नई दिल्ली: कट्टरपंथी हिंदुत्व संगठन करणी सेना के नेतृत्व में भीड़ द्वारा एक योजनाबद्ध हमले में बुधवार (26 मार्च) को आगरा में समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद रामजी लाल सुमन के आवास पर तोड़फोड़ की गई.
वरिष्ठ दलित नेता सुमन ने हाल ही में संसद में 16वीं सदी के राजपूत शासक राणा सांगा का उल्लेख करते हुए कहा था कि लोधी शासक इब्राहिम लोदी के खिलाफ लड़ने के लिए सांगा ने ही बाबर को भारत आमंत्रित किया था, जिसके चलते उनके खिलाफ नाराज़गी देखी गई थी.
बुधवार को रामजी सुमन के आवास पर हुए हमले में भीड़ ने तोड़फोड़ की और पत्थर और ईंटें फेंककर उनके घर के शीशे तोड़ दिए, जिससे उनके घर के बाहर कई कारें क्षतिग्रस्त हो गईं और कुर्सियां टूट गईं.
कट्टरपंथी संगठन द्वारा किए गए इस हमले में एक इंस्पेक्टर और एक सब-इंस्पेक्टर समेत कई पुलिसकर्मी और परिसर में मौजूद अन्य लोग घायल हो गए. हालांकि, घायलों की सही संख्या और क्षतिग्रस्त वाहनों और अन्य घरेलू सामानों की जानकारी नहीं है.
ज्ञात हो कि हिंसा के लिए सुर्खियों में रहने वाले कट्टरपंथी क्षत्रिय संगठन करणी सेना के सदस्यों ने कार, बाइक और बुलडोजरों पर सवार होकर सुमन के घर पर हमला करने से पहले सोशल मीडिया पर कई चेतावनियां जारी कीं थी, जिसमें साफ तौर पर कहा गया था कि वे बुधवार को उनके घर के बाहर एकत्र होंगे.
फेसबुक के माध्यम से करणी सेना के नेता ओकेंद्र सिंह राणा ने अपने समर्थकों से बड़ी संख्या में आगरा पहुंचने की अपील की थी और सोशल मीडिया पर सटीक स्थान और समय भी साझा किया था.
इस संबंध में आगरा पुलिस का कहना है कि उन्होंने करणी सेना के सदस्यों को रोकने की कोशिश की थी और शहर में कई चौकियों पर बैरिकेड भी लगाए थे, लेकिन उपद्रवियों ने वैकल्पिक मार्ग अपनाए, अपनी पहचान छिपाकर परिसर में प्रवेश किया और चौकियों को चकमा देकर भाग निकले.
पुलिस ने कहा कि उन्होंने कुछ उपद्रवियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन सटीक संख्या या विवरण जारी नहीं किया.
बता दें कि इस संबंध में दंगाइयों के खिलाफ दो आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं, लेकिन केवल एक व्यक्ति ओकेंद्र सिंह राणा का नाम लिखा गया है.
सुमन के राणा सांगा को देशद्रोही कहने के बाद ओकेंद्र सिंह राणा ने सांसद को धमकियां दीं
गौरतलब है कि यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ, जब 21 मार्च को राज्यसभा सांसद सुमन ने राणा सांगा का हवाला देते हुए भाजपा के इस सांप्रदायिक प्रचार का मुकाबला करने की कोशिश की कि भारतीय मुसलमान 16वीं सदी के मुगल सम्राट बाबर को अपना आदर्श मानते हैं, सुमन ने कहा कि भारत में मुसलमान पैगंबर मोहम्मद और सूफी परंपरा का पालन करते हैं.
उन्होंने आगे कहा, ‘लेकिन मैं पूछना चाहता हूं कि बाबर को यहां कौन लाया? राणा सांगा ने ही बाबर को इब्राहिम लोदी को हराने के लिए आमंत्रित किया था. इसलिए, अगर मुसलमानों को बाबर का वंशज कहा जाता है, तो हिंदू गद्दार राणा सांगा के वंशज होने चाहिए. हम बाबर की आलोचना करते हैं, लेकिन राणा सांगा की आलोचना क्यों नहीं करते?’
उनके घर पर हमले से दो दिन पहले करणी सेना के सदस्यों ने समर्थन जुटाने के लिए सोशल मीडिया पर जाकर सांसद को खुली धमकियां दीं.
उनके खिलाफ़ हिंसक, अभद्र और अपमानजनक बातों के साथ ही जातिवादी और लैंगिकवादी भाषा का प्रयोग भी किया गया.
ओकेंद्र सिंह राणा ने हमले से एक दिन पहले ही फेसबुक पर एक वीडियो जारी कर क्षत्रिय समुदाय के लोगों से बड़ी संख्या में ट्रैक्टरों पर सवार होकर आगरा में सुमन के घर पहुंचने और अपने साथ भगवा झंडा और एक मजबूत लाठी लाने को कहा था.
ओकेंद्र राणा ने कई बार सांसद रह चुके सुमन के लिए बेहद अपमानजनक जातिवादी अपशब्द ‘म्लेच्छ’ का इस्तेमाल करके भी उनका अपमान किया था. उन्होंने सुमन को ‘कुत्ता’, ‘बाबर का वंशज’ और ‘हलाला की औलाद’ जैसे शब्द भी कहे.
राणा ने ये भी कहा कि राजपूत समुदाय सुमन को तभी माफ़ करेगा, जब वह राजस्थान के रूपबास में राणा सांगा को समर्पित स्मारक पर अपनी नाक रगड़ेगें.
उन्होंने कहा, ‘मैं तुम्हें ऐसे घाव दूंगा कि तुम मुझे जीवन भर कभी नहीं भूल पाओगे.’ उन्होंने अपने समर्थकों से ‘आर-पार की लड़ाई’ या अंत तक लड़ने के लिए तैयार रहने को कहा था.
इसी सिलसिले में बुधवार (26 मार्च) की दोपहर को वादे के मुताबिक, करणी सेना के सदस्यों ने सुमन के घर की ओर कूच किया. उस दिन वे आगरा में नहीं थे, लेकिन उनके बेटे रंजीत सुमन, जो कि पूर्व विधायक हैं और उनके समर्थक आगरा में थे. उपद्रवियों ने पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए और सुमन के घर का गेट तोड़ने की कोशिश की. उन्होंने कम से कम छह कारों की खिड़कियां तोड़ दीं. घर पर पथराव किया और उन्हें रोकने की कोशिश करने वालों पर पत्थर और ईंटें फेंकी.
अमर उजाला ने बताया कि दंगाइयों ने आगरा पहुंचने के लिए करीब 100 कारों और बाइकों का इस्तेमाल किया. इसके अलावा अख़बार ने ये भी बताया कि तोड़फोड़ और पथराव 20 मिनट तक चला.
इस मामले में दो एफआईआर दर्ज की गई हैं. इनमें से एक एफआईआर पुलिस अधिकारी की शिकायत पर ओकेंद्र राणा और अन्य अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ दर्ज की गई है, जबकि दूसरी एफआईआर रंजीत सुमन की शिकायत पर ‘सैकड़ों की संख्या में अनियंत्रित भीड़’ के ख़िलाफ़ दर्ज की गई है.
रंजीत सुमन ने बताया कि दोपहर करीब 2 बजे सैकड़ों लोग जातिवादी अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए और जान से मारने की धमकियां देते हुए गेट पर आ गए.
रंजीत ने अपनी शिकायत में कहा, ‘उन्होंने मुझ पर और मेरे समर्थकों पर जानलेवा हमला किया अगर मेरे समर्थकों ने मुझे समय रहते सुरक्षित नहीं पहुंचाया होता, तो वे मेरी हत्या कर देते.’
इस शिकायत की एक प्रति द वायर के पास है.
उन्होंने कहा कि दंगाइयों ने उनकी एसयूवी का शीशा तोड़ दिया और कार से नकदी और अन्य सामान भी चुरा लिया. उन्होंने आरोप लगाया कि वे फ्लैट में भी घुसे और घरेलू और महंगे सामान दोनों ही लूट ले गए. उन्होंने बताया कि हमला ‘सुनियोजित’ था.
रंजीत ने कहा, ‘दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि कई दिनों से वे सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर उनके पिता को जान से मारने की धमकियां दे रहे थे.’
एक समाचार एजेंसी से बात करते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि पुलिस और प्रशासन को इन धमकियों के बारे में पता था, लेकिन फिर भी हमला हुआ.
एफआईआर में हत्या का प्रयास, दंगा, जान से मारने की धमकी, उपद्रव, डकैती और नुकसान पहुंचाने या हमला करने के इरादे से घर में घुसने के आरोप लगाए गए हैं.
हमले की निंदा करते हुए समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि सुमन पर उनकी दलित पहचान के कारण हमला किया गया.
करणी सेना के सदस्य पहचान छिपाकर और बैरिकेडिंग को चकमा देकर सांसद के घर पहुंचे: पुलिस
हालांकि, अपने बयान के बाद सपा सांसद सुमन ने ये भी स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी का उद्देश्य किसी सांस्कृतिक प्रतीक, जाति या धर्म को निशाना बनाना नहीं था. उन्होंने कहा, ‘बाबर राणा सांगा के निमंत्रण पर भारत आया था. यह एक ऐतिहासिक तथ्य है. मेरा किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का इरादा नहीं था.’
उधर, आगरा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त संजीव त्यागी ने कहा कि सुमन की टिप्पणियों से नाराज करणी सेना के नेतृत्व में भीड़ हंगामा करने के लिए सीट पर पहुंची थी.
अधिकारी ने कहा कि पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए विभिन्न स्थानों पर बैरिकेडिंग लगाई थी और कुछ चौकियों पर उन्हें रोका गया.
संजीव त्यागी के अनुसार, करणी सेना के कुछ सदस्यों को हिरासत में लिया गया है, लेकिन अन्य लोग अपनी पहचान छिपाकर, पुलिस बैरिकेड्स को चकमा देकर या वैकल्पिक मार्गों से सांसद के घर तक पहुंचने में कामयाब रहे.
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त त्यागी ने कहा कि पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बल प्रयोग किया और उन्हें पीछे धकेल दिया. पत्रकारों ने जब अधिकारी से पूछा कि सोशल मीडिया पर खुली धमकियां देने के बाद दंगाई सड़क मार्ग से सुमन के घर तक 15 किलोमीटर की दूरी कैसे तय करने में कामयाब रहे, तो उन्होंने कहा कि उनमें से कुछ चेकपॉइंट्स को चकमा देने में कामयाब रहे या आवास तक पहुंचने के लिए अन्य साधनों का इस्तेमाल किया गया.
संजीव त्यागी का कहना था कि उन्होंने एक बड़ी घटना को होने से रोका है. उस दिन सांसद के आवास के मुख्य द्वार पर सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात उपनिरीक्षक दिनेश कुमार ने बताया कि दोपहर करीब 1:20 बजे ओकेंद्र सिंह राणा के नेतृत्व में भीड़ गेट पर पहुंची और विरोध प्रदर्शन करते हुए घर में घुसने की कोशिश की.
कुमार ने बताया कि वहां तैनात पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया, लेकिन राणा और अन्य लोगों ने घर पर पत्थर और ईंटें फेंकनी शुरू कर दीं. इंस्पेक्टर आलोक सिंह के हाथ में चोट आई, जबकि कुमार के सिर से खून बहने लगा.
कुमार के मुताबिक, मौके पर मौजूद अन्य लोग, जिनमें पुलिसकर्मी और अधिकारी शामिल थे, जिन्होंने भीड़ को रोकने की कोशिश की, वे भी उपद्रव के कारण घायल हो गए. उन्होंने बताया कि दंगाइयों ने घर के पास खड़ी गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया, घर की खिड़कियों के साथ-साथ कारों को भी तोड़ दिया.
उन्होंने कहा कि यह सब वीडियो में कैद हो गया और स्थानीय स्तर पर लगाए गए कैमरों में भी.
यह मामला शरारत, जानबूझकर चोट पहुंचाने और लोक सेवक द्वारा जारी किए गए आदेशों की अवज्ञा करने के आरोपों के तहत दर्ज किया गया है. इन सभी के लिए दो साल या उससे कम की जेल की सजा हो सकती है.
विपक्ष ‘मुगल सोच में डूबा हुआ’ है, जिसने ‘राष्ट्र की पहचान’ को चोट पहुंचाई है: केशव मौर्य
मालूम हो कि जिस दिन सुमन के घर पर हमला हुआ, उस दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक आधिकारिक समारोह में भाग लेने आगरा में थे.
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक्स पर एक पोस्ट में इस ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा, ‘क्या मुख्यमंत्री का प्रभाव क्षेत्र दिन-प्रतिदिन कम होता जा रहा है या फिर अब ‘निवर्तमान मुख्यमंत्री’ की कोई नहीं सुन रहा है? अगर वे अभी भी मुख्यमंत्री हैं तो तुरंत कार्रवाई करें और एआई की मदद से दोषियों की पहचान कर उन्हें दंडित करें, अन्यथा यह माना जाएगा कि पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) सांसद के खिलाफ यह सब उनकी अनुमति से हुआ है.’
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी का उद्देश्य किसी ऐतिहासिक व्यक्ति का अपमान करना नहीं है.
उन्होंने कहा, ‘समाजवादी पार्टी मेवाड़ के राजा राणा सांगा की वीरता और देशभक्ति पर सवाल नहीं उठा रही है. भाजपा ने हमेशा इतिहास के कुछ विषयों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ लेने और देश को धार्मिक-जातिगत आधार पर बांटने के लिए किया है. हमारे सांसद ने केवल एकतरफा इतिहास और एकतरफा व्याख्या का उदाहरण देने की कोशिश की है. हमारा कोई भी प्रयास राजपूत समाज या किसी अन्य समाज का अपमान करने का नहीं है.’
दूसरी ओर, भाजपा नेताओं ने समाजवादी पार्टी पर जातिगत विद्वेष फैलाने और अतीत के हिंदू शासकों का अपमान करने का आरोप लगाया.
सुमन के घर पर हमले के एक दिन बाद उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, ‘तुष्टीकरण और मुगल सोच में डूबा विपक्ष ‘राष्ट्रीय गौरव’ महाराणा प्रताप के पूर्वजों, खासकर एकलिंग महादेव के उपासक ‘राणा सांगा’ का अपमान करके न केवल इतिहास बल्कि राष्ट्र की पहचान को भी नुकसान पहुंचा रहा है.’
हालांकि, मौर्य ने तोड़फोड़ के बारे में कुछ नहीं कहा.
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