गृह मंत्रालय ने गुजरात दंगा पीड़ितों के बच्चों, परिजनों को सरकारी भर्ती में मिलने वाली छूट वापस ली

साल 2002 के गुजरात दंगों के पीड़ितों को सरकारी भर्ती में आयु में छूट, अतिरिक्त अनुग्रह राशि सहित अन्य लाभ दिए जाते थे. गृह मंत्रालय ने हाल ही में जारी एक आदेश में दंगों में मारे गए लोगों के बच्चों या रिश्तेदारों को विभिन्न आधिकारिक पदों पर भर्ती के लिए दी गई आयुसीमा में छूट को रद्द कर दिया.

2002 में दंगाई भीड़ द्वारा इमारतों में आग लगा दिए जाने के बाद गुजरात के अहमदाबाद की तस्वीर. फोटो: अक्सी ग्रेट/विकिमीडिया कॉमन्स

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हाल ही में जारी एक आदेश में घोषणा की है कि साल 2002 के गुजरात दंगों में मारे गए लोगों के बच्चों या परिजनों, रिश्तेदारों को विभिन्न आधिकारिक पदों पर भर्ती के लिए दी गई आयु में छूट को रद्द कर दिया गया है. 

28 मार्च को केंद्रीय गृह मंत्रालय के उप सचिव पी. वेणुकुट्टन नायर द्वारा जारी इस आदेश में गुजरात के मुख्य सचिव को संबोधित किया.

नायर ने मंत्रालय द्वारा साल 2007 में जारी किए गए पहले के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि आयु में छूट को तत्काल प्रभाव से वापस ले ली गई है. उन्होंने कहा कि ‘आवश्यक आयु में छूट देने का लाभ अर्धसैनिक बल, इंडिया रिजर्व (आईआर) बटालियन, राज्य पुलिस बल, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम और अन्य राज्य एवं केंद्र सरकार के विभागों में भर्ती पर लागू होता था.’

नायर के आदेश में यह नहीं बताया गया है कि सरकार के इस निर्णय के पीछे क्या कारण है.  

भर्ती में आयु में छूट, अतिरिक्त अनुग्रह राशि जैसे अन्य लाभों के साथ गुजरात दंगों के पीड़ितों को दिए जाते थे.  गुजरात दंगों के दौरान राज्य में सैकड़ों लोग मारे गए थे, जिनमें अधिकांश मुस्लिम समुदाय के लोग थे.

ह्यूमन राइट्स वॉच ने दंगों के दस साल बाद कहा था कि ‘गुजरात के अंदर मामलों की जांच और मुकदमा चलाने के प्रयास रोक दिए गए थे और मामलों में शामिल कार्यकर्ताओं और वकीलों को परेशान किया गया और धमकाया गया था.’ 

इसने यह भी उल्लेख किया कि उन दस वर्षों में ‘मुस्लिम विरोधी हिंसा में गुजरात राज्य के अधिकारियों की मिलीभगत के सबूत सामने आए.’

यह भी आरोप लगाया गया था कि तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दंगों के लिए जिम्मेदार थे. लेकिन मोदी ने इससे इनकार किया है.

गौरतलब है कि पॉडकास्टर लेक्स फ्रिडमैन को दिए गए एक हालिया साक्षात्कार के दौरान मोदी ने कहा कि गुजरात में सांप्रदायिक दंगों का एक लंबा इतिहास रहा है, उनके मुख्यमंत्री बनने के पहले से ही. मोदी ने हिंसा से पहले आतंकवादी हमलों की ‘पृष्ठभूमि’ की ओर इशारा किया.

साल 2022 के एक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने दंगों की जांच कर रही एक विशेष जांच दल की क्लोजर रिपोर्ट को बरकरार रखा था, जिसमें कहा गया था कि उन्हें मोदी के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला.