मुस्लिम समुदाय 11वीं शताब्दी के मशहूर सैनिक सैयद सालार मसूद गाजी की याद में आयोजित करते थे, जिन्हें लोकप्रिय रूप से गजनवी शासक- महमूद गजनवी का भतीजा माना जाता है.
संभल के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने इस वर्ष मेले के लिए अनुमति देने से इनकार करते हुए कहा कि एक ‘आक्रमणकारी’, ‘लुटेरे’ और ‘हत्यारे’ को सम्मानित करने के लिए एक कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी, भले ही इसे पारंपरिक रूप से हर साल आयोजित किया जाता हो.
इस आयोजन पर प्रतिबंध लगाते समय आधिकारिक रुख राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और उसके सहयोगियों के लंबे समय से चले आ रहे विचारों के अनुरूप था. आरएसएस गाजी मियां (सलार मसूद का लोकप्रिय नाम) की कहानी को वर्तमान राजनीति में थोपने और उन्हें एक खलनायक के रूप में पेश करने की कोशिश करती रही है. सलार मसूद की हत्या पिछड़ी जाति के एक हिंदू योद्धा सुहेलदेव ने की थी.
उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में मुसलमान समुदाय के लोग गाजी मियां को संत मानते हैं और होली के बाद हर साल संभल में आयोजित होने वाले नेजा मेले में उनकी विरासत का सम्मान करने के लिए इस्लामी आयतें पढ़ते हैं.
ज्ञात हो कि बहराइच जिले में गाजी के कथित मकबरे पर हिंदू और मुसलमान दोनों समुदाय के लोग आते हैं. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके सहयोगी लंबे समय से गाजी का इस्तेमाल पिछड़ी जाति और दलित हिंदुओं को मुसलमानों के खिलाफ खड़ा करने के लिए करती आई है. भाजपा और आरएसएस पिछले कई दशकों से महाराजा सुहेलदेव को ऐसे महान हिंदुत्व योद्धा और राष्ट्रीय नायक के रूप में पेश करने की कोशिश करती आई है, जिन्होंने बहराइच में गाजी मियां के मार्च को रोक कर अस्थायी रूप से क्षेत्र के इस्लामीकरण को रोक दिया था.
साल 2021 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूछा था कि क्या महाराजा सुहेलदेव और सालार मसूद के ‘अनुयायी’ हाथ मिला सकते हैं? उन्होंने समाजवादी पार्टी को मुस्लिम समर्थक के रूप में दिखाने और अन्य पिछड़ी जाति-आधारित पार्टियों के साथ उसके गठबंधन को असंगत बताने के लिए यह टिप्पणी की थी.
2022 के विधानसभा चुनाव से कुछ हफ़्ते पहले आदित्यनाथ ने एक रैली में कहा था, ‘क्या महाराजा सुहेलदेव के अनुयायी सालार मसूद के अनुयायियों से हाथ मिलाएंगे? क्या वे हाथ मिला सकते हैं? एक सच्चा ‘राष्ट्र भक्त’ कभी भी आक्रमणकारियों के सामने नहीं झुक सकता. वह न तो झुकेगा, न पीछे हटेगा.’
आधुनिक संदर्भ में, भर (पिछड़ी जाति) और पासी (दलित) दोनों ही महाराजा सुहेलदेव के वंशज होने का दावा करते हैं. हालांकि, सुहेलदेव का ऐतिहासिक अस्तित्व रहस्यमयी है. उन्हें अक्सर घोड़े पर सवार और हाथ में भाला लिए हुए लड़ाकू मुद्रा में दर्शाया जाता है. बहराइच के जिला गजेटियर के अनुसार, सुहेलदेव के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है.
बीते दिनों संभल के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) श्रीश चंद्रा ने नेजा मेले को ‘राष्ट्र-विरोधी और ‘कुप्रथा’ बताया. विडंबना यह है कि बहराइच जिले की आधिकारिक वेबसाइट गाजी के मकबरे को पर्यटकों की रुचि के एक प्रमुख स्थान के रूप में प्रचारित करती है और उनकी याद में आयोजित होने वाले वार्षिक मेले को क्षेत्र में मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहारों में से एक के रूप में दर्ज करती है.
बहराइच जिले की वेबसाइट पर गाजी को समर्पित दरगाह की दो तस्वीरें भी दिखाई गई हैं, जिसमें उन्हें ‘ग्यारहवीं शताब्दी का प्रसिद्ध इस्लामी संत और सैनिक’ बताया गया है.
हालांकि, एएसपी चंद्रा ने गाजी के महमूद गजनी के साथ संबंधों का उल्लेख किया. नेजा मेले को बदनाम करने के लिए उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि गजनी ने 11वीं शताब्दी में भारत के कई शहरों पर आक्रमण किया था और हिंदू धार्मिक स्थलों को लूटा था. उन्होंने कहा कि यह निर्णय कानून और व्यवस्था की चिंताओं के मद्देनजर लिया गया है, क्योंकि इस मेले से ‘दूसरे पक्ष की भावनाओं को ठेस पहुंचाती है,’ साथ ही ‘ऐतिहासिक तथ्यों’ को भी ध्यान में रखा गया है.
चंद्रा ने स्थानीय मीडिया से कहा, ‘यह पाया गया है कि यह मेला गाजी सैयद सालार मसूद की याद में मनाया जाता है जो एक आक्रमणकारी और लुटेरा था, जिसने सोमनाथ मंदिर सहित कई मंदिरों को नष्ट कर दिया था. उसने कई लोगों को मार डाला था. ऐसे हत्यारे और लुटेरे की याद में कार्यक्रम आयोजित करना पूरी तरह अनुचित और राष्ट्र विरोधी है.’
पुलिस ने इस तरह का आयोजन करने का प्रयास करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की धमकी दी.
उधर, मेले का आयोजन करने वाली नेजा कमेटी के अध्यक्ष शाहिद हुसैन मसूदी यह समझ नहीं पा रहे थे कि पुलिस ने पारंपरिक रूप से हर साल आयोजित होने वाले एक कार्यक्रम की अनुमति क्यों नहीं दी. परंपरा के अनुसार, होली के बाद पहले मंगलवार को एक निर्दिष्ट स्थान पर झंडा फहराया जाता है. इस साल यह 18 मार्च को होना था.
मंगलवार (18 मार्च) को पुलिस ने उन सड़कों पर गश्त की जहां परंपरागत रूप से झंडा समारोह आयोजित किया जाता था. अधिकारी चंद्रा ने कहा कि नेजा मेले को लेकर स्थानीय लोगों में ‘असंतोष’ था और लोगों ने पुलिस के समक्ष मेले को लेकर आपत्ति भी दर्ज कराई थी. उन्होंने कहा कि आयोजकों को सूचित किया गया है कि उनका यह आयोजन ‘अनुचित’ था.
पुलिस ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में उस गड्ढे को सीमेंट से भर दिया जहां झंडा लगाया जाना था.
समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने नेजा मेले पर प्रतिबंध लगाने के लिए भाजपा सरकार की आलोचना की है. यादव ने कहा, ‘भाजपा हर मेलजोल वाली संस्कृति और हर भाईचारे को नष्ट कर रही है.’
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मेले ऐसे ही स्थान होते हैं जहां विभिन्न धर्मों और जातियों के लोग मिलते-जुलते हैं.
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