नई दिल्ली: भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी को 12 अप्रैल को बेल्जियम में हिरासत में लिया गया, यह जानकारी समाचार एजेंसी पीटीआई ने 14 अप्रैल की सुबह दी.
चोकसी को भारत की जांच एजेंसियों, यानी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के आग्रह पर हिरासत में लिया गया. इन एजेंसियों ने पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के 13,000 करोड़ रुपये के लोन घोटाले में चोकसी की संलिप्तता को लेकर प्रत्यर्पण की मांग की थी.
चोकसी, अरबपति हीरा कारोबारी नीरव मोदी के चाचा हैं, जो खुद 2018 के लोन घोटाले में एक और मुख्य आरोपी हैं.
खबरों में यह भी कहा गया है कि चोकसी की पत्नी बेल्जियम की नागरिक हैं. चोकसी एंटीगुआ और बारबुडा (कैरेबियन का एक देश) में रह रहे थे, फिर वहां से बेल्जियम चले गए.
2023 में एंटीगुआ और बारबुडा के हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि चोकसी को देश से निकाला नहीं जा सकता.
दरअसल, चोकसी ने कोर्ट में एक मुकदमा दायर कर यह दावा किया था कि 23 मई 2021 को उन्हें जबरन अपहरण कर डोमिनिका ले जाया गया, और यह कथित तौर पर भारत की खुफिया एजेंसी रॉ के अधिकारियों ने किया था.
इस याचिका के आधार पर इंटरपोल ने चोकसी के खिलाफ जारी रेड नोटिस को वापस ले लिया था, जिससे भारतीय एजेंसियों की योजना को बड़ा झटका लगा.
ईडी का कहना है कि चोकसी और उनकी कंपनी गीतांजलि ज्वेल्स और कुछ अन्य लोगों ने पीएनबी बैंक के अधिकारियों के साथ मिलकर धोखाधड़ी की. उन्होंने एलओयू (लेटर ऑफ अंडरटेकिंग) और एफएलसी (फॉरेन लेटर ऑफ क्रेडिट) को गलत तरीके से बढ़वाया और नियमों का पालन किए बिना बड़ी रकम हासिल की, जिससे बैंक को भारी नुकसान हुआ.
पिछले साल, यह रिपोर्ट आई थी कि गीतांजलि ज्वेल्स उन कंपनियों की सूची में सबसे ऊपर है जिन्हें भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने जानबूझकर कर्ज नहीं लौटाने वाली कंपनी घोषित किया था— यानी वे कंपनियां जिनके पास पैसे होते हुए भी उन्होंने कर्ज नहीं चुकाया.
पिछले साल मुंबई की एक विशेष अदालत, जो मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामलों की सुनवाई करती है, ने टिप्पणी की थी कि नीरव मोदी, विजय माल्या और मेहुल चोकसी जैसे आरोपी समय पर गिरफ्तार न होने के कारण देश से भागने में सफल हो गए— और इसके लिए जांच एजेंसियों की लापरवाही जिम्मेदार है.
