पाक सेना प्रमुख के ‘शिरा-ए-जिगर’ बयान पर विदेश मंत्रालय ने कहा: कश्मीर पर इस्लामाबाद का अवैध कब्ज़ा

बीते दिनों पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने कश्मीर को अपने देश की ‘शिरा-ए-जिगर’ (गले की नस) कहा था. इसके जवाब में भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि कश्मीर का पाकिस्तान से एकमात्र संबंध यह है कि वह इसके अवैध रूप से कब्ज़ाए हिस्सों को खाली करे.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जैसवाल. फोटो: लाइवस्ट्रीम से स्क्रीनशॉट

नई दिल्ली: पाकिस्तानी सेना प्रमुख द्वारा कश्मीर को अपने देश की ‘शिरा-ए-जिगर’ (गले की नस) बताए जाने को खारिज करते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस क्षेत्र का पाकिस्तान से एकमात्र संबंध यह है कि इस्लामाबाद इसके एक हिस्से पर अवैध कब्जा जमाए हुए है. 

गुरुवार (17 अप्रैल) को साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण के संदर्भ में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान अब भी 2008 मुंबई आतंकी हमलों के दोषियों को ‘बचाता’ आ रहा है और उसे उन्हें न्याय के कटघरे में लाना चाहिए. 

इससे पहले मंगलवार को पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने इस्लामाबाद में आयोजित ओवरसीज़ पाकिस्तानियों के सम्मेलन के दौरान कहा था कि सेना और सरकार का कश्मीर पर रुख यही है कि वह पहले भी देश की ‘शिरा-ए-जिगर’ था और आज भी है. यह वही शब्दावली है जिसका इस्तेमाल पहले भी पाकिस्तानी सरकारों द्वारा किया जाता रहा है.

जनरल मुनिर ने कहा, ‘हम इसे नहीं भूलेंगे. और हम अपने कश्मीरी भाइयों को भारतीय कब्जे के खिलाफ उनके वीरतापूर्ण संघर्ष में अकेला नहीं छोड़ेंगे.’ 

उनके बयान के बारे में पूछे जाने पर जायसवाल ने कहा, ‘किसी के गले में कोई विदेशी चीज कैसे आ सकती है?’ उन्होंने आगे कहा, ‘यह भारत का एक केंद्र शासित प्रदेश है. इसका पाकिस्तान से एकमात्र संबंध यह है कि वह इस क्षेत्र के अवैध रूप से कब्जाए गए हिस्सों को खाली करे.

जनरल मुनीर ने अपने बयान में पाकिस्तान के संस्थापक मुहम्मद अली जिन्ना के दो-राष्ट्र सिद्धांत का भी समर्थन किया. उन्होंने कहा, ‘हमारे पूर्वजों ने सोचा था कि हम जीवन के हर पहलू में हिंदुओं से अलग हैं. हमारा धर्म अलग है, हमारे रीति-रिवाज अलग हैं, हमारी परंपराएं अलग हैं, हमारे विचार अलग हैं, हमारी महत्वाकांक्षाएं अलग हैं.’ 

उन्होंने कहा, ‘यही वह आधार था जिस पर दो राष्ट्रों का सिद्धांत रखा गया था. हम दो राष्ट्र हैं, हम एक राष्ट्र नहीं हैं.’ 

‘आतंकवाद के केंद्र के रूप में पाकिस्तान की छवि बनी रहेगी’

विदेश मंत्रालय से गुरुवार को यह भी पूछा गया कि इस्लामाबाद ने राणा से खुद को अलग क्यों कर लिया है? राणा के बारे में राष्ट्रीय जांच एजेंसी का दावा है कि वह 2008 के हमलों के पीछे ‘मुख्य साजिशकर्ता’ और ‘मास्टरमाइंड’ था, जिसमें 166 लोग मारे गए थे. 

विदेश कार्यालय के प्रवक्ता शफकत अली खान ने पिछले गुरुवार को कहा था, जिस दिन राणा को अमेरिका से भारत प्रत्यर्पित किया गया था, जहां तक ​​हमारा रिकॉर्ड बताता है, उसने (राणा) पिछले दो दशकों से अपने पाकिस्तानी मूल के दस्तावेजों के नवीनीकरण के लिए आवेदन भी नहीं किया है.’ 

जायसवाल ने कहा कि भले ही इस्लामाबाद कितनी भी कोशिश कर ले, लेकिन ‘वैश्विक आतंकवाद के केंद्र के रूप में उसकी छवि कम नहीं होगी. राणा का प्रत्यर्पण पाकिस्तान को एक बार फिर याद दिलाता है कि उसे मुंबई आतंकी हमलों के अन्य अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए कार्रवाई करने की आवश्यकता है, जिन्हें वह अभी भी बचा रहा है.’ 

वॉशिंगटन द्वारा प्रत्यर्पण करने का निर्णय लिए जाने और अमेरिकी न्यायपालिका द्वारा इसे मंजूरी दिए जाने के बाद पाकिस्तानी मूल के कनाडाई नागरिक तहव्वुर राणा को भारत सरकार के आरोपों का सामना करने के लिए भारत लाया गया. 

राणा को साल 2011 में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा को भौतिक सहायता प्रदान करने के लिए एक अमेरिकी अदालत ने दोषी ठहराया था, हालांकि उसे मुंबई हमलों में भौतिक सहायता प्रदान करने की साजिश रचने के आरोप से बरी कर दिया गया था.