नई दिल्ली: एक कैथोलिक संगठन ने कहा है कि दिल्ली पुलिस ने ईसाइयों को पाम संडे के अवसर पर शहर में पैदल जुलूस निकालने की अनुमति नहीं दी. संगठन ने इस कदम को ‘अनुचित’ और ‘चौंकाने वाला’ बताया.
रविवार (13 अप्रैल) को जारी एक बयान में कैथोलिक एसोसिएशन ऑफ द आर्चडायोसिस ऑफ दिल्ली (सीएएडी) ने पुलिस द्वारा ‘कानून और व्यवस्था तथा यातायात संबंधी चिंताओं’ के आधार पर क्रॉस जुलूस निकालने की अनुमति न देने पर नाराजगी व्यक्त की.
एसोसिएशन ने कहा कि ‘पुलिस द्वारा दिए गए इसके पीछे का कारण स्वीकार करना मुश्किल है, खासकर तब जब अन्य समुदायों और राजनीतिक समूहों को नियमित रूप से जुलूस और रैलियों की अनुमति दी जाती है, यहां तक कि कार्य दिवसों में व्यस्त घंटों के दौरान भी.’
संगठन ने आगे कहा, ‘ईसाई अब सवाल करते हैं कि क्या धार्मिक स्वतंत्रता के उनके संवैधानिक अधिकार को समान रूप से बरकरार रखा जा रहा है?’
ज्ञात हो कि पाम संडे, ईस्टर संडे से एक सप्ताह पहले मनाया जाता है और इस साल यह दिन 13 अप्रैल को पड़ा. यह ईसाइयों के लिए पवित्र सप्ताह की शुरुआत का प्रतीक है.
सीएएडी के अनुसार, दिल्ली में क्रॉस जुलूस का रास्ता पुरानी दिल्ली के सेंट मैरी चर्च से नई दिल्ली के गोल मार्केट इलाके में स्थित सेक्रेड हार्ट कैथेड्रल तक है, जहां श्रद्धालु पैदल जाते है.
सीएएडी ने अपने बयान में कहा, ‘एक दशक से भी अधिक समय से वार्षिक क्रॉस का रास्ता अत्यंत अनुशासन, शांति और अधिकारियों के साथ पूर्ण सहयोग के साथ आयोजित किया जाता रहा है. हमारे कार्यक्रम से जुड़ी यातायात बाधा या कानून-व्यवस्था की समस्या की एक बार भी रिपोर्ट नहीं आई है.’
इसमें आगे कहा गया है, ‘इस वर्ष अनुमति न देना पक्षपातपूर्ण और अनुचित है, जो समान व्यवहार और धार्मिक स्वतंत्रता के सिद्धांतों पर नकारात्मक प्रभाव डालता है.’
विपक्षी दलों के नेताओं ने की इस फैसले की निंदा
दिल्ली पुलिस के इस फैसले की आलोचना करते हुए कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा है कि यह कोई ‘अकेली घटना’ नहीं है बल्कि एक ‘लक्षित भेदभाव’ है.
वेणुगोपाल ने दिल्ली पुलिस के फैसले का विरोध करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है. कांग्रेस नेता ने कहा कि पिछले 15 सालों से शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किए जा रहे जुलूस को अनुमति देने से इनकार करने के लिए कोई ‘ठोस कारण’ नहीं थे.
वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर अमित शाह को लिखे अपने पत्र को साझा करते हुए कहा, ‘यह महज अनदेखी नहीं है. यह जानबूझकर किया गया दमन है. इस प्रतिबंध के लिए सरकार द्वारा थोड़ा भी विश्वसनीय तर्क पेश न करना भेदभाव करने के उसके इरादों को उजागर करता है. यह चुनिंदा तरह से निशाना बनाया जाना अल्पसंख्यकों की आवाज़ को दबाने और दूसरों को बढ़ावा देने के लिए सुनियोजित एजेंडे को रेखांकित करता है, जो हमारे धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र की जड़ों को नष्ट कर रहा है.’
वेणुगोपाल ने आगे कहा, ‘इस शांतिपूर्ण धार्मिक जुलूस पर रोक लगाने का निर्णय भारत के संविधान के तहत दिए गए धार्मिक स्वतंत्रता पर एक गंभीर हमला है.’
वेणुगोपाल ने यह भी सवाल उठाया कि क्या दिल्ली में ईसाइयों को संविधान के अनुच्छेद 25 से बाहर रखा गया है जो धर्म की स्वतंत्रता की गारंटी देता है?
कांग्रेस नेता ने एक्स पर कहा, ‘आखिर कब से आस्था का पालन करना एक खतरा बन गया है? यह कोई अकेली घटना नहीं है.. यह लक्षित भेदभाव है.’
The BJP’s can’t even keep up its ‘so called pro-Christian’ gimmick for a single week. First the Organiser article targeting Church properties, and now the Delhi Police has denied permission for the sacred procession on the holy day of Palm Sunday.
Are Christians in Delhi… pic.twitter.com/AbmGhtLqPM
— K C Venugopal (@kcvenugopalmp) April 13, 2025
इससे पहले केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने दिल्ली पुलिस के इस फैसले की निंदा की. विजयन ने कहा, ‘सेंट मैरी चर्च से सेक्रेड हार्ट चर्च तक जुलूस निकालने की अनुमति नहीं दी गई. यह धार्मिक स्वतंत्रता और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की संवैधानिक गारंटी का उल्लंघन है.’
दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता संजय त्यागी ने कहा कि जुलूस के लिए कभी भी अनुमति नहीं दी गई थी. त्यागी ने द हिंदू को बताया, ‘जुलूस कुछ साल पहले शुरू हुआ था और आयोजकों को पहले भी इसकी अनुमति नहीं मिली थी. किसी भी पुलिसकर्मी ने जुलूस को सामने से नहीं रोका, आयोजकों ने खुद इसे नहीं निकाला.’
ज्ञात हो कि पिछले रविवार को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता शहर के ख्याला इलाके में रामनवमी के अवसर पर आयोजित शोभा यात्रा में शामिल हुईं थी. पीटीआई ने उनके हवाले से कहा था, ‘क्यों न दिल्ली को भगवा रंग में रंग दिया जाए, ताकि हर व्यक्ति खुशहाल हो और शहर प्रगति के रास्ते पर आगे बढ़े.’
