नई दिल्ली: मलयालम भाषा की फिल्म ‘L2- एम्पुरान’ से हिंदू दक्षिणपंथी समूहों और भाजपा की शिकायतों के बीच ख़बर आ रही है कि इस फिल्म के सह-निर्माता गोकुलम गोपालन से जुड़े ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छापेमारी की है. वहीं, फिल्म के निर्देशक पृथ्वीराज सुकुमारन को आयकर नोटिस मिला है.
‘L2- एम्पुरान’ में कुछ ऐसे दृश्य हैं, जो 2002 के गुजरात दंगों से प्रेरित लगते हैं. इन दंगों के दौरान नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे. दक्षिणपंथी संगठन, खासतौर पर आरएसएस से जुड़े समूह ‘L2- एम्पुरान’ पर ‘हिंदू-विरोधी’ और ‘भारत विरोधी’ होने का आरोप लगा चुके हैं.
गोपालन के यहां छापेमारी क्यों?
इंडियन एक्सप्रेस ने ईडी के सूत्रों के हवाले से लिखा है कि यह छापेमारी विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के उल्लंघन के एक मामले से जुड़ी है, जिसमें गोपालन और उनकी कंपनी श्री गोकुलम चिट एंड फाइनेंस को लिमिटेड पर आरोप हैं.
अधिकारियों ने बताया कि यह मामला करीब 1,000 करोड़ रुपये की अवैध विदेशी लेन-देन और अप्रवासी भारतीयों (एनआरआई) से जुड़े वित्तीय उल्लंघनों से संबंधित है. इसके अलावा, ईडी इस कंपनी के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी और जालसाजी के मामलों की भी जांच कर रही है.
केरल ईडी की टीम ने चार अप्रैल की सुबह इस छापेमारी की शुरुआत की. कम से कम 10 अधिकारी चेन्नई के कोडंबक्कम इलाके में स्थित श्री गोकुलम चिट एंड फाइनेंस के कार्यालय पहुंचे. एक अन्य टीम चेन्नई के नीलंकराई इलाके में गोपालन के फार्महाउस पर पहुंची.
गोपालन एक बड़े व्यवसायी हैं, जिनका कारोबार हॉस्पिटैलिटी, हेल्थकेयर, शिक्षा, मीडिया, सिनेमा, लॉजिस्टिक्स और परिवहन क्षेत्रों में फैला हुआ है. उनकी कंपनी श्री गोकुलम ग्रुप दक्षिण भारत में काफी प्रसिद्ध है और इसकी चिट फंड सेवा हजारों ग्राहकों को भारत और विदेशों में सुविधा देती है.
निर्देशक पृथ्वीराज को आयकर नोटिस
ईडी की छापेमारी के अगले दिन निर्देशक पृथ्वीराज को आयकर नोटिस मिला है, जिसमें 2022 में रिलीज़ हुई उनकी तीन फिल्मों— जन गण मन, गोल्ड और कडुवा से हुई कमाई को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है. यह नोटिस पृथ्वीराज प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी इन तीन फिल्मों में उनके सह-निर्माता की भूमिका से जुड़ा है.
बताया जा रहा है कि इन फिल्मों में अभिनय के लिए उन्होंने कोई सीधा भुगतान नहीं लिया, बल्कि प्रॉफिट शेयरिंग के तहत हिस्सा लिया.
बताया जा रहा है कि यह नोटिस दिसंबर 2022 में मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में शुरू की गई एक बड़ी जांच का हिस्सा है , जिसके तहत केरल और तमिलनाडु में कई जगहों पर छापेमारी हुई थी. उन छापों में प्रसिद्ध निर्माताओं एंटनी पेरुंबवूर, एंटो जोसेफ, लिस्टिन स्टीफन और पृथ्वीराज के घरों और दफ्तरों की तलाशी ली गई थी.
गोपालन और पृथ्वीराज के खिलाफ यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब उनकी को-प्रोड्यूस फिल्म ‘L2- एम्पुरान’ विवादों में है. फिल्म 27 मार्च को रिलीज़ हुई थी. यह फिल्म 2019 में आई ब्लॉकबस्टर ‘लुसिफर’ की सीक्वल है. इसे प्रसिद्ध मलयालम अभिनेता मोहलनाल ने मुख्य भूमिका में निभाया है.
यह फिल्म एक राजनीतिक एक्शन-थ्रिलर है और इसे तीन-भाग वाली ट्रिलॉजी के रूप में बनाया जा रहा है. इस फिल्म के सह-निर्माता गोपालन, एंटनी पेरुम्बवूर और लाइका प्रोडक्शंस के सुबासकरण अलिराजा हैं.
फिल्म के रिलीज़ के बाद, कुछ दक्षिणपंथी समूहों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े संगठनों ने इस पर हिंदू विरोधी होने और 2002 के गुजरात दंगों को गलत तरीके से दिखाने का आरोप लगाया.
ऑर्गनाइज़र ने निर्देशक को बताया- राष्ट्र-विरोधियों की आवाज़
आरएसएस से संबद्ध पत्रिका ‘ऑर्गनाइज़र’ ने फिल्म के निर्देशक पृथ्वीराज सुकुमारन को ‘राष्ट्र-विरोधियों की आवाज़’ बताया था.
पत्रिका ने लिखा था, ‘यह इस तथ्य से स्पष्ट होता है कि वे ‘सेव लक्षद्वीप’ अभियान के प्रमुख चेहरों में से एक थे. इस अभियान के जरिए केंद्र सरकार द्वारा द्वीपों के आधुनिकीकरण के लिए लाए गए प्रगतिशील सुधारों का विरोध किया गया और इसे सांप्रदायिक रंग दिया गया.’
‘सीएए आंदोलन के दौरान भी उन्होंने विरोधियों को ‘उठ खड़े होने’ के लिए प्रेरित किया था. उन्होंने जामिया के छात्रों का समर्थन किया था और कहा था- क्रांति देश में ही जन्म लेती है…’
29 मार्च को ‘ऑर्गनाइज़र’ में प्रकाशित एक लेख में फिल्म पर तीखा हमला किया गया था. इस लेख में लिखा गया कि हालांकि फिल्म की शुरुआत में यह डिस्क्लेमर दिया गया कि फिल्म में दिखाए गए सभी दृश्य और पात्र काल्पनिक हैं, लेकिन इसके बाद जो दिखाया गया, वह ‘एक सोची-समझी विचारधारा का ज़हर’ जैसा लगा.
कांग्रेस और लेफ्ट ने फिल्म को सराहा
कांग्रेस ने फिल्म की ‘सच्चाई’ दिखाने के लिए सराहना की है. केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन तो 29 मार्च, 2025 को अपने परिवार के साथ तिरुवनंतपुरम के लुलु मॉल में स्थित थिएटर में यह फिल्म देखने गए थे.
फिल्म देखने के बाद मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर अपने विचार साझा किए. उन्होंने कहा कि एम्पुरान मलयालम फिल्म उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही है. उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि फिल्म में देश में हुई एक अत्यंत क्रूर नरसंहार का संदर्भ दिया गया है, जिससे कुछ समूह नाराज हैं.
विजयन ने फिल्म और इसके निर्माताओं के खिलाफ चल रहे सांप्रदायिक नफरत अभियान की निंदा की और इसे लोकतंत्र के लिए हानिकारक बताया. उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक मौलिक अधिकार है और इसे संरक्षित किया जाना चाहिए.
मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया था कि फिल्म निर्माताओं पर पुनः सेंसरशिप और संपादन के लिए दबाव डाला जा रहा है, जो चिंता का विषय है. उन्होंने कहा कि कलाकारों और उनके कार्यों पर इस प्रकार का हमला लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है.
गुजरात दंगों के बारे में क्या दिखाया गया है?
फिल्म की शुरुआत में ही जायद मसूद नामक एक किरदार (इस किरदार को निर्देशक पृथ्वीराज सुकुमारन ने निभाया है) के बचपन की कहानी दिखाई जाती है. मसूद का पूरा परिवार एक दंगे में मारा जाता है.
खबरों के मुताबिक़, फिल्म ने कभी भी स्पष्ट रूप से नहीं बताया कि मसूद की पिछली कहानी गुजरात में हुई थी – फ्लैशबैक को बस ‘2002-भारत’ के रूप में पेश किया गया है. लेकिन फिल्म के शुरुआती क्रेडिट में हिंदू तीर्थयात्रियों के साथ जलती हुई ट्रेन के दृश्य और दंगों की ख़बर वाली अखबारों की कतरनों को दिखाया गया है, जो 2002 के दंगों से एक स्पष्ट संबंध बनाता है.
मालूम हो कि गुजरात में दंगे 27 फरवरी, 2002 को तब शुरू हुए जब गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस के एक डिब्बे में आग लगा दी गई, जिसमें अयोध्या में एक कार्यक्रम से लौट रहे 59 आरएसएस कारसेवकों की मौत हो गई. अगले कुछ दिनों में पूरे राज्य में ‘जवाबी हिंसा’ की लहरें उठीं.
दंगों के दौरान सबसे घातक नरसंहार 28 फरवरी को अहमदाबाद के नरोदा पाटिया इलाके में हुआ था. इस हत्याकांड के दौरान नौ महीने की गर्भवती कौसर बानो का बलात्कार किया गया और उसकी हत्या कर दी गई. एम्पुरान फिल्म में भी एक गर्भवती महिला के बलात्कार और हत्या को दर्शाया गया है.
2012 में एक ट्रायल कोर्ट ने नरोदा पाटिया नरसंहार के लिए 32 व्यक्तियों को दोषी ठहराया और सजा सुनाई, हालांकि बाद में कुछ दोषियों के फैसले को पलट दिया गया.
विशेष न्यायाधीश ज्योत्सना याग्निक ने अपने फैसले में लिखा, ‘यह मानवाधिकारों के उल्लंघन की एक स्पष्ट घटना थी क्योंकि एक दिन के भीतर 97 लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी, जिसमें असहाय महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग शामिल थे. हिंसा के इस अमानवीय और क्रूर कृत्य की पराकाष्ठा 20 दिन के एक शिशु की हत्या में परिलक्षित हुई.’
2012 में दोषी ठहराए गए लोगों में बाबूभाई पटेल उर्फ बाबू बजरंगी भी शामिल था, जो उस समय गुजरात में बजरंग दल के नेता था और हिंसा के पीछे मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक था. 2018 में उसकी आजीवन कारावास की सजा को 21 साल की सजा में बदल दिया गया. पटेल 2019 से मेडिकल आधार पर जमानत पर बाहर है.
फिल्म में भी हिंसक भीड़ का नेतृत्व कर रहे युवक बलराज को बाबा बजरंगी के रूप में संदर्भित किया गया है, और उसे एक दक्षिणपंथी पार्टी का नेता बताया गया है. हालांकि विरोध के बाद फिल्म में बाबा बजरंगी का नाम बलदेव कर दिया गया है.
फिल्म के आलोचकों का कहना है कि यह फिल्म हिंदुओं द्वारा मुसलमानों पर की गई हिंसा पर केंद्रित है. लेकिन गोधरा अग्निकांड और अन्य घटनाओं, जिनमें हिंदुओं की हत्या की गई थी, उन्हें नजरअंदाज किया गया है.
कट, म्यूट और माफी
विवाद के बाद गोपालन ने सार्वजनिक रूप से कहा कि फिल्म किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए नहीं बनाई गई थी और आवश्यक बदलाव किए जाएंगे. इसके बाद निर्माताओं ने फिल्म से 2:08 मिनट का हिस्सा हटा दिया और कुछ संवादों को म्यूट कर दिया.
अभिनेता मोहनलाल ने भी माफी मांग ली है. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी करते हुए कहा कि फिल्म में शामिल कुछ राजनीतिक और सामाजिक विषयों से उनके प्रियजनों को कष्ट पहुंचा है, जिसके लिए वे क्षमा चाहते हैं. मोहनलाल ने यह भी उल्लेख किया कि उन्होंने और फिल्म की टीम ने मिलकर निर्णय लिया है कि ऐसे विषयों को फिल्म से हटा दिया जाएगा.
उन्होंने कहा, ‘एक कलाकार के रूप में यह मेरा कर्तव्य है कि मेरी कोई भी फिल्म किसी राजनीतिक आंदोलन, विचारधारा या संप्रदाय के प्रति द्वेष न रखे.’
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़, फ्लैशबैक की शुरुआत में लिखे ‘2002 का भारत’ को बदलकर ‘कुछ साल पहले’ कर दिया गया है. लूटपाट और वीरान दुकानों वाले दृश्य को छोटा कर दिया गया है. एक धार्मिक स्थल (मंदिर) और उसके सामने से दंगाइयों की गाड़ियां गुजरने वाले दृश्य हटा दिए गए हैं. ओपनिंग क्रेडिट से भाजपा सांसद सुरेश गोपी और आईआरएस अधिकारी ज्योतिष मोहन को धन्यवाद देने वाला टेक्स्ट हटा दिया गया है. दंगों के दौरान महिलाओं पर हिंसा दर्शाने वाले कई दृश्य, जिनमें 29 सेकंड का एक लंबा दृश्य भी शामिल था, हटा दिए गए हैं. नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) का जिक्र म्यूट कर दिया गया है.
